
सहकारी बैंक को 20 करोड़ की चपत लगाने वालों पर कस सकता है शिकंजा
ग्वालियर। जिला सहकारी बैंक मर्यादित 38 साल से प्रबंधन और कर्मचारियों की बदनीयत का शिकार हो रहा है। अब तक 50 करोड़ रुपए से अधिक की आर्थिक अनियमितताएं की गई हैं, जिनमें 20 करोड़ 57 लाख 32 हजार रुपए का गोलमाल जांच टीम की नजर में आ चुका है। इसके बाद भी समिति प्रबंधक, सहायक समिति प्रबंधक, शाखा प्रबंधक, पर्यवेक्षक, संस्था अध्यक्ष तथा अन्य कर्मचारियों से न तो वसूली हो पाई है, न ही आपराधिक प्रकरणों के साथ कोई ठोस कार्रवाई हुई है। अब प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद जहां बैंक में कांग्रेस का प्रबंधन आने की संभावना है, वहीं पिछले वर्षों में आर्थिक अनियमितताएं करने वाले अधिकारियों, कर्मचारियों तथा संचालकों पर शिकंजा कसने की भी संभावना है।
1980 से लेकर 2003 तक ज्यादातर समय बैंक का प्रबंधन कांग्रेस के पास रहा है और 2004 से लेकर फरवरी 2013 तक भाजपा का कब्जा रहा है। सबसे ज्यादा आर्थिक अनियमितताओं के प्रकरण भाजपा के प्रबंधन के दौरान सामने आए हैं। राजनीतिक संरक्षण में हुए आर्थिक गोलमाल में 26 कर्मियों के विरुद्ध सबूत होने के बाद भी बैंक प्रबंधन लगातार ढील डाले रहा है। स्थिति यह रही है कि अध्यक्ष का कार्यकाल खत्म होने के बाद पांच साल से प्रशासक के रूप में काम कर रहे कलेक्टर भी ठोस कदम नहीं उठा पाए हैं।
पिछले साल आई थी रिपोर्ट
ऐसे हुईं अनियमितताएं
अटकी है ऋ ण माफ ी और ऋ ण राहत योजना की जांच
Published on:
21 Dec 2018 04:43 pm
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