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मानसून से पहले रेत के अवैध ढेर लगाने की होड़… 4 की अनुमति, हकीकत में 200 जगह रेत डंप

मानसून की आहट के साथ ही शहर में जगह-जगह रेत के ढेर दिखाई देने लगे हैं। सडक़ों, फुटपाथों और कई जगह खाली प्लॉटों में रेत के ढेर लग गए हैं और कई जगह लगते जा रहे हैं। रेत का वैध और अवैध

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illegal sand

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ग्वालियर. मानसून की आहट के साथ ही शहर में जगह-जगह रेत के ढेर दिखाई देने लगे हैं। सडक़ों, फुटपाथों और कई जगह खाली प्लॉटों में रेत के ढेर लग गए हैं और कई जगह लगते जा रहे हैं। रेत का वैध और अवैध कारोबार करने वाले लोग मानसून में इसी रेत से डबल मुनाफा कमाएंगे, लेकिन खनिज विभाग के अफसरों को ये रेत के ढेर दिखाई नहीं देते। जबकि हकीकत यह है कि शहर में सिर्फ 4 जगह ही रेत के ढेर की अनुमति दी गई है, जबकि अभी तक 200 से ज्यादा जगहों पर ढेर लग गए हैं।

इधर रेत माफिया ने ङ्क्षसध नदी को पूरी तरह से अपने शिकंजे में ले लिया है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के नियमों को ठेंगा दिखाते हुए ङ्क्षसध नदी के सीने को दिन-रात छलनी किया जा रहा है। आगामी बारिश के सीजन में जब नदी उफान पर होगी और खनन बंद रहेगा, तब रेत को सोने के भाव बेचने के लिए रेत लाकर शहर में डंप की जा रही है।

कार्रवाई का भी खौफ नहीं

खनिज विभाग की कार्रवाई अब केवल खानापूर्ति तक सीमित नजर आ रही है। 12 मई को लुहारी गांव में राजस्व टीम ने 120 ट्रॉली रेत जब्त की थी। वहीं 16 मई को डबरा और पिछोर के घाटों पर भी कार्रवाई हुई। इन कार्रवाइयों के बावजूद माफिया के हौसले पस्त नहीं हुए हैं। हफ्ते-पखवाड़े में एक बार होने वाली रेड से अवैध ङ्क्षसडिकेट को कोई फर्क नहीं पड़ रहा है।

6 हजार की ट्रॉली बारिश में होगी 12 हजार पार

  • माफिया की नजर मानसून के उस समय पर है, जब जुलाई से सितंबर के बीच नदी से खनन पूरी तरह प्रतिबंधित रहता है। उस समय रेत को महंगे दामों में बेचा जाता है। शहर के खाली प्लॉटों, बड़ागांव, डीडी नगर, विक्की फैक्ट्री, हजीरा और गोल पहाडिय़ा जैसे इलाकों में अभी से रेत डंप की जा रही है।
  • वर्तमान में नदी से रेत की एक ट्रॉली की भराई करीब 6 हजार रुपए है। लेकिन जैसे ही बारिश शुरू होगी, डंप की गई इसी रेत को 12 से 15 हजार रुपए में बेचा जाएगा। शहर के भीतर ही रेत की अवैध मंडियां फिर से सजने लगी हैं, जहां सुबह से ही ट्रैक्टरों और डंपरों की कतारें देखी जा सकती हैं।

पत्रिका व्यू… माफिया को किसी का डर नहीं

ङ्क्षसध नदी अंचल की जीवनरेखा है, जिसे रेत माफिया अपनी तिजोरियां भरने के लिए धीरे-धीरे मार रहा है। नदी में पनडुब्बियों का चलना और शहर में 200 से अधिक अवैध डंप होना यह साबित करता है कि माफिया को न तो कानून का डर है और न ही एनजीटी के आदेशों की परवाह। जिला प्रशासन और खनिज विभाग की सुस्त कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठना लाजिमी है। अगर समय रहते इन अवैध डंपों को जब्त नहीं किया गया, तो बारिश में माफिया जनता की जेब पर डाका डालेगा और सरकार के राजस्व को करोड़ों की चपत लगेगी।

इनका कहना

डंप पर भी कार्रवाई कर रहे हैं। पिछले हफ्ते भी कार्रवाई की थी। जिले में कहां-कहां और कैसे रेत के अवैध ढेर लगे हैं, इसकी जानकारी जुटाई जा रही है। जल्द ही बड़े स्तर पर जब्ती की जाएगी।
घनश्याम यादव, जिला खनिज अधिकारी, ग्वालियर