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रावण को युद्ध में परास्त कर सहस्त्रबाहु अर्जुन का बढ़ गया अहंकार, परशुराम ने किया वध

नाटक परशुराम गाथा का मंचन

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रावण को युद्ध में परास्त कर सहस्त्रबाहु अर्जुन का बढ़ गया अहंकार, परशुराम ने किया वध

रावण को युद्ध में परास्त कर सहस्त्रबाहु अर्जुन का बढ़ गया अहंकार, परशुराम ने किया वध

ग्वालियर.

छाया मंदिर नाट्य संस्थान ग्वालियर एवं आइआइटीटीएम संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में शनिवार को भगवान परशुराम के जीवन पर आधारित महानाट्य ‘परशुराम गाथा’ का मंचन हुआ। इस नाटक के लेखक अनिरुद्ध तिवारी एवं
निर्देशक संजय सिंह जादौन हैं। लगभग सवा घंटे के नाटक में कलाकारों ने अच्छा अभिनय किया। पूरे समय वे दर्शकों को बांधने में सफल रहे।


अहंकार से चूर सहस्त्रबाहु अर्जुन ने किया मुनि, तपस्वी का वध
नाटक में दिखाया गया कि सहस्त्रबाहु अर्जुन ने भगवान दत्तात्रेय को अपनी आराधना से प्रसन्न कर सहस्त्र भुझावल का वरदान पाया। वरदान के अहंकार में चूर होकर उसने ऋ षि मुनि, तपस्वी पर अत्याचार करने लगा और रावण को युद्ध में परास्त करने के बाद उसका अहंकार बहुत अधिक बढ़ गया। दूसरी तरफ ऋषि ऋ तिक के आशीर्वाद से जमदग्नि के आश्रम में रेणुका माता ने परशुराम को जन्म दिया।

पिता के आदेश पर परशुराम ने काट दिया मां और भाइयों का सिर
बड़े होकर परशुराम ने भगवान शिव की आराधना की और उन्होंने वरदान स्वरूप पिनाक धनुष, परशु और चिरंजीवी का वरदान दिया। अपने पिता के आदेश पर परशुराम ने माता और अपने भाइयों का सिर काटकर फिर अपने पिता से ही उन्हें पुन: जीवित कराया। इस प्रकार उन्होंने मातृ भक्ति और पुत्र भक्ति का प्रमाण दिया। दूसरी तरफ सहस्त्रबाहु अहंकार में आकर जमदग्नि ऋ षि की कामधेनु गाय को लेकर चला गया। तब अपने पिता के आदेश पर परशुराम और सहस्त्रबाहु में युद्ध हुआ जो ब्राह्मण और क्षत्रिय का नहीं अहंकार और अधिकार की लड़ाई थी, जिसमें परिणाम स्वरुप सहस्त्रबाहु अर्जुन का वध हुआ।

परशुराम ने राजा जनक को दिया शिव धनुष
सहस्त्रबाहु अर्जुन के पुत्रों ने अपने पिता के हत्या का बदला लेने के लिए परशुराम के पिता जमदग्नि ऋ षि का वध किया। तब परशुराम ने पूरी धरती को अत्याचार विहीन करने की शपथ ली और और उसे पूर्ण करने के बाद प्रायश्चित करने भगवान शिव के पास गए तो भगवान शिव ने उन्हें अपना धनुष देने के लिए रावण और राजा जनक में से किसी एक को चुनने को कहा। इस पर परशुराम ने अपना धनुष राजा जनक को दिया, फिर राम सीता विवाह में शिव धनुष टूटने पर राम और परशुराम का आमना-सामना हुआ। परशुराम ने राम में भगवान विष्णु के रूप को देखा और वह तपस्या के लिए निकल गए फिर अंबा के कारण परशुराम और विष्णु में युद्ध हुआ। अंत मे श्रीकृष्ण को सुदर्शन चक्र देकर उनसे कहा कि लीलाएं बहुत कर ली माखन बहुत खा लिया, अब वह कर करो जिसके लिए अवतार लिया है।

ये रहे पात्र
परशुराम- ऋतुराज चौहान
वसुंधरा व रेणुका- ज्योति अतरोलिया
ऋषि जमदग्नि- संजय सिंह जादौन
सहस्त्रबाहु अर्जुन- दिनेश चन्द्र दुबे
श्रवण की मां- रेणु झंवर
रावण- आलौकिक शर्मा
राजा जनक- मनीश शर्मा
महारानी सुनयना- भारती
सत्यवती- कनिष्का गुर्जर
ऋषि संदीपनी- अनिरुद्ध तिवारी