
स्वामी विवेकानंद के ये वचन जिंदगी की किसी भी चुनौती पर दिला सकते हैं जीत
ग्वालियर। भारत देश में कई ऐसे महापुरुष हुए हैं, जिनके जीवन और विचार से कोई भी व्यक्ति बहुत कुछ सीख सकत है। उनके विचार ऐसे हैं कि निराश व्यक्ति भी अगर उसे पढ़े तो उसे जीवनजीने का एक नया मकसद मिल सकता है। साथ ही जिंदगी की किसी भी चुनौती पर जीत सकता है। कलकत्ता में 12जनवरी 1863 को जन्मे स्वामी विवेकानंद की जयंती के उपलक्ष्य में हम आपके लिए लाए हैं, उनके ऐसे ही अनमोल विचार जो आपके जीवन की दिशा को बदल सकते हैं। तो आइए जानते हैं।
1. उठो,जागो और तब तक नहीं रुको जब तक लक्ष्य को प्राप्त ना हो जाए ।
2. पढऩे के लिए जरूरी है एकाग्रता, एकाग्रता के लिए जरूरी है ध्यान, ध्यान से ही हम इन्द्रियों पर संयम रखकर एकाग्रता प्राप्त कर सकते है।
3. ज्ञान स्वयं में वर्तमान है,मनुष्यकेवल उसका आविष्कार करता है।
4. जब तक जीना,तबतक सीखना,अनुभवही जगत में सर्वश्रेष्ठ शिक्षकहै।
5. पवित्रता,धैर्यऔर उद्यम-येतीनों गुण मैं एक साथ चाहताहूं।
6. लोगतुम्हारी स्तुति करें यानिन्दा,लक्ष्यतुम्हारे ऊपर कृपालु हो या नहो, तुम्हारादेहांत आज हो या युग में,तुमन्यायपथ से कभी भ्रष्ट न हो।
7. जिससमय जिस काम के लिए प्रतिज्ञाकरो, ठीकउसी समय पर उसे करना ही चाहिये,नहींतो लोगो का विश्वास उठ जाताहै।
8. जब तक आप खुद पे विश्वास नहींकरते तब तक आप भागवान पे विश्वासनहीं कर सकते।
9. एक समय में एक काम करो,औरऐसा करते समय अपनी पूरी आत्माउसमे डाल दो और बाकी सब कुछभूल जाओ।
10. जितनाबड़ा संघर्ष होगा जीत उतनीही शानदार होगी।
11. उठो मेरे शेरो, इस भ्रम को मिटा दो कि तुम निर्बलहो, तुमएक अमर आत्मा हो,स्वच्छंदजीव हो,धन्यहो, सनातनहो, तुमतत्व नहीं हो,नाही शरीर हो,तत्वतुम्हारा सेवक है तुम तत्वके सेवक नहीं हो।
12. ब्रह्मांड की सारी शक्तियां पहले सेहमारी हैं। वो हम हैं जो अपनीआंखों पर हाथ रख लेते हैं औरफिर रोते हैं कि कितना अंधकारहै!
13.जिस तरह से विभिन्न स्त्रोतों सेउत्पन्न धाराएं अपना जल समुद्रमें मिला देती हैं,उसीप्रकार मनुष्य द्वारा चुनाहर मार्ग,चाहेअच्छा हो या बुरा भगवान तकजाता है।
14. किसी की निंदा ना करें। अगर आप मदद के लिए हाथ बढ़ा सकते हैं,तो जरूर बढ़ाएं। अगर नहीं बढ़ा सकते, तो अपने हाथ जोडि़ए,अपने भाइयों को आशीर्वाद दीजिए और उन्हें उनके मार्ग पर जानेदीजिए।
15. कभी मत सोचिए कि आत्मा के लिए कुछअसंभव है। ऐसा सोचना सबसे बड़ा विधर्म है। अगर कोई पाप है,तो वो यही है; येकहना कि तुम निर्बल हो या अन्यनिर्बल हैं।
16. अगर धन दूसरों की भलाई करने मेंमदद करे,तो इसका कुछ मूल्य है,अन्यथा,ये सिर्फ बुराई का एक ढेर है, और इससे जितना जल्दी छुटकारा मिल जाये उतना बेहतर है।
Published on:
12 Jan 2020 03:45 pm
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