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बंद होने के कगार पर भू-संरक्षण विभाग,1984 के बाद नहीं हुई भर्ती

2012 के बाद काम भी नही मिला , 20 फीसदी तक सिमटा स्टाफसरकार ने विभाग के काम भी पंचायतों को सौंपे

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beehad

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जमीन का कटाव रोकना, बीहड़ों का समतलीकरण करवाना, मेड़बंधान करना, कच्चे-पक्के नालों में चेक डैम बनवाना, वाटरसेड के काम पौधारोपण आदि के लिए 60 के दशक में खुला भू-संरक्षण विभाग अब बंद होने के कगार पर है। विभाग में 1984 के बाद यानि की 38 साल से विभाग में सर्वेयर की भर्ती ही नहीं हुई है। हालांकि एसएसटी वर्ग के कुछ पदों पर भर्ती जरूर हुई लेकिन यह नाकाफी साबित हुई। कर्मचारियों के लगातार सेवानिवृत होने के कारण अगले तीन वर्षों में विभाग पर ताला लटकने की नौबत नजर आ रही है। कर्मचारी सेवानिवृत हो रहें है लेकिन उनके बदले उन पदों पर भर्ती नहीं हो रही है। विभाग को पिछले 10 सालों से कोई काम भी नहीं मिला है। एक तालाब का काम पिछले साल विभाग को काम के नाम पर केवल बलराम योजना के तहत एक तालाब बनाने का काम मिला है। इस योजना के तहत किसान की भी भूमि पर तालाब बनाया जाता है। इस योजना में सामान्य वर्ग को 80 हजार तथा एसएसीएसटी वर्ग को 1 लाख रुपए मिलते हैं। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि वर्ष 2012 से विभाग के पास काम नहीं है। विभागीय काम पंचायतों को सौप् दिए गए है।
1 एसडीओ, 3 सर्वेयर
भू-संरक्षण विभाग ग्वालियर में वर्ष 2012 में विभाग के पास 12 सर्वेयर तथा 5 एसडीओ थे। जबकि वर्तमान में 1 एसडीओ और 3 सर्वेयर ही काम कर रहे हैं। इस माह दिसम्बर में मौजूदा एसडीओ तथा एक सर्वेयर भी सेवानिवृत हो जाएंगे। विभाग 20 से 25 फीसदी स्टाफ के साथ ही चल रहा है।
मुरैना , भिंड और शिवपुरी क्षेत्र में समतलीकरण की जरूरत
ग्वालियर चंबल संभाग के भिंड और मुरैना के अलावा शिवपुरी जिले में स्थित बीहड़ों के समतलीकरण की अभी भी जरूरत बनी हुई है लेकिन भू संरक्षण विभाग के खत्म होने के बन रहे आसार से बीहड़ों का समतलीकरण भी अधर में लटक जाएगा। अकेले भिंड जिले में करीब 1000 से अधिक हेक्टेयर बीहड़ को समतल किया जा सकता है वहीं मुरैना और शिवपुरी जिले में 2500 हेक्टेयर भूमि समतल हो सकती है लेकिन सरकार की ओर से भू संरक्षण विभाग को अस्तित्व में बनाए रखने के प्रति की जा रही अनदेखी के चलते यह कार्य अब अधर में ही अटके नजर आ रहे हैं। वर्तमान समय में भूमि संरक्षण को लेकिर गंभीरता बरतने की आवश्यकता है। दस्यु उन्मूलन के बाद बीहडों के समतलीकरण का काम तेज होना चाहिए।