
तिघरा डैम
ग्वालियर. मई की तेज गर्मी के साथ ग्वालियर में जल संकट गहराने लगा है। शहर की जीवनदायिनी तिघरा डैम का जलस्तर तेजी से घट रहा है और मौजूदा स्थिति में डैम में उसकी कुल क्षमता का केवल 44.8 प्रतिशत पानी ही बचा है। हालात ऐसे हैं कि नगर निगम अब एक दिन छोड़कर पानी सप्लाई करने जैसे बड़े फैसले पर विचार कर रहा है।शहर में पानी की समस्या को लेकर लोगों का गुस्सा भी खुलकर सामने आने लगा है। सोमवार को नगर निगम परिषद की बैठक में वार्ड-1 की पार्षद धरने पर बैठ गईं, जबकि वार्ड-2 की महिला पार्षद ने विरोध में मटका फोड़ दिया। वार्ड 22, 27, 29, 38, 39, 42, 49, 54, 55, 58 और 59 समेत कई इलाकों में लोग पानी के लिए परेशान हैं।
16 जुलाई तक का बचा पानी
तिघरा डैम का जलस्तर घटकर 727.9 फीट पर पहुंच गया है। डैम में अब केवल 1892.03 एमसीएफटी पानी शेष है। शहर को प्रतिदिन करीब 12.79 एमसीएफटी पानी की सप्लाई की जा रही है। इसी गति से पानी निकासी जारी रही तो तिघरा 16 जुलाई तक ही शहर की प्यास बुझा पाएगा। यदि जल्द सख्त निर्णय नहीं लिया गया तो अगस्त की शुरुआत तक हालात और गंभीर हो सकते हैं।
तिघरा लेवल कम होती ही चूड़ी की संख्या भी बढ़ाकर अब 36 की, पूर्व में खुली थी 34 चुड़ी
स्थिति को देखते हुए जल संसाधन विभाग ने मंगलवार को डैम से पानी खींचने के लिए चूड़ियों की संख्या 34 से बढ़ाकर 36 कर दी है। तिघरा प्रभारी वीरेंद्र यादव ने बताया कि फिलहाल प्रतिदिन 12.79 एमसीएफटी पानी लिया जा रहा है और जुलाई-अगस्त तक पानी उपलब्ध रहने की उम्मीद है।
बड़ी वजह पानी की बर्बादी
-एक ओर शहर पानी के संकट से जूझ रहा है, वहीं दूसरी तरफ मुख्य पाइप लाइनों से रोज लाखों लीटर पानी सड़कों पर बह रहा है।
-नाका चंद्रबदनी, बिरलानगर, हजीरा, थाटीपुर, सेवानगर, महलगांव और शिवाजी नगर जैसे इलाकों में लीकेज के कारण पानी की भारी बर्बादी हो रही है। पीएचई विभाग के कुप्रबंधन का असर भी साफ दिखाई दे रहा है।
-कई क्षेत्रों में तिघरा और बोरवेल का पानी मिलाकर सप्लाई किया जा रहा है, जिससे वितरण व्यवस्था प्रभावित हो रही है। वहीं रामनगर, पंचशील नगर, अलालपुर और गिरवाई जैसे कई इलाके अब भी टैंकरों पर निर्भर हैं।
Published on:
20 May 2026 05:37 pm
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