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लंपी वायरस का असर , 50% तक बड़ी कंपनियों के बटर, क्रीम और देसी घी की शार्टेज

लंपी वायरस, त्योहारों और सहालग की मांग ने बिगाड़े हालात

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ग्वालियर। मक्खन, क्रीम और देसी घी की मांग शहर में हर सीजन में रहती है। खासकर त्योहार और सहालग के सीजन में मांग काफी बढ़ जाती है। लेकिन कोरोना संक्रमण काल के दो साल बाद पिछले त्योहारी और सहालग के सीजन और लंपी वायरस ने ऐसे हालात पैदा कर दिए कि दूध से बने बड़ी कंपनियों के मक्खन, देसी घी और क्रीम बाजार से 50 फीसदी तक शॉर्ट हो गए हैं। करीब 20 दिन से शहर में इन सभी उत्पादों की कमी बनी है। बताया जा रहा है कि नए साल में आपूर्ति सामान्य हो जाएगी। इसके असर से खुले बाजार में दूध डेयरियों पर बिकने वाले देसी घी के दाम 700 से 760 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गए हैं।

ग्राहकों को वापस पड़ रहा

कारोबारी जितेन्द्र आहूजा ने बताया कि बड़ी कंपनियों के बटर, देसी घी और क्रीम जैसे उत्पाद नहीं मिलने से ग्राहकों को वापस लौटना पड़ रहा है। इन उत्पादों की मांग काफी अधिक रहती है।

नए साल में सामान्य होने की उम्मीद

अमूल के शाखा प्रबंधक कुमार संजय ने बताया कि त्योहार और शादी विवाह समारोह निकली मांग के कारण ऐसे हालात बन रहे हैं। नए साल में हालात सामान्य होने की उम्मीद है।

200 टन से अधिक की होती है खपत

शहर में अमूल का बटर 50 टन, देसी घी 75 टन और क्रीम की 25 टन तक हर महीने खपत होती है। बाकी दूसरी कंपनियों को मिलाकर शहर में करीब 200 टन से अधिक बटर, देसी घी और क्रीम की बिक्री होती है। लेकिन इन दिनों माल की शॉर्टेज होने के कारण सभी उत्पादों की बिक्री कम हो गई है। शहर में अमूल का 10 ग्राम, 20 ग्राम का बटर तो मिल ही नहीं रहा है। 100 ग्राम और 500 ग्राम के बटर की भी शॉर्टेज है। साथ ही अमूल कंपनी का आधा किलो, एक किलो, पांच किलो और 15 किलो का देसी घी भी उपलब्ध नहीं है।