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शुरु होते ही फिर बंद हुए स्कूल, जानें क्यों स्कूल में पढ़ाई पर लगाई गई रोक

- जुलाई तक रूक रूक कर बंद होते रहेंगे MP में स्कूल! - गर्मियों की छूट्टी के बाद प्रारंभ हुए स्कूल फिर बंद हो गए - बंद हुए कुछ स्कूल लगाएंगे ऑनलाइन क्लास

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ग्वालियर / इंदौर/ राजगढ़। एक ओर जहां लंबे समय बाद स्कूल अभी शुरु ही हुए थे, कि एक बार फिर मध्यप्रदेश के स्कूल के स्कूल बंद होने जा रहे है। ऐसे में एक बारफिर बच्चों की ऑनलाइन कक्षाएं शुरु हो जाएंगी। इस बाबत अधिकारियों द्वारा स्कूलों को जानकारी भी दे दी गई है।

दरअसल मध्यप्रदेश में होने वाले चुनावों के चलते अनेक स्कूलों की बसों का अधिग्रहण किया गया है। बसों के अधिग्रहण से बच्चों का स्कूल पहुंच पाना मुमकिन नहीं हो पाएगा इसी को देखते हुए कई स्कूलों की छुट्टी करनी पड़ रही है और छात्र-छात्राओं को ऑनलाइन क्लास का विकल्प भी दिया गया है।

प्रदेश में विभिन्न जगहों पर यात्री और स्कूल बस संचालकों को नोटिस जारी कर चुनाव से पहले निश्चित तारीख तक एक निश्चित स्थान पर बस भेजने के निर्देश दिए जा चुके हैं। जिसके बाद अब इन यात्री बसों के अलावा स्कूल बसों को भी चुनाव कार्य के लिए भेज दिया गया है। अभी यह स्कूल 26 तक ही बंद रहेंगे क्योंकि इस दिन बसें वापस आ जाएंगी। वहीं इसके बाद ये सिलसिला 1 जुलाई और 8 जुलाई को होने वाले चुनावों के समय भी रहने का अनुमान है।

जानकारों के अनुसार ऐसे में अब स्कूल पुन: चुनाव से बसों के लौटने के बाद ही शुरू हो सकेंगे। प्रदेश में पंचायत चुनाव के तहत तीन चरणों में 25 जून, 1 जुलाई और 8 जुलाई को मतदान कराया जाएंगे, ऐसे में प्रदेश के विभिन्न जिलों में चुनाव के दौरान बस की अनुपस्थिति में स्कूल बंद रह सकते हैं।

इस संबंध में ग्वालियर व इंदौर में कई स्कूल द्वारा इन दिनों बंद रखने की सूचना भी बच्चों व अभिभावकों को दी जा चुकी हैं। बताया जाता है स्कूल बसों का अधिग्रहण के चलते जहां कई स्कूल पूरी तरह बंद हो गए हैं, जबकि कुछ स्कूल इससे न के बराबर प्रभावित हैं कारण ये है कि इन स्कूलों में अधिकांश या सभी बच्चे बिना बस के ही आते हैं।

इंदौर: पंचायत चुनाव के लिए परिवहन विभाग ने बुधवार को 77 उपनगरीय बसें जहां हरदा भेजीं, वहीं जिले के लिए गुरुवार को 350 बसों का अधिग्रहण किया गया। ये सभी 350 बसें स्कूलों की हैं। कुछ स्कूलों की तो सभी बसें ले ली गईं, जिससे कई स्कूलों ने तीन दिन की छुट्टी का फरमान जारी कर दिया है। पंचायत से लेकर निगम चुनाव में करीब 1 हजार बसें लगेंगी। विभाग ने इसकी तैयारी पहले ही कर ली थी। यात्री और स्कूल बसों को अधिग्रहित किया जा रहा है। बुधवार को जहां उपनगरों की यात्रा करने वाले लोगों को परेशानी हुई, वहीं कई स्कूलों ने गुरुवार से लेकर शनिवार तक छुट्टी घोषित कर दी है, क्योंकि बसें चुनाव में लगने से बच्चों को लाने-ले जाने का साधन नहीं है।

ग्वालियर: जिला प्रशासन द्वारा पंचायत चुनाव के लिए ग्वालियर में क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय की ओर से 200 बसें अधिग्रहण किया जा रहा है। जिनमें कई स्कूली बसें भी हैं। ऐसे में यहां के कई स्कूलों की छुट्टी करते हुए उन्हें बंद करना पड़ रहा है। कई स्कूलों द्वारा यहां इस दौरान बच्चों की ऑनलाइन क्लास भी लगाई जाएगी, ताकि बच्चों की पढ़ाई का ज्यादा नुक्सान न हो।

Gwl. आरटीओ की ओर से यात्री और स्कूल बस संचालकों को नोटिस जारी कर 22 जून तक बसों को पॉलीटेक्निक कालेज में भेजने के निर्देश दिए गए थे। जिसके बाद स्कूल बसें चुनाव कार्य के लिए भेज दी गईं। अब स्कूल दोबारा चुनाव से बसों के लौटने के बाद ही शुरू हो सकेंगे। जिले में पंचायत चुनाव के लिए 25 जून को मतदान है।

इसके बाद यहां 1 जुलाई व 8 जुलाई को भी चुनाव है, ऐसे में इस दौरान भी बसों का अधिग्रहण स्कूलो को प्रभावित करेगा जिसके चलते इस दौरान भी स्कूलों के बंद रहने की संभावना है।

जानकारों की मानें तो यह पूरी स्थिति जून अंत से शुरु होकर जुलाई के प्रथम सप्ताह तक लगातार बनती रहेगी यानि जब जब चुनाव होंगे तब तब बसों के अधिग्रहण से स्कूल बंद रहकर आॅनलाइन कक्षाएं चलाएंगे। वहीं विभिन्न चुनावों के चरणों में अंतर के आधार पर बसों की मौजूदगी होने पर स्कूल खुलते भी रहेंगे। ये भी ध्यान रहे की यह स्थिति केवल उन स्कूल वालों पर ही रहेगी, जिनके यहां अधिकांश बच्चें बसों से ही स्कूल आते है। वहीं जिन स्कूलों में बस की सुविधा नहीं है या जहां अधिकांश बच्चे अपने वाहनों या पैदल आते है। इस समय उनकी कक्षाओं में कोई असर नहीं आएगा।

इसके अलावा जहां तक सरकारी स्कूलों की बात की जाए तो चुनाव के चलते यहां के कई शिक्षक या कर्मचारी चुनावी ड्यूटी में हैं। ऐसे में भले ही शासन द्वारा चुनावी प्रक्रिया होने के कारण ही समय से पहले स्कूल खोल दिए गए थे। ताकि बच्चों की पढ़ाई किसी तरह से प्रभावित ना हो। वहीं राजगढ़ के ग्रामीण क्षेत्रों में अनेक बच्चों के परिजनों का कहना है कि हम स्कूल इसलिए नहीं गए, क्योंकि शिक्षक कहते हैं 1 तारीख से स्कूल लगेंगे।

अब पढ़ाई की प्रक्रिया बदल दी गई है और प्रतिमाह होने वाली पढ़ाई और किताबों में पाठ निर्धारित कर दिए गए हैं। लेकिन जिस तरह से कुछ शिक्षकों की ड्यूटी चुनावी प्रक्रिया में लगाई गई है। उसका लाभ अन्य शिक्षक भी उठा रहे हैं। ऐसे में जो स्कूल समय पर खुलना चाहिए वह ना समय पर खोल रहे हैं और ना ही उनमें बच्चे नजर आ रहे हैं।

मध्याह्न भोजन भी बंद
वहीं राजगढ़ क्षेत्र के जिन स्कूलों में शिक्षक व बच्चे मिले, यानि स्कूल खुले हुए थे। वहां अभी भी बच्चों को मध्याह्न भोजननहीं दिया जा रहा है। ऐसे में लोगों का आरोप है कि शासन स्तर पर जब स्व सहायता समूह का भुगतान होता है तो बजट जारी करने वाले मध्याह्न भोजन प्रभारी और समूह के संचालक सांठगांठ कर पूर्व भुगतान कर देते हैं।