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इन ननद-भाभी ने मार दिए होते अपने बच्चे, गाड़ी में लॉक कर चली गई मेला घूमने, फिर हुआ ये

गाड़ी के कांच बंद होने से बच्चे पसीने में तर बतर हो गए और घबराहट होने पर चिल्लाने लगे। जिनमें तीन साल की एक बच्ची बेहोश हो गई थी

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gwalior vyapar mela

ग्वालियर। भिंड से आईं ननद-भाभी अपने चार मासूम बच्चों को गाड़ी में बंद कर मेला घूमने चली गईं। गाड़ी के कांच बंद होने से बच्चे पसीने में तर बतर हो गए और घबराहट होने पर चिल्लाने लगे। जिनमें तीन साल की एक बच्ची बेहोश हो गई थी, राहगीर की उन पर नजर पड़ी तो उसने मेले में पुलिस को जानकारी दी, जिस पर पुलिस ने किसी तरह गाड़ी का दरवाजा खोलकर बच्चों को बाहर निकाला। चारों बच्चों की उम्र 3 से 5 वर्ष के बीच है। पुलिस ने बच्चों से फोन नंबर लेकर उनकी मां को बुलाकर फटकार लगाई। राहगीर की सतर्कता और पुलिस के तत्काल एक्शन से बड़ा हादसा टल गया।

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पुलिस के मुताबिक मछंड (भिंड) निवासी कल्पना दोहरे पत्नी कुलदीप और डीडी नगर निवासी प्रियंका पत्नी जनवेद रिश्तेदार शैलेन्द्र, प्रियंका और अपने चार बच्चों को लेकर शनिवार दोपहर मेले पहुंचे। महिलाएं अपने चारों बच्चों को मेले के बाहर ही बोलेरो में बैठाकर गाड़ी के दरवाजे बंद कर मेला घूमने निकल गईं। कुछ देर बच्चे आराम से बैठे रहे, लेकिन आधा घंटे बाद उन्हें घबराहट होने लगी। दम घुटने से ३ साल की बच्ची जाहन्वी बेहोश हो गई। बच्चों ने गाड़ी का गेट खोलने की कोशिश की, लेकिन खुला नहीं। जब राहगीर ने देखा तो उसने पुलिस को सूचना दी तत्काल मौके पर पहुंची पुलिस ने गेट खोलकर उन्हें बाहर निकाला।

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बच्चों का घुट रहा था दम
मेला थाना प्रभारी रविन्द्र सिंह गुर्जर ने बताया गाड़ी का कांच बंद होने से बच्चों का दम घुट रहा था। ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों ने बच्चों को बाहर निकाला। उनकी मां को समझाइश देकर बच्चों को उनके सुपुर्द किया।

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पता नहीं था ऐसा हो जाएगा
बच्चे की मां प्रियंका दोहरे ने बताया बच्चे मेले में परेशान न करें, इसलिए उन्हें गाड़ी में बैठा गए थे। हमें लग रहा था कि हम जल्दी आ जाएंगे। ऐसा नहीं मालूम था कि ऐसा हो जाएगा। आगे से ध्यान रखेंगे ऐसा न हो।

बच्चे पसीने से तरबतर थे
पुलिसकर्मी मनोज भदौरिया ने बताया बच्चे पसीने से तरबतर थे। बच्चों को इशारे से गेट खोलने का तरीका बताया, पर वे नहीं खोल सके। 10 मिनट की मशक्कत के बाद गेट खुला और बच्चों को बाहर निकाला।

इन्होंने दिखाई सतर्कता
मेले में तैनात जिन पुलिसकर्मी ने बच्चों की जान बचाई उनमें ब्रजेन्द्र सिंह सैंगर, मनोज भदौरिया, जयराम सिंह और कालीचरण शर्मा शामिल हैं। उनकी सतर्कता के चलते मासूूमों के साथ अनहोनी होने से बच गई।

रखें ये सावधानी
बच्चों को अगर गाड़ी में बैठाकर जाएं तो गाड़ी के कांच खोलकर रखें।
जहां तक हो सके बच्चों को अकेला न छोड़ें, उन्हें साथ लेकर जाएं।
अगर बच्चों को छोड़कर जा रहे हैं तो किसी अपने को उनकी देखरेख के लिए छोड़ें।
छोडऩा ही पड़े तो बच्चों को मोबाइल देकर जाएं, जिससे वे आपात स्थिति में सूचित कर सकें।
नागरिक भी इस बात का ध्यान रखें कि अगर उनके आसपास इस तरह की स्थिति दिखती है तो वे तत्काल पुलिस को सूचना दें।