यह विचार मुनिश्री सुबल सागर महाराज ने शुक्रवार को नई सड़क स्थित चम्पाबाग जैन धर्मशाला में धर्मसभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। मुनिश्री ने कहा कि संसार में एक भी प्राणी ऐसा नहीं है, जिसके जीवन की सारी व्यवस्थाएं उसके मनोनुकूल हों। अच्छा-बुरा, संयोग-वियोग, हानि-लाभ, जीवन-मरण ये जीवन का अनिवार्यता है। जीवन चक्र का बहुत बड़ा अंग है। अपनी मनोस्थिति को बदलोगे, तो परिस्थिति बदल जाएगी। धैर्य न खोएं। रात का अंधकार बीतने के बाद उजाला अवश्य होता है, रात कितनी भी लंबी हो सुबह अवश्य ही होगी। आशावादी बनें, जब यह पता हो कि कष्ट, दुख-दर्द थोड़े समय के हैं, तो इतना दुख नहीं होगा।