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सरोद, वायलिन और बासुरी ने घोली संगीत शाम में मिठास, श्रोता बोल ये शाम कभी न ढले

बेल्जियम के वायलिन वादक ग्रुप की संवेदनशील प्रस्तुति एवं  बासुरी और वायलिन की मन मोहने वाली अद्भुत जुगल बंदी सुनने को मिली। विशाल के धु्रपद गायन की प्रतिभा ने  भी मन मोहा।

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Gaurav Sen

Dec 18, 2016

tansen samaroh gwalior 2016

tansen samaroh gwalior 2016

ग्वालियर। राष्ट्रीय तानसेन समारोह के दूसरे दिन शनिवार को आयोजित संगीत संध्या में संगीत रसिकों को सुर और साज का शानदार संगम देखने को मिला। बेल्जियम के वायलिन वादक ग्रुप की संवेदनशील प्रस्तुति एवं बासुरी और वायलिन की मन मोहने वाली अद्भुत जुगल बंदी सुनने को मिली। विशाल के धु्रपद गायन की प्रतिभा ने भी मन मोहा।

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अंत में विख्यात और ग्वालियर की माटी के यशस्वी संगीत रत्न अमजद अली खान ने सरोद पर स्व विकसित नई नवेली धुन गणेश कल्याण बजाकर शास्त्रीय संगीत की महफिल को चरम पर पहुंचा दिया। इसके बाद उन्होंने मिंया मल्हार और दूसरी कई धुनों के साथ सरोद पर अपनी बादशाहत बड़ी नजाकत के साथ साबित कर देश और विदेश के संगीत रसिकों का दिल जीत लिया।

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संगीत संध्या की शुरूआत सांयकालीन सभा की शुरूआत भारतीय संगीत महाविद्यालय के विद्यार्थियों की ओर से प्रस्तुत ध्रुपद गायन से हुई। संगीत सभा की अगली प्रस्तुति विश्व संगीत के बेहद युवा बेल्जियम के ग्रुप ने वायलिन वादन करके यूरोपीय क्लासिकल संगीत की विशिष्टता से अवगत कराया। प्रस्तुति में इन कलाकारों ने फीलिंग और एक्सपीरियंस को मार्मिक ढंग से व्यक्त किया।

अमजद अली खां, सरोद की प्रस्तुति देते हुए
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मंच पर लाइट इफेक्ट ने इनके वादन और भावों को और प्रभावी बना दिया। वायलिन वादन का नेतृत्व मारग्रेट हर्मेंट ने किया। वादन की शुरुआत से पहले कलाकारों ने हिन्दी में श्रोताओं से नमस्ते और अंत में शुक्रिया कहा। इनके वायलिन वादन की गति किसी फाल्गुनी हवा की मानिंद रही। कभी धीरे तो कभी तेज। मानो दिल को छू लेने वाले भाव रूपी समंदरी लहरें किनारों या मंजिल को छूना चाहती हों।

सभा में निरंतर प्रस्तुति के क्रम में पंडित भास्कर बुवा घराने के प्रतिष्ठित वायलिन वादक अतुल उपाध्याय और प्रख्यात बांसुरी वादक पंडित हरिप्रसाद चौरसिया के वरिष्ठ शिष्य एवं प्रतिभावान बांसुरी वादक संतोष संत की जुगलबंदी काफी सराही गई। शुरूआत राग जोग से की। इनके साथ पखावज पर देश के सुप्रतिष्ठित पखावज वादक अखिलेश गुंदेचा और तबले पर हितेन्द्र दीक्षित ने संगत की।



राग बागेश्री की प्रस्तुति
सभा में तीसरी प्रस्तुति उस्ताद जिया फरीदुद्दीन डागर के शिष्य युवा ध्रुपद गायक विशाल जैन की हुई। इलाहबाद से आए जैन ने गायन की शुरूआत राग बागेश्री में ध्रुपद से की। उन्होंने सुंदर अलापचारी से गायन शुरू कर जोड़ झाला में कमाल दिखाया। उनके साथ अंकित और तानपुरे पर रूपाली जैन ने संगत की।

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सात समुंदर पार से आए सुरों के मुरीद
संगीत सुनने के लिए न केवल स्थानीय बल्कि दक्षिण अफ्रीका और यूरोप के कई देशों के रसिक भी मौजूद रहे। अगले दो दिन काफी यूरोपीय श्रोताओं के आने की उम्मीद जताई जा रही है।

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आज की सभाएं

प्रात: 10 बजे से
- ध्रुपद केन्द्र ग्वालियर के छात्रों द्वारा ध्रुपद गायन
- एनी हॉयत की विश्व संगीत की प्रस्तुति
- मधुप का गायन
- सुवीर मिश्र का रुद्रवीणा वादन
- सुहास व्यास पुणे का गायन

शाम की सभा 7 बजे से
- तानसेन संगीत महाविद्यालय के छात्रों का ध्रुपद गायन
- जौहर इजाक फ्रेस्को की विश्व संगीत प्रस्तुति
- कमलेश तिवारी भोपाल का ध्रुपद गायन
- शोभा चौधरी का गायन
- किरण देशपांडे एवं सुप्रीत देशपांडे की तबला जुगलबंदी।


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