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स्टूडेंट्स ने देवगढ़, विदिशा, उदयगिरि की गुफाएं, सांची और भीमबैठका घूमा

जीवाजी विश्वविद्यालय के प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग के स्टूडेंट्स ने देवगढ़, विदिशा, उदयगिरि की गुफाएं, सांची एवं भीमबैठका का शैक्षणिक भ्रमण किया।

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स्टूडेंट्स ने देवगढ़, विदिशा, उदयगिरि की गुफाएं, सांची और भीमबैठका घूमा

स्टूडेंट्स ने देवगढ़, विदिशा, उदयगिरि की गुफाएं, सांची और भीमबैठका घूमा

ग्वालियर. जीवाजी विश्वविद्यालय के प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग के स्टूडेंट्स ने देवगढ़, विदिशा, उदयगिरि की गुफाएं, सांची एवं भीमबैठका का शैक्षणिक भ्रमण किया। डॉ.शांतिदेव सिसोदिया के निर्देशन में भ्रमण पर गए इस दल में छात्रों को सांची के स्तूप स्थापत्य में मुख्य वास्तु अंग जैसे अण्ड भाग, भू-वेदिका, प्रदक्षिणा पथ, मेधि, सोपान एवं तोरण द्वार को व्यवहारिक रूप से समझाया। इसके साथ ही तत्कालीन समय में इसकी अवधारणा को भी रेखांकित किया। इस स्तूप का निर्माण अशोक मौर्य के समय अण्ड भाग को ही केवल ईटों द्वारा बनाया गया। छात्रों को भोजपुर में परमार राजा भोज द्वारा निर्मित कराया गया विशाल शिव मंदिर का भी अवलोकन कराया गया। इस मंदिर में एशिया का सबसे बड़ा शिवलिंग स्थापित है, जो अद्वितीय है।

छात्रों को बताया गया कि इस प्रकार के मंदिरों को बनाने में किस प्रकार की तनीकी का प्रयोग तत्कालीन समय में किया गया। भीमबैठका देखने पहुंचे स्टूडेंट्स ने लाखों वर्ष पुराने शेलाश्रय एवं शैलचित्र देखे। यहां शैल चित्र उत्तरपुरापाषाण काल से लेकर ऐतिहासिक काल तक निरंतर निर्मित किए गए, जिससे छात्रों को यह जानकारी मिली कि इस स्थान पर मानव की गतिविधियां निरंतर बनी रही हैं।