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हजारों साल पुरानी गणेश जी की मूर्तियां ग्वालियर को दिला रहीं है नई पहचान

शहर के किलों समेत अनेक मंदिरों में प्राचीन गणेश जी की मूर्तियां स्थापित हैं

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ग्वालियर। चम्बल क्षेत्र में हजारों साल पुरानी भगवान गणेश जी की मूर्तियां इस क्षेत्र को एक विशेष स्थान दिलाती हैं। विदेशी पर्यटक भी ग्वालियर के किले समेत अन्य धरोहरों को देखने आते हैं। उन्हें भी भगवान की ये प्राचीन मूर्तियां खूब पसंद आती और वे इससे प्राचीन इतिहास का भी अंदाजा लगाते हैं। श्रीजी की मूर्तियां मंदिरों की शोभा बढाती हैं इन्हें लगभग 1000 साल पुराना बताया जाता है। इन गणेश मूर्तियों की कारीगरी व नक्काशी भी अद्भुत है। विदेशी पर्यटक भी इन्हें देखकर मंत्रमुग्ध हो जाते हैं। और भगवान गणेश की कहानियां सुनना खूब पसंद करते हैं। इतिहासकार भी इन प्राचीन मूर्तियों के संरक्षण के लिए समय समय पर ध्यान रखते हैं, ताकि इन भव्य मूर्तियों की विशालता को कायम रखा जा सके।

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संग्रहालयों में रखा गया है गणपति को
गणपति जी की अनेक प्राचीन विशालकाय मूर्तियों को सिंधिया राजवंश के संग्रहालय में रखा गया है, जिसकी देखरेख अब नगर निगम द्वारा की जाती है। इसके आलावा शहर के अनेक म्यूजियम में गणपति जी को सुरक्षित रखा गया है। चम्बल क्षेत्र में भगवान गणेश को जीर्णशीर्ण अवस्था में पाया गया था बाद में इनकी मरम्मत कराकर इन्हें सुरक्षित संग्रहालय में रख दिया गया। इतिहासकारों के मुताबिक कुछ मूर्तियों को विदेशी आक्रांताओं ने भी क्षति पहुँचाने का प्रयास किया, लेकिन गणेश जी के मूल स्वरूप का वे कुछ नहीं कर सके। श्रीजी की अनेक मूर्तियों को गूजरी महल में खंडित अवस्था में लाया गया। लेकिन अब यहां गणपति को पूरी सुरक्षा में रखा जाता है। भगवन गणेश के देशी विदेशी अनुयायी भी इन गणेश मूर्तियों को देखकर खूब उत्साहित होते हैं और अपने प्राचीन गौरव पर भी गर्व करते हैं। संग्रहालय में स्थित गणपति जी की मूर्तियों को छूना मनाही है, जिससे मूर्तियां ख़राब न हों।

किले में भी विराजे हैं गणपति
ग्वालियर के किले को देखने दुनियाभर से आगंतुकों का तांता लगा रहता है। लेकिन किले में मौजूद प्राचीन रॉक्स पर कई हिन्दू बौद्ध और जैन मूर्तियों को उकेरा गया है। इन विशालकाय मूर्तियों को बहुत नक्काशी के साथ उकेरा गया है। ग्वालियर किले में अनेक गुफाएं भी हैं जो ग्वालियर को झाँसी से भी जोड़ती हैं ऐसी यहाँ के स्थानीय लोगों की धारणा है। इन गुफाओं में भी अनेक प्राचीन मूर्तियां मिल जाती हैं, जो भगवान गणेश और शिव पार्वती को साथ में दिखाती है।