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कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती

मुनिश्री ने कहा कि कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती, असफलता एक चुनौती है, उसे स्वीकार करो, अपनी ताकत लगाकर उसका स्वागत करो।

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rishi jaiswal

Aug 20, 2016

religious meeting

Munishri subal sagar maharaj

ग्वालियर. मन पर हताशा के गहरे बादल छाना, जीवन में भी अकेलापन महसूस करना, ऐसी परिस्थितियों से हर मनुष्य को गुजरना पड़ता है। यह प्रकृति का नियम है। क्योंकि हमारा जीवन सपाट मैदान की तरह नहीं, उन नादियों की तरह है जिसमें अनेक उतार-चढ़ाव को पार करते हुए अपनी मंजिल को तय करना होता है। हमेशा उजाला रहे, अंधेरा न हो तो हमें उजाला भी अखरने लगेगा। जीवन में हमेशा अनुकूलता हो, प्रतिकूलता नहीं आए तो हमारा जीवन कभी परिपक्व नहीं बन सकता।

यह विचार मुनिश्री सुबल सागर महाराज ने शुक्रवार को नई सड़क स्थित चम्पाबाग जैन धर्मशाला में धर्मसभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। मुनिश्री ने कहा कि संसार में एक भी प्राणी ऐसा नहीं है, जिसके जीवन की सारी व्यवस्थाएं उसके मनोनुकूल हों। अच्छा-बुरा, संयोग-वियोग, हानि-लाभ, जीवन-मरण ये जीवन का अनिवार्यता है। जीवन चक्र का बहुत बड़ा अंग है। अपनी मनोस्थिति को बदलोगे, तो परिस्थिति बदल जाएगी। धैर्य न खोएं। रात का अंधकार बीतने के बाद उजाला अवश्य होता है, रात कितनी भी लंबी हो सुबह अवश्य ही होगी। आशावादी बनें, जब यह पता हो कि कष्ट, दुख-दर्द थोड़े समय के हैं, तो इतना दुख नहीं होगा।

मुनिश्री ने कहा कि कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती, असफलता एक चुनौती है, उसे स्वीकार करो, अपनी ताकत लगाकर उसका स्वागत करो।