
Vidya vihar
Vidya vihar: विद्या विहार की 315 बीघा सरकारी जमीन को बचाने के लिए प्रशासन गंभीर नहीं है। न जमीन पर हो रहे निर्माण को रोका जा रहा है, न जमीन की डिक्री पर हाईकोर्ट की रोक के फैसले को पंजीयन विभाग भेजा गया है। आदेश नहीं पहुंचने से धड़ल्ले से रजिस्ट्री हो रही हैं। रजिस्ट्री से रजिस्ट्री कराई जा रही हैं। कलेक्ट्रेट के सामने स्थित पांच हजार करोड़ की इस 315 बीघा जमीन पर धीरे-धीरे बहुमंजिला इमारतें बनती जा रही हैं। पंजीयन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि 15 मार्च-2019 के बाद जितनी भी रजिस्ट्री हुई हैं, कानूनी रूप से ये शून्य हैं। क्योंकि डिक्री के आदेश पर रोक होने की वजह से जमीन सरकारी है।
गंगा प्रसाद शर्मा कैलादेवी मंदिर (करौली माता) महलगांव के वारिस संजय शर्मा व दिलीप शर्मा एवं अन्य ने व्यवहार न्यायाधीश के यहां दावा पेश किया। इस दावे में 35 पक्षकार बने। उनकी ओर से दावे में तर्क दिया गया कि राजस्व अभिलेख में उनकी जमीन पर पीडब्ल्यूडी का नाम अवैध रूप से दर्ज कर दिया गया है। वादग्रस्त भूमि 1933 में हीरालाल शर्मा को दी गई थी। इस जमीन पर हीरालाल के वंशज खेती करते थे। जब जमीन का बंटवारा किया गया तो तहसील न्यायालय में पता चला कि उनकी जमीन पर पीडब्ल्यूडी का नाम दर्ज कर दिया है। तत्कालीन व्यवहार न्यायाधीश संजय शर्मा ने गंगा प्रसाद शर्मा के वारिसों के नाम डिक्री कर दी। इसके बाद 315 बीघा जमीन पर कलेक्ट्रेट के सामने विद्या विहार के नाम से कॉलोनी विकसित कर दी। हाईकोर्ट ने 15 मार्च-2019 को डिक्री के आदेश पर रोक लगा दी थी। डिक्री पर रोक होने से जमीन अभी सरकारी है। न इस जमीन पर निर्माण किया जा सकता है और न ही विक्रय।
चुनाव में व्यस्तता थी। विद्या विहार की जमीन का मामला पुराना है। इस मामले को संज्ञान लिया जाएगा। राजस्व अधिकारियों को भेजकर इस जमीन से निर्माण रुकवाए जाएंगे।
रुचिका चौहान, कलेक्टर
Published on:
22 May 2024 06:09 pm
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