शाम 4.30 बजे बैठक शुरू हुई। बजट पढ़ा गया। इसके बाद सदस्य नरेंद्र सिंघल ने आपत्ति लगाई। शुल्क बढ़ाने का विरोध करते हुए उन्होंने कहा, यह प्रतीकात्मक है। इसके बाद गजेंद्र अष्ठाना, कैलाश अग्रवाल समेत कई लोग विरोध करने लगे। अध्यक्ष ने कहा कि कोई तीन सदस्य बोलेंगे। इस पर भी बवाल मचा। मेंबर ने निंदा प्रस्ताव की मांग भी की, तभी किसी ने कहा, 'किसी के बाप का ठेका नहीं है पैसा हमारी जेब से जा रहा है।' चैंबर सचिव ने संभलकर बोलने को कहा तो दोनों उलझ गए। हंगामा बढ़ता देख अध्यक्ष बाहर चले गए। चैंबर के संयुक्त अध्यक्ष यश गोयल व गोकुल बंसल ने बैठक जारी रखी। कुछ देर बाद अध्यक्ष आए और बोले, मैने बैठक स्थगित कर दी फिर क्यों चल रही है? उनके साथ मानसेवी सचिव भी चले गए।