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गजकेसरी राजयोग, भरणी नक्षत्र और शोभन योग में 19 मई को वट सावित्री व्रत के साथ मनाई जाएगी शनि जयंती

- महिलाएं सुहाग के लिए करेंगी वट सावित्री का व्रत तो शनि मंदिरों पर तेल से होगा शनिदेव का अभिषेक

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गजकेसरी राजयोग, भरणी नक्षत्र और शोभन योग में 19 मई को वट सावित्री व्रत के साथ मनाई जाएगी शनि जयंती

गजकेसरी राजयोग, भरणी नक्षत्र और शोभन योग में 19 मई को वट सावित्री व्रत के साथ मनाई जाएगी शनि जयंती

ग्वालियर. ज्येष्ठ कृष्ण अमावस्या पर 19 मई शुक्रवार को गजकेसरी राजयोग, भरणी नक्षत्र और शोभन योग में वट सावित्री अमावस्या एवं शनि जयंती एक साथ मनाई जाएगी। ज्योतिषाचार्य डॉ.सतीश सोनी ने बताया कि वैदिक ज्योतिष में शनि देव को न्याय और कर्म का कारक ग्रह माना गया है। वर्तमान में शनि देव अपनी मूल त्रिकोण राशि कुंभ में गोचर कर रहे हैं और आगामी 17 जून 2023 को अपनी राशि में वक्री हो जाएंगे। इसके बाद 4 नवंबर को शनि मार्गी होंगे। आगामी 19 मई को जेठ अमावस्या के दिन वट सावित्री व्रत और शनि जयंती पर ग्रहों का बेहद शुभ संयोग बन रहा है। माना जा रहा है इन शुभ संयोग के बीच वट सावित्री व्रत के साथ शनि जन्मोत्सव पर पूजा पाठ करने से विशेष लाभ की प्राप्ति होगी। इस दिन सुहागिन महिलाएं वट सावित्री व्रत मनाएंगी। व्रती महिलाएं विभिन्न मंदिरों में सामूहिक रूप से बरगद की पूजा कर देवी सावित्री के त्याग, पति व्रत धर्म का स्मरण करती हुईं सुहाग सामग्री अर्पित कर अखंड सौभाग्य की कामना करेंगी। वट सावित्री व्रत सौभाग्य वर्धक, पापहारक और धन-धान्य प्रदान करने वाला है। इसी दिन शनि जयंती भी पड़ रही है। शहर के विभिन्न शनि मंदिरों में न्याय के देवता की विशेष पूजा-अर्चना के साथ श्रद्धालु तेलाभिषेक भी करेंगे।

सुहागिनें करेंगी वट वृक्ष की पूजा
ज्येष्ठ अमावस्या पर 19 मई को सुहागिन महिलाएं वट सावित्री व्रत करेंगी। इस दिन महिलाएं वट पूजा कर सावित्री के त्याग, पति प्रेम और पति व्रत धर्म का स्मरण करती हैं। शास्त्रों में वट वृक्ष की शाखाओं को देवी सावित्री का रूप माना गया है। इनमें बह्मा, शिव, विष्णु के साथ स्वयं सावित्री निवास करती हैं। अग्नि पुराण के अनुसार बरगद उत्सर्जन को दर्शाता है। इस व्रत को महिलाएं संतान प्राप्ति के लिए भी करती हैं। इस दिन महिलाएं वट वृक्ष की अक्षत, पुष्प, चंदन, सुपारी से पूजा करेंगी।

दूर हो सकते हें ग्रहों के अशुभ प्रभाव
वट सावित्री व्रत के दिन बरगद और पीपल की पूजा करने से शनि, मंगल और राहु के अशुभ प्रभाव दूर हो सकते हैं। सुहागिनों को वंश वृद्धि, दांपत्य जीवन में सुख-शांंति, परिवार में समृद्धि और वैवाहिक जीवन में आने वाले कष्टों से मुक्ति मिलती है। इस दिन पूजा करने के बाद सत्यवान सावित्री की कथा का श्रवण करने से परिवार पर आने वाली बाधाएं भी दूर हो सकती हैं।

क्या ना करें
शनिदेव की पूजा करते समय मूर्ति के ठीक सामने ना खड़े हो और ना ही उनकी आंखों के दर्शन करें। शनि पूजा के समय उनके चरणों की ओर देखने का विधान है। शनि देव की दृष्टि अशुभ मानी जाती है, इसलिए उनकी आंखों को देखकर पूजा नहीं की जाती।