
200 लोग 12 घंटे तक करते रहे केदार की तलाश,फिर सामने आई ये तस्वीर
ग्वालियर। स्टाप डैम पार करते समय तिघरा से छूटे पानी के बहाव में फंसे किसान केदार गुर्जर का पता नहीं चला है। मंगलवार को गांव के करीब 200 से ज्यादा लोग केदार की तलाश में सांक नदी में उतर गए। उनकी मदद के लिए एसडीआरएफ की टीम भी पहुंच गई। जिस जगह पर रामनिवास गुर्जर ने चाचा केदार को बहना बताया था वहां से करीब 6 किलोमीटर तक नदी का हर कोना खंगाला लेकिन नतीजा नहीं निकला। एसडीआरएफ टीम का कहना है डैम से कुलैथ तक नदी में बेशुमार झाडिय़ां हैं, इसलिए सर्चिंग में काफी समय लगा।
गांववालों को शक था कि केदार पानी के फंस कर मेहदवां के झरने से बह सकता है तो वहां और सोनेपुरा गांव में बहने वाली बरसाती नदी में भी उसे तलाशा। अब बुधवार सुबह से फिर केदार की तलाश में नदी को खंगाला जाएगा। उधर रामनिवास गुर्जर बता रहा है कि चाचा केदार गुर्जर उसकी आंखों के सामने पानी में समाए थे। वह सोमवार शाम को उनके साथ खेत से वापस लौट रहा था। उसी वक्त तिघरा के गेट खुल गए।
तेजी से पानी आया तो वह स्टाप डैम की दीवार पर चढक़र निकल गया। लेकिन चाचा फंस गए। उसके सामने स्टाप डैम की दीवार से फिसले उन्हें बचाने के लिए उसने साफी भी फेंकी, लेकिन पानी के तेज बहाव से भंवर बन गई थी केदार उसमें फंस गए। उन्होंने साफी पकडऩे की कोशिश की ,लेकिन भंवर में तेजी से घूमने की वजह से साफी को थाम नहीं सके।
झटके के साथ डूब गए, उनके पांव पानी के ऊपर दिखे फिर पता नहीं चला। रिश्तेदार रुस्तम गुर्जर का कहना है कि मंगलवार सुबह से पूरा गांव केदार की तलाश में जुट गया। स्टाप डैम से कुलैथ तक नदी का हर कोना तलाशा, जहां आशंका थी वहां गांव वालों ने डुबकी लगाई। लेकिन केदार का पता नहीं चला है।
डीप डाइविंग भी गई बेकार
एसडीआरएफ के एसआइ राघवेन्द्र शर्मा ने बताया सांक नदी में डूबे किसान की तलाश में दोपहर से डीप डाइविंग की गई, गांववालों ने जिधर इशारा किया वहां टीम ने केदार को तलाशा। नदी में झाडिय़ां ज्यादा होने की वजह से सर्चिंग में काफी वक्त लगा है। आशंका थी कि केदार पानी के तेज बहाव के साथ किसी झाड़ी से अटक गए होंगे इसलिए हर जगह पर डाइविंग की गई। बाद में बुधवार की दोपहर को केदार की बॉडी पास ही एक झडिय़ों में फंसी हुई मिली।
Published on:
05 Sept 2018 03:33 pm
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