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इस खास पदार्थ से साफ होता है पानी, टेस्टिंग न होने से नहीं बदल पा रहे मोतीझील प्लांट के फिल्टर मीडिया

सिलिका के चलते प्लांट पर लगे करीब 22 फिल्टर मीडिया सही से काम नहीं कर पा रहे हैं। जानकारों की मानें तो पिछले दिनों शहर में सप्लाई हुआ गंदा पानी फिल्टर मीडिया को नहीं बदले जाने से हुआ था

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इस खास पदार्थ से साफ होता है पानी, टेस्टिंग न होने से नहीं बदल पा रहे मोतीझील प्लांट के फिल्टर मीडिया

ग्वालियर। शहर को साफ पानी की सप्लाई करने वाले मोतीझील जल शोधन प्लांट पर लगे फिल्टर मीडिया पानी साफ करने के लिए काम आने वाले रेत में पाए जाने वाले सिलिका खनिज पदार्थ की टेस्टिंग नहीं हो पाने के कारण नहीं बदल पा रहे हैं।

सिलिका के चलते प्लांट पर लगे करीब 22 फिल्टर मीडिया सही से काम नहीं कर पा रहे हैं। जानकारों की मानें तो पिछले दिनों शहर में सप्लाई हुआ गंदा पानी फिल्टर मीडिया को नहीं बदले जाने से हुआ था।

सिलिका खनिज की लैब से जांच रिपोर्ट मंगाने के निर्देश निगम अफसरों ने अमृत योजना के ठेकेदार को दिए थे, लेकिन कई माह बीतने के बाद भी ठेकेदार द्वारा जांच कराकर निगम के पीएचई विभाग को रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की गई है।

सिलिका पदार्थ एक विशेष प्रकार की रेत में पाया जाता है, जांच रिपोर्ट नहीं आने से फिल्टर प्लांट में रेत और अन्य पत्थर के कणों को नहीं डाला जा सका है, जो पानी में मौजूद गंदगी को रोक सकें।

क्या है सिलिका
एक्सपर्ट के अनुसार सिलिका खनिज पदार्थ कठोर होता है, जो सीसे को भी खुरच सकता है। यह नर्मदा नदी और हिमालय की तरफ से आने वाली नदियों की रेत में अधिक मात्रा में होता है। उक्त स्थानों से आई रेत को प्लांट के फिल्टर मीडिया के रूप में उपयोग किया जाता है।

इसलिए होता है उपयोग
पानी को साफ करने के लिए प्लांट पर कई प्रकार के कैमिकल का उपयोग किया जाता है, जो एसिड की तरह काम करते हैं। सामान्य रेत कैमिकल के सामने टिक नहीं पाती और घुल कर तेजी से खत्म होने लगती है, इसके चलते फिल्टर मीडिया में सामान्य रेत का उपयोग नहीं किया जाता, इसके लिए होशंगाबाद और चंड़ीगढ़ से सिलिका की करीब 70 से 80 प्रतिशत मात्रा वाली रेत को ही मंगाया जाता है। इसी प्रकार अन्य पत्थरों के कण जो नदियों से बहरकर आते हैं, उनका भी फिल्टर मीडिया में उपयोग किया जाता है।

लागत 15 से 20 लाख
उक्त फिल्टर मीडया को बदलने में 15 से 20 लाख रुपए का खर्च बताया गया है।

जारी किया है नोटिस
अमृत योजना का काम देख रही कंपनी को नोटिस जारी किया गया है कि वह लैब से टेस्ट कराकर रिपोर्ट लाए, तब तक पुराने फिल्टर मीडिया को नहीं बदला जा सकता। कार्य में लापरवाही बरतने पर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई करेंगे।
आरएलएस मौर्य, अधीक्षण यंत्री पीएचई।



करा रहे हैं जांच
शहर में स्थित लैबों में इसकी जांच नहीं हो पा रही है, इसलिए जांच कराने के लिए रेत को बाहर भेजा है। रिपोर्ट आने के बाद काम शुरू हो जाएगा। यह रेत होशंगाबाद से हमने मंगाई है, सभी 22 फिल्टर मीडिया को बदलने में करीब तीन माह का समय लग जाएगा।
दिलीप शर्मा, प्रोजेक्ट मैनेजर पुंगलिया कंपनी अमृत योजना