27 जनवरी 2026,

मंगलवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

स्कूल बसें छोड़ रहीं है भीषण धुआं,बच्चों के फेफड़े और हार्ट पर पड़ रहा है ये असर

स्कूल बसें छोड़ रहीं है भीषण धुआं,बच्चों के फेफड़े और हार्ट पर पड़ रहा है ये असर

2 min read
Google source verification
bus in gwalior

स्कूल बसें छोड़ रहीं है भीषण धुआं,बच्चों के फेफड़े और हार्ट पर पड़ रहा है ये असर

ग्वालियर। शहर में निजी स्कूल संचालकों द्वारा दस साल से भी अधिक पुरानी अनफिट बसों से बच्चों को ले जाया जा रहा है, जिससे बच्चों का सफर खतरे में हैं, साथ ही इन बसों के ज्यादा धुआं छोडऩे से बच्चों की सेहत पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है। निजी स्कूलों की इन अनफिट बसों के कभी इंजन में खराबी आती है, तो कभी गियर बॉक्स में समस्या हो जाती है। दरअसल इन बसों को पहले दूसरे रूटों पर चलाया गया है, अब यह स्कूली बच्चों को ले जा रही हैं। कुछ बसें१५ साल पुरानी हैं, फिर भी स्कूल संचालकों द्वारा इन्हें दौड़ाया जा रहा है।

यह बसें कई बार खराब हुई हैं, जिसका खामियाजा मासूम बच्चों को भुगतना पड़ा है। बीते दिनों परिवहन विभाग की टीम ने अलग-अलग स्कूलों की बसों का निरीक्षण किया।

इस दौरान दस साल से अधिक पुरानी बसें ७० फीसदी पाई गईं। जांच दल के सदस्यों का कहना है कि जिन बसों का जीवन काल दस साल से अधिक हो गया है, उनमें आए दिन तकनीकी खराबी आ रही हैं। ऐसी बसें सबसे ज्यादा प्रदूषण छोड़ रही हैं।

मासूमों की सेहत हो रही खराब
ज्यादा धुआं छोडऩे की वजह से बस में सवार मामूस छात्रों की सेहत पर बुरा असर पड़ रहा है। इन छात्रों को फेंफड़े, हृदय व एलर्जी संबंधी समस्या आ रही है। प्रदूषण जांच दल ने जब 2002 के मॉडल की बसों की जांच की तो उनमें अधिकांश बसें धुएं में कार्बन के कण ज्यादा छोड़ते हुए पाई गईं।

पहले मार्च तक दिया गया समय
बीते साल परिवहन विभाग की टीम ने एेसी बसों को बड़ी संख्या में पकड़ा था, जिनकी उम्र १५ साल से अधिक हो गई थी। परिवहन विभाग की टीम की कार्रवाई पर स्कूल संचालकों द्वारा समय मांगा गया था। इस दौरान परिवहन विभाग की टीम ने सत्र पूरा किए जाने तक (मार्च 2018) तक बसें संचालित किए जाने का समय दिया गया था। जून महीने से नया सत्र शुरू हुआ। जुलाई में जब परिवहन विभाग की टीम ने चेकिंग की तो ऐसी बसें भी सामने आ रही हैं, जिनकी लाइफ लाइन खत्म हो गई और वह सड़क पर दौड़ रही हैं।

"शहर में पंद्रह साल से अधिक पुरानी स्कूल बसें संचालित होती पाई जाती हैं तो उन पर कार्रवाई की जाएगी। दस साल के बाद बसों में मेंटेनेंस की ज्यादा जरूरत होती है, इसलिए बसों की चेकिंग के दौरान ऐसी बसों पर फोकस किया जाता है। "
एसपीएस चौहान, क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी