
divorce
ग्वालियर।राकेश कुमार (परिवर्तित नाम) ने 2022 में तलाक का आवेदन पेश किया। पत्नी को न्यायालय का नोटिस मिला तो पत्नी ने अधिवक्ता के जरिए तलाक का विरोध किया। पत्नी ने पति से पहले भरण पोषण लिया, फिर हिंदू मैरिज एक्ट की धारा 24 के तहत केस लड़ने के खर्च का आवेदन पेश कर दिया।
उसका तर्क था-उसकी कोई आय नहीं है, वह केस लड़ने का खर्च नहीं उठा सकती, इसलिए पति से केस लड़ने का खर्च दिलाया जाए। कोर्ट ने प्रकरण खर्च व अधिवक्ता की फीस दिलाई। यह इकलौता केस नहीं है, अधिकतर केसों में ऐसा हो रहा है। पति से ही केस लड़ने का खर्च लिया जा रहा है। काउंसलिंग में पति इसका विरोध कर रहे हैं, लेकिन यह काम नहीं आ रहा।
कुटुंब न्यायालय में काउंसलिंग कर रहे वरिष्ठ काउंसलर कमलेश शर्मा ने बताया, पहले पत्नियां भरण पोषण लेती थीं। अब केस लड़ने का खर्च भी ले रही हैं। इस कारण केस पर केस दायर कर रही हैं। अधिकतर केसों में जब पति-पत्नी की काउंसलिंग होती है, तो केस लड़ने के खर्च पर भी विवाद होते हैं।
ऐेसे मिलता है केस लड़ने का खर्च
- यदि न्यायालय से पत्नी के भरण पोषण का आदेश हो गया है, तो प्रकरण व अधिवक्ता पर खर्च होने वाला पैसा एक बार ही मिलता है। भरण पोषण हर महीने मिलता है।
-यदि न्यायालय से भरण पोषण शुरू नहीं हुआ है, तो केस लड़ने का खर्च हर माह मिलता है। यह राशि कोर्ट से तय होती है।
- न्यायालयीन प्रक्रिया में समय के साथ काफी धन खर्च होता है। हाउस वाइफ को केस लड़ने में परेशानी होती है। ऐसे में वे पति से खर्च वसूलकर केस लड़ती हैं।
Published on:
18 Sept 2023 01:25 pm

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