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सनातनी ब्राम्हण ने रखा ‘बनीÓ को बहू बनाने का प्रस्ताव

मप्र मराठी नाट्य महोत्सव

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ग्वालियर.

आर्टिस्ट कम्बाइन के 83वें स्थापना दिवस के अवसर पर 'मप्र मराठी नाट्य महोत्सवÓ की श्रंखला में अंतिम मराठी नाटक 'हे घ्या एक फूलÓ का मंचन हुआ। यूट्यूब पर प्रसारित इस नाटक के लेखक बाबा डिके हैं और निर्देशक श्रीराम जोग हैं। यह नाटक फेमस राइटर बर्नार्ड शॉ के पिग्मेलियन पर आधारित है। सवा दो घंटे के इस नाटक में यह बताया गया है कि शिक्षा से व्यक्ति को पूरी तरह से बदला जा सकता है।

ये है कहानी
बनी नामक एक हरिजन लड़की रेल से यात्रा करते वक्त एक सनातनी ब्राम्हण के पास बैठ जाती है। जात पात मानने वाले ये महाशय उसे दूर बैठने को कहते हैं। उसके पास बैठने के कारण खुद के थर्मस में रखा पानी भी फेंक देते है। ये घटना सामने के सीट पर बैठा एक समाजिक कार्यकर्ता नरहरि देखता है और उस लड़की को अपने बड़े भाई अप्पा के घर उसे शिक्षित करने ले आता है। सेवानिवृत्त अप्पा शुरुआत में बनी पर चिढ़ते हैं, गुस्सा होते हैं, लेकिन आखिर में 6 माह में इसकी भाषा शुद्ध करने का संकल्प लेते है। और अब शुरू होता है बनी को शिक्षित करने का प्रयास। देखते-देखते बनी की भाषा शुद्ध होती है, वो मैनर्स भी सीखने लगती है। नाटक, कविता, गीत और अच्छे साहित्य के माध्यम से पढऩा, बोलना, प्रस्तुकरण सभी बातें सीख जाती है।

'बनीÓ की विद्वता देख प्रभावित होते हैं सभी
6 माह पूरे होने पर एक सांस्कृतिक कार्यक्रम में वो एकपात्री नाटक की प्रस्तुति देती है। इस प्रस्तुति को देखने वाले मुख्य अतिथि वो ही सनातनी कर्मठ ब्राह्मण होते हैं, जिन्होंने इसे अपने से दूर बैठने को कहा था, लेकिन इस शिक्षित बनी को वो भी पहचान नहीं पाते कि ये वो ही हरिजन लड़की है और वहां उसकी भाषा उसकी विद्वत्ता देखकर अप्पा साहेब से उसे अपनी बहू बनाने का प्रस्ताव रखते है।

इन्होंने निभाया किरदार
अप्पा कुलकर्णी- श्रीराम जोग
मुरली- अंकुर लोकरे
नरहरि कुलकर्णी- विकास डिंडोरकर
भगवंत कुलकर्णी- सौजन्य लघाटे
यशवंत कुलकर्णी- लोकेश निमगांवकर
बनी चा बाप- जय हार्डिया