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बिल्डिंग में जनता के पैसों की बर्बादी, धर्मशाला से भी खराब टाइल्स लगाई

नया भवन जनता के रुपयों के बर्बाद करने का सबसे अच्छा उदाहरण है, पहले उन कामों को बताएं, जिनका पूरा होने पर नए भवन में न्यायालय शुरू हो सके

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बिल्डिंग में जनता के पैसों की बर्बादी, धर्मशाला से भी खराब टाइल्स लगाई

बिल्डिंग में जनता के पैसों की बर्बादी, धर्मशाला से भी खराब टाइल्स लगाई

ग्वालियर. हाईकोर्ट की युगल पीठ ने जिला न्यायालय के नवीन भवन की पीआइयू व पीडब्ल्यडी के अधिकारियों को हकीकत बताई। कोर्ट ने कहा कि 2008 में भवन की शुरुवात हुई और अधूरा निर्माण करके छोड़ दिया गया। हर कोई जानता है कि इस बिल्डिंग में जनता के पैसों की कैसे बर्बादी हुई है। भवन में जो टाइल्सें लगाई हैं, वे धर्मशाला में लगने वाली टाइल्स से भी खराब है। ये लग चुकी हैं, इस पर आगे क्या बोलें। कोर्ट ने आदेश दिया है कि नए भवन को 15 साल हो गए है। इसलिए इसमें न्यायालय को शिफ्ट किया जाना है। सबसे पहले वह कार्य बतांए, जिनके पूरे होने पर नए भवन में कोर्ट शुरू हो सके।


नए भवन को लेकर आनंद भारद्वाज ने हाईकोर्ट में 2009 जनहित याचिका दायर की। हाईकोर्ट की सख्ती के बाद न्यायालय के निर्माण में तेजी आई है, लेकिन कोर्ट की निगरानी में इसका कार्य किया जा रहा था, लेकिन पीआइयू के काम पर कोर्ट ने भी सवाल खड़े कर दिए। बुधवार को पीआइयू के मुख्य अभियंता वीके आरख, प्रोजेक्ट प्रभारी एसके घनघोरिया मौजूद रहे। उनकी ओर से बताया गया कि जिला न्यायाधीश ने भवन में अतिरिक्त कार्य बताए हैं, जिसमें मल्टी लेवल पार्किंग सहित अन्य कार्य हैं इसमें करीब 58 करोड़ रुपए का खर्च आ रहा है। इनके पूरा होने पर भवन शुरू हो सकेगा। फंड स्वीकृति का प्रस्ताव वित्त कमेटी के पास जाएगा। स्वीकृत के बाद कार्य शुरू हो सकेंगे। कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि पहले वह कार्य बताएं, जिनके पूरे होने पर नवीन भवन में न्यायालय शुरू सके। चार सितंबर तक का समय दिया है।