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यूजीसी के क्षेत्रीय कार्यालयों को बंद करना दुर्भाग्यपूर्ण: पूर्व कुलपति फोरम

पूर्व कुलपतियों के फोरम ने जताई आपत्ति

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ग्वालियर. मध्यप्रदेश के पूर्व कुलपतियों के फोरम ने विश्विद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के देश में चल रहे क्षेत्रीय कार्यालयों को अचानक बंद किये जाने को अव्यवहारिक और दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। इसमें मध्यप्रदेश का क्षेत्रीय कार्यालय भी शामिल है| फोरम ने यूजीसी के अध्यक्ष को पत्र भेज कर आपत्ति दर्ज कराई है। फोरम ने बयान जारी कर कहा है कि इस निर्णय से उच्च शिक्षा के गुणात्मक और अधोसंरचना विकास को गहरा झटका लगा है। यूजीसी के इस निर्णय से गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे देश के लाखों युवाओं का भविष्य पर असर पडेगा। फोरम का मानना है कि इस निर्णय से उच्च शिक्षा की उत्कृष्टता में कमी आएगी| क्षेत्रीय कार्यालयों को बंद करने के बजाय उन्हें और मजबूत किया जाना चाहिए।
देश में 27 साल पहले खोले गए 7 क्षेत्रीय कार्यालय
देश में यूजीसी के सात क्षेत्रीय कार्यालय 27 पहले खोले गए थे| उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश के क्षेत्रीय कार्यालय में तीन राज्य मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान आते थे। तीनों राज्यों के महाविद्यालयों में करोड़ो रुपयों से रिसर्च और अधोसंरचना का विकास हुआ। मध्यप्रदेश के महाविद्यालय विभिन्न गतिविधियों में पूरे देश में अव्वल हो गए थे।
आसानी से मिल रहा था अनुदान
इसी में महाविद्यालयों और विद्यार्थियों के हित निहित हैं| उन्हें शिक्षकों के अकादमिक उन्नयन और अधोसंरचना विकास के लिए आसानी से अनुदान मिल सकेगा| क्षेत्रीय कार्यालयों तक आसान पहुँच से शिक्षक और महाविद्यालय यूजीसी की योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ ले लेते थे| सेमीनार, सिम्पोजिया, संगोष्ठियों, शोध और विकास की परियोजनाओं के लिए अनुदान प्राप्त करने में महाविद्यालयों के प्राध्यापकों को सुगमता हो रही थी।
बंद करने के निर्णय पर पुनर्विचार करे यूजीसी
पूर्व कुलपति फोरम के महासचिव डॉ. कमलाकर सिंह ने फोरम ने यूजीसी से आग्रह किया है कि निर्णय पर पुनर्विचार कर सकारात्मक कदम उठाया जाए।| मध्यप्रदेश क्षेत्रीय कार्यालय के सन्दर्भ में बताया मध्यप्रदेश सरकार ने अरेरा कालोनी के पाश इलाके बिट्टन मार्केट में स्थित तवा काम्प्लेक्स में हाउसिंग बोर्ड से दो तल खरीद कर यूजीसी को उपलब्ध कराए थे।।| इतना ही नहीं साकेत नगर में अधिकारियों कर्मचारियों के लिए कुछ आवास गृह भी उपलब्ध कराए थे। महाविद्यालयों के विकास, अतिरिक्त कक्ष, लायब्रेरी, महिला छात्रावास, रिसर्च वर्क, संगोष्ठी, सम्मेलन, सेमीनार, शिक्षकों को फैलोशिप आदि योजनाओं का लाभ मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के सैकड़ों महाविद्यालयों ने लिया।