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कलेक्टर बोले- शौचालय बनवाओ नहीं तो नौकरी से निकला दूंगा

कम से कम 100-100 शौचालयों का निर्माण कराने का लक्ष्य दिया है। साथ ही चेतावनी भी जारी की है कि जो भी सदस्य ऐसा न कर पाया, वह नौकरी में नहीं रहेगा।

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Gaurav Sen

Dec 17, 2016

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ग्वालियर/श्योपुर। गरीब वर्ग के लोगों की आजीविका सुधारने का दम भरने वाला एनआरएलएम अपने ही समूह सदस्यों के यहां शौचालयों का निर्माण नहीं करा सका है।

यही वजह है कि इस स्थिति को कलेक्टर अभिजीत अग्रवाल ने बेहद गंभीर माना है और एनआरएलएम के सभी 60 पीएफटी मैंबरों से मुखातिब होते हुए दो टूक शब्दों में उन्हें एक माह के भीतर समूह सदस्यों के यहां पर कम से कम 100-100 शौचालयों का निर्माण कराने का लक्ष्य दिया है। साथ ही चेतावनी भी जारी की है कि जो भी सदस्य ऐसा न कर पाया, वह नौकरी में नहीं रहेगा।

ऐसा करने में असफल रहने वाले सदस्य या तो खुद ही नौकरी छोड़ जाएं और यदि नौकरी पर आ भी जाए तो अपना रेजिग्रेशन देकर वापस चले जाएं। क्योंकि इस स्थिति में कोई मेरे सामने आया तो उसे मैं नौकरी से निकालकर बाहर कर दूंगा। याद रहे कि एनआरएलएम के वर्तमान में चार हजार 353 स्व-सहायता समूह हैं, जिनमें 47 हजार 441 महिलाएं सदस्य के रूप में जुड़ी हुई हैं। लेकिन इनमें से अभी तक महज 3 हजार 500 करीब सदस्यों के ही शौचालय बने हुए हैं, जिसकारण से जिला प्रशासन के अफसर नाराज हैं।

अफसरों का कहना है कि जिले में जीवनस्तर सुधारने और आजीविका बढ़ाने के इस कार्यक्रम की शुरूआत हुए करीब 10 साल का समय हो गया है, वर्ष 2005 में एमपीआरएलपी से शुरू होकर एनआरएलएम तक के लंबे समय में समूहों के घरों में ही शौचालय न बनना प्रशासनिक असफलता दर्शाता है, क्योंकि जब हम अपनों से जुड़े लोगों के यहां पर ही शौचालय नहीं बनवा सकेंगे, तब दूसरों को कैसे इसके लिए प्रोत्साहित कर सकेंगे।इसलिए अब बिना किसी देरी के सभी सदस्य दिए गए लक्ष्य को पूर्ण करने में जुट जाएं, एक माह बाद फिर समीक्षा की जाएगी।

महज 8030 शौचालय ही हैं उपयोगी
जिले में 140522 परिवार हैं, जिनमें से 8030 के यहां पर उपयोगी शौचालय ही ऐसे हैं जो उपयोगी स्थिति में हैं। चालू वित्तीय वर्ष में श्योपुर को 50 हजार शौचालयों का निर्माण करना है और वित्तीय वर्ष समाप्त होने में महज 3 माह का समय रह गया है, जिसमें 42 हजार करीब शौचालयों का निर्माण अभी संभव नजर नहीं आ रहा है, यहीवजह है कि प्रशासनिक अफसरों के द्वारा शौचालयों की समीक्षा करते हुए इसमें प्रगति के निर्देश लक्ष्य के साथ दिए गए हैं।

पंचायत सचिव और सरपंचों का भी कटेगा वेतन
शौचालयों की प्रगति को लेकर सीईओ जिला पंचायत द्वारा भी तीखे तेवर देते हुए ग्राम पंचायत सचिव, रोजगार सहायक और सरपंचों को हिदायत दी गई है कि शौचालयों का लक्ष्य पूर्ण किया जाए, अगर किसी ग्राम पंचायत में लक्ष्य मुताबिक शौचालयों का निर्माण नहीं हो पाता है तो फिर सचिवों को वेतन काटा जाएगा, जबकि रोजगार सहायकों को बाहर कर दिया जाएगा। ऐसे सरपंचों पर भी धारा 40 की कार्रवाई की जाएगी, जिनके यहां पर शौचालय न हो।

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