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अपनी ही नगर सरकार की कमियां गिनाईं तो सभी रह गए सन्न, लगाए जनता का पैसा बर्बाद करने के आरोप

नगर निगम जनता से टैक्स के रूप में वसूले गए पैसों को पानी की तरह बहा रहा है। कई निर्माण हो जाते हैं, लेकिन उनकी सही देखरेख नहीं होने से पैसा बर्बाद हो जाता है, फिर नए सिरे से प्रोजेक्ट शुरू कर दिए जाते हैं।

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अपनी ही नगर सरकार की कमियां गिनाईं तो सभी रह गए सन्न, लगाए जनता का पैसा बर्बाद करने के आरोप

ग्वालियर। नगर निगम सभापति राकेश माहौर ने सोमवार को अपनी ही नगर सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया। जल विहार स्थित एक एमएलडी के एसटीपी प्लांट के भूमिपूजन के दौरान महापौर विवेक शेजवलकर की मौजूदगी में जब उन्होंने गंभीर आरोप लगाए और कमियां गिनाईं तो सभी पार्षद और एमआइसी सदस्य सन्न रह गए।

उन्होंने कहा कि नगर निगम जनता से टैक्स के रूप में वसूले गए पैसों को पानी की तरह बहा रहा है। कई निर्माण हो जाते हैं, लेकिन उनकी सही देखरेख नहीं होने से पैसा बर्बाद हो जाता है, फिर नए सिरे से प्रोजेक्ट शुरू कर दिए जाते हैं। उन्होंने कहा कि पहले थीम रोड बनी, आज उसकी हालत जर्जर हो गई है। कचरा प्रबंधन महापौर शेजवलकर के पहले कार्यकाल में शुरू हुआ, लेकिन उसकी अनदेखी हुई, जिससे करोड़ों रुपए बर्बाद हुए। अब फिर से कचरा प्रबंधन शुरू हो रहा है।


अमृत योजना में भी यही हाल है। जिन वार्डों का सर्वे हुआ, उनकी जगह दूसरे वार्डों में काम हो रहा है। कहीं यह प्रोजेक्ट भी लापरवाही की भेंट न चढ़ जाए, इसके लिए अफसरों को विशेष ध्यान देने की जरूरत है। सभापति परिषद की बैठकों में भी खुलकर अफसरों की लापरवाही पर सवाल उठाते रहे हैं।

कार्यक्रम में निगमायुक्त विनोद शर्मा, एमआइसी सदस्य धर्मेंद्र राणा, धर्मेंद्र तोमर, खेमचंद गुरुवानी, नीलिमा शिंदे, मीना शिवराम जाटव, पार्षद दिनेश दीक्षित, पुरुषोत्तम टमोटिया आदि मौजूद रहे।

लक्ष्मीबाई पुल के पास लगेगा हाईडेंट
जल विहार परिसर में करीब 10 लाख लीटर पानी प्रतिदिन साफ करने वाले एसटीपी प्लांट से बैजाताल, बोट क्लब को पानी मुहैया कराया जाएगा। इसके बाद शेष पानी को हाईडेंट लगाकर शहर के मध्य में स्थित पार्क और प्लांटेशन के साथ फायर ब्रिगेड को मुहैया कराने के लिए लक्ष्मीबाई समाधि के पास हाईडेंट लगाया जाएगा। करीब 1.45 करोड़ की लागत से एमबीबीआर (मूवेवल बायो बैड रिएक्टर) प्लांट लगाया जाएगा।

प्लांट ऐसे करेगा काम
1-स्वर्ण रेखा में डली सीवर की मुख्य ट्रंक लाइन से पानी को पंप किया जाएगा।
2-मूविंग बैड बायोलॉजिकल रिएक्टर के दो प्लांट में पानी जाएगा। जहां बैक्टीरिया सीवर की गंदगी को खत्म करेंगे।
3-पानी ग्रेविटी के जरिए ट्यूब सेटलिंग के दो टैंकों में जाएगा, जहां गंदगी पानी के नीचे बैठेगी। इसके बाद ओवरफ्लो होकर पानी सुपर्णाटेंट टैंक में जाएगा।
4-पानी मल्टी मीडिया फिल्टर में जाएगा, इसके बाद स्लज होल्डिंग टैंक में छोड़ा जाएगा।

नोट- कंपनी के इंजीनियरों की मानें तो उन्होंने यह प्लांट भोपाल के प्लास्टिक पार्क में लगाया है, जहां सफलता से पानी को उपयोगी बनाया जा रहा है। महापौर विवेक शेजवलकर ने प्लांट का निरीक्षण करने के लिए प्रोजेक्ट इंजीनियर शिशिर श्रीवास्तव को निर्देश दिए।