
सद्गुरु के चरणों में ही मिल सकती है परम शांति
ग्वालियर. इस भौतिक युग में मानव का मन बहुत अशांत है और शांति के लिए मानव जहां-तहां भटकता रहता है लेकिन उसको कहीं शांति की प्राप्ति नहीं होती। अगर किसी को शांति की प्राप्ति होती है तो वह सद्गुरु के चरणों में आकर ही होती है। जो साधक सद्गुरु का आश्रय लेता है एवं उनके ज्ञान को पचाता है उस साधक के जीवन में परम शांति की प्राप्ति हो जाती है। यह विचार बड़ोदा गुजरात से आए अंतर्राष्ट्रीय रामस्नेही संप्रदाय के संत रामप्रसाद ने लक्ष्मीगंज रामद्वारा में 10 दिवसीय सत्संग समारोह में सोमवार को व्यक्त किये।
उन्होंने आगे कहा कि सद्गुरु के ज्ञान से हमारा मन भी निर्मल होता है। सद्गुरु से प्रेरणा प्राप्त करके साधक सेवा का मार्ग अपनाता है उसका तन भी पवित्र होता है। सद्गुरु को साधक का धन नहीं चाहिए साधक का जीवन पवित्र बने यही सद्गुरु की आकांक्षा होती है इसलिए गुरु के समान तीनों लोक में और कोई दाता हो नहीं सकता और शिष्य के समान कोई याचक हो नहीं सकता। परम शांति तो सद्गुरु के बताए हुए मार्ग पर चलकर ही प्राप्त हो सकती है, इसलिए साधक को गुरु के बताए हुए मार्ग पर चलना चाहिए। सत्संग में रामद्वारा ट्रस्ट के ट्रस्टी राम नारायण अग्रवाल परिवार के द्वारा व्यासपीठ की आरती की गई एवं सभी भक्तों को प्रसाद वितरण किया गया।
Published on:
25 Nov 2019 11:28 pm
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