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हंगामे की भेंट चढ़ गया चैंबर का बजट

प्रवेश शुल्क और सदस्यता शुल्क को लेकर हुई आपस में तू-तू-में-मैं।

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rishi jaiswal

Mar 30, 2016

uproar in the chamber

uproar in the chamber


ग्वालियर। चैंबर ऑफ कॉमर्स में गुटबाजी चरम पर है। विरोध और विवाद का मौका कोई भी हाथ से नहीं निकलने दे रहे हैं। मंगलवार को माधवराव सिंधिया सभागार में हुई वार्षिक साधारण सभा बैठक में जमकर हंगामा हुआ।पदाधिकारी व कार्यकारिणी सदस्य आपस में भिड़ते नजर आए। यही वजह रहा कि बजट हंगामे की भेंट चढ़ गया।


चैंबर का एक गुट प्रवेश शुल्क 11 से 21 हजार करने व सदस्यता शुल्क 5 से 750 रुपए करने के प्रस्ताव की मुखालफत कर रहा है। वहीं अध्यक्ष अरविंद अग्रवाल और मानसेवी सचिव डॉ. प्रवीण अग्रवाल इस निर्णय को बहाल करना चाहते हैं। बैठक में ही बजट के इस बिंदु पर ढेरों आपत्तियां आईं। इसके बाद आपसी आरोपों की बौछार से सभागार गर्म हो गया। चैंबर अध्यक्ष बार-बार कुर्सी छोड़कर अंदर-बाहर टहलते रहे तो कुछ पदाधिकारी बैठक में व्यस्त रहे। हालांकि बाद में स्थगन का आदेश मान लिया गया।

यह भी विवाद की जड़
प्रवेश शुल्क और सदस्यता शुल्क बढ़ोतरी के अलावा पदाधिकारी 75 हजार रुपए महीने की सैलरी पर चैंबर में प्रशासनिक सचिव नियुक्त करना चाहते हैं।


कुछ इस तरह का था हंगामेदार दृश्य
शाम 4.30 बजे बैठक शुरू हुई। बजट पढ़ा गया। इसके बाद सदस्य नरेंद्र सिंघल ने आपत्ति लगाई। शुल्क बढ़ाने का विरोध करते हुए उन्होंने कहा, यह प्रतीकात्मक है। इसके बाद गजेंद्र अष्ठाना, कैलाश अग्रवाल समेत कई लोग विरोध करने लगे। अध्यक्ष ने कहा कि कोई तीन सदस्य बोलेंगे। इस पर भी बवाल मचा। मेंबर ने निंदा प्रस्ताव की मांग भी की, तभी किसी ने कहा, 'किसी के बाप का ठेका नहीं है पैसा हमारी जेब से जा रहा है।' चैंबर सचिव ने संभलकर बोलने को कहा तो दोनों उलझ गए। हंगामा बढ़ता देख अध्यक्ष बाहर चले गए। चैंबर के संयुक्त अध्यक्ष यश गोयल व गोकुल बंसल ने बैठक जारी रखी। कुछ देर बाद अध्यक्ष आए और बोले, मैने बैठक स्थगित कर दी फिर क्यों चल रही है? उनके साथ मानसेवी सचिव भी चले गए।

18 साल नहीं बढ़ा शुल्क
मानसेवी सचिव डॉ. प्रवीण अग्रवाल ने कहा कि 18 साल से चैंबर का शुल्क नहीं बढ़ा है। लोहिया और दालबाजार में भी 1000-1200 रुपए शुल्क लिया जाता है। सदस्यता शुल्क से चैंबर को 15 लाख रुपए की आय होती है और 25 लाख की सैलरी देनी पड़ती है। शुल्क बढ़ोतरी की राशि हम अपनी जेब में नहीं रख रहे हैं। इसका उपयोग निर्माण काम में किया जाएगा।


"विरोध की रणनीति पहले ही बन चुकी थी। पटकथा भी लिखी थी। सब कुछ तय था। बैठक में केवल संवाद बोले गए। कुछ लोग चैंबर की तरक्की नहीं चाहते हैं। शुल्क के बिंदु तक पहुंचे बिना ही हंगमा शुरू कर दिया। हालत यह थे कि बैठकर बात करना मुश्किल हो गया। इस ड्रामे के सूत्रधार विजय गोयल हैं। उन्होंने साजिश के तहत बैठक को नहीं चलने दिया।"
अरविंद अग्रवाल, अध्यक्ष, चैंबर

"चैंबर सदस्य भीख नहीं अपना हक मांग रहे हैं। अध्यक्ष को यह अधिकार नहीं कि सदस्यों की तौहीन कर 3 हजार सदस्यों के करीब 7.5 लाख रुपए जमा करने की बात कहें। इसी बात को सुनकर मैं भड़क गया। मुझसे बाहर जाने के लिए कहा गया। बैठक के बाद भी पीठ पर हाथ रखकर चुनाव में देख लेने की धमकी दी गई। बैठक में उनका व्यवहार सत्तावादी था।"
विजय गोयल, कार्यकारिणी सदस्य