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सितंबर में तेज बारिश की संभावना नहीं

मौसम विभाग का अनुमान, गर्मी का असर भी बढ़ेगा फसलों पर हो सकता है वायरस का नुकसान, औसत इंच बारिश से कोसों दूर

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सितंबर में तेज बारिश की संभावना नहीं

सितंबर में तेज बारिश की संभावना नहीं

धार. लगातार उत्तर पश्चिम दिशा से हवाएं चलने के कारण बने लो प्रेशर जोन ने मानसून को प्रभावित कर दिया है। इससे बारिश थम गई है। दो साल यानी वर्ष 2021 के बाद ऐसी स्थिति बनी है जब इस बार अगस्त महीने के 27 दिनों में महज 91.2 एमएम (मिलीमीटर) बारिश हुई है। वही आगामी चार दिन कुछ एक स्थानों पर छुटपुट बूंदाबांदी को छोड़ दिया जाए तो तेज बारिश के कोई आसार नहीं है। यह एक बड़ी ङ्क्षचंता की बात है।

बारिश की यही स्थिति रही तो इस साल औसत बारिश का कोटा होना भी मुश्किल होगा, जिसका खामियाजा आगे जाकर लोगों को काफी जलसंकट के रूप में भुगतना पड़ेगा। जून महीने से बारिश की शुरूआत होने के बाद जुलाई और अगस्त महीने को सबसे अधिक बारिश होने का माना जाता है। इस बार अगस्त महीना नाममात्र का बरसकर तीन दिन बाद समाप्त होने को है। १ जून से लेकर २८ अगस्त ६५५६ मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है। जबकि पिछले साल 1 जून से लेकर २८ अगस्त तक ७९३५ मिलीमीटर बारिश शहर समेत जिले में हो गई थी।

इस साल जुलाई महीने में तो अच्छी तेज बारिश हुई हैए लेकिन अगस्त में थम गई है। उमस बढ़ गई मौसम वैज्ञानिकों ने बताया कि लो प्रेशर जोन की स्थिति बनने से मानसून प्रभावित हुआ है। इसी वजह से बारिश नहीं हो रही है। कुछ दिन बूंदाबांदी होगी, लेकिन तेज बारिश का कोई पूर्वानुमान नहीं है। पश्चिम तरफ से 9 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से हवाएं चली। तापमान में इजाफा होने से गर्मी, उमस बढ़ गई। इससे लोगों को काफी परेशानी हो रही है। बिना कूलर, पंखे के घर, दुकान में बैठ नहीं पा रहे हैं।

बारिश हो तो फायदा &काफी लंबे समय से बारिश की लंबी खेंच हो चली है। अब फसलों को तेज बारिश की आवश्यकता है। यदि तेज बारिश होती है तो कीट व वायरस का खतरा फसलों पर नहीं रहेगा। बारिश की एक सप्ताह तक नहीं होती है तो फसलों के नुकसान होने की संभावना रहेगी।

-डॉ. जीएस गठिये, वरिष्ठ वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केंद्र, धार

तेज बारिश की संभावना नहीं &अभी सितंबर तक प्रदेश में कही भी तेज बारिश की संभावना नहीं है। बादल छाए रहेंगे और तापमान में बढ़ोत्तरी देखने को मिलेगी।

डॉ. एचएस पांडे, मौसम वैज्ञानिक, भोपाल

फसलों बारिश की लंबी खेंच के चलते किसान चिङ्क्षतत है। सोयाबीन की फसलों में अब फूल आने लगे हैं। ऐसे में बारिश नहीं होने के कारण फसलों पर कीट व वायरस का खतरा भी मंडरा रहा है। अभी फसलों को भी तेज बारिश की उम्मीद है। यदि तेज बारिश होती है तो फसलों को काफी लाभ होगा। जिले के किसान भी फसलों को बचाने के लिए कीटनाशक दवाईयों के साथ ही अपने-अपने स्तर पर कुछ न कुछ जतन करते हुए नजर आ रहे हैं। पर कीटों का प्रकोप पानी में दवा का छिड़काव करें कृषि विभाग व कृषि विज्ञान केंद्र ने फसलों को कीटों के प्रकोप से बचाने के लिए दवाइयों के छिड़काव की सलाह दी है। कीटों के नियंत्रण के लिए थायोमिथाक्साम और लेंबड़ा सायहेलोथ्रीन १५० मिलीमीटर प्रति हेक्टयर से छिड़काव करें अथवा क्लोरएन्ट्रीप्रिनॉल और लेंबड़ा सायहेलोथ्रीन २०० मिलीमीटर प्रति हेक्टेयर ५०० लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें ताकि कीटों पर नियंत्रण किया जा सके।

1 जून से २८ अगस्त तक बारिश के आंकड़े

नगर अब तक बारिश (मिमी)

धार ३७०.२ नालछा ४८३.६ तिरला ५०३.० पीथमपुर ५२४.९ बदनावर ५८७.८ सरदारपुरग ६१०.० कुक्षी ४४४.० बाग ५६३.० निसरपुर ३४९.५ डही ३६५.० मनावर ४८५.० उमरबन ४३५.० गंधवानी ५०७.० धरमपुरी ३२८.०