
हनुमानगढ़. भाखड़ा व पौंग बांध अबकी बार अगस्त महीने की शुरुआत में ही लबालब हो गए हैं। इस समय दोनों बांध पूर्ण भराव क्षमता से कुछ फीट खाली हैं। सुरक्षा की दृष्टि से दोनों बांधों को कुछ खाली रखा गया है। ताकि लौटता मानसून बरसे तो बांधों में कुछ पानी भंडारित किया जा सके। 21 मई से 20 सितम्बर तक बांधों के भराव का समय माना जाता है।
इस लिहाज से करीब एक महीने पहले ही बांधों में अपेक्षित आवक होने से किसान खुश हो रहे हैं। बांधों में अच्छी आवक से रबी बिजाई में सिंचाई पानी का टंटा खत्म हो गया है। माना जा रहा है आगामी अक्टूबर-नवम्बर में रबी फसलों की बिजाई के लिए किसानों को मांग के अनुसार पानी मिल सकेगा।
जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के अनुसार 07 अगस्त 2023 को भाखड़ा बांध का जल स्तर 1666 फीट के करीब था। इसकी भराव क्षमता 1680 फीट है। इसी तरह पौंग बांध का लेवल 1373 फीट तक पहुंच गया है। इस बांध की भराव क्षमता 1390 फीट है। दोनों बांध पूर्ण भराव क्षमता के नजदीक पहुंच गए हैं। राजस्थान के बारह जिलों के लिए इसे राहत की खबर मान सकते हैं। नहरी जिलों में पानी के लिए किसानों का उग्र आंदोलन होता रहा है। इस लिहाज से बांधों में आवक की स्थिति इसी तरह ठीक रहने पर अबकी बार पानी का संकट टलता नजर आ रहा है।
यह भी पढ़ें : बिपराजॉय तूफान आए या फिर मूसलाधार बारिश, एनडीएमए अब ऐसे देगा रेड अलर्ट
बंटवारे पर नजर
भारत के विभाजन से पूर्व देश में सिंधु प्रणाली की छह नदियां जैसे सिंधु, झेलम, चिनाव, रावी, व्यास तथा सतलुज प्रवाहित होती थी। इन नदियों के पानी के उपयोग के लिए 1960 में भारत एवं पाकिस्तान के मध्य विश्व बैंक की मध्यस्थता में समझौता हुआ था। इस समझौते पर भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री स्व. जवाहरलाल नेहरू व पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति फील्ड मार्शल अयूब खां ने हस्ताक्षर किए थे। इस संधि के तहत सिंधु, झेलम व चिनाव नदियों का पानी पाकिस्तान के हिस्से में आया। जबकि रावी, व्यास व सतुलज नदियों का पानी पूर्ण रूप से भारत को उपयोग के लिए उपलब्ध हुआ। इन तीनों नदियों के पानी से देश के कई राज्यों को विकसित करने के लिए बांध व नहरों का निर्माण करवाया गया था। इसके फलस्वरूप इंदिरागांधी नहर परियोजना से राजस्थान जैसे मरु प्रदेश के इतने जिले सिंचित हो रहे हैं।
इन 12 जिलों को होगा लाभ
नहरी क्षेत्रों से राजस्थान में 6000-7000 करोड़ का उत्पादन हो रहा है। हनुमानगढ़-श्रीगंगानगर जिले की बात करें तो यहां करीब दस लाख हेक्टैयर में खेती हो रही है। भाखड़ा व पौंग बांधों से प्रदेश की इंदिरागांधी, गंगकैनाल, भाखड़ा सहित अन्य नहरी परियोजनाओं को पानी मिल रहा है। हनुमानगढ़, श्रीगंगानगर, चूरू, बीकानेर, नागौर, जोधपुर, जैसलमेर सहित बारह जिलों को इन नहरों से पानी की आपूर्ति हो रही है। इन जिलों के आर्थिक विकास का बड़ा आधार नहरी तंत्र ही हैं।
यह भी पढ़ें : IMD Alert: हिमालय शिफ्ट हुई मानसून ट्रफ लाइन, अब 14 अगस्त तक यहां होगी झमाझम बारिश
फैक्ट फाइल....
- भाखड़ा बांध का निर्माण 1948-63 के बीच पूर्ण हुआ। इस बांध की नदी तल से ऊंचाई 550 मीटर है। इस बांध की पूर्ण भराव क्षमता 1680 फीट है।
- पौंग बांध व्यास नदी पर बना हुआ है। इस बांध का निर्माण वर्ष 1974 में पूर्ण हुआ। इस बांध की पूर्ण भराव क्षमता 1390 फीट है।
- राजस्थान क्षेत्र में इंदिरागांधी नहर की लंबाई 445 किमी है, इस नहर से हनुमानगढ़, श्रीगंगानगर, बीकानेर, जैसलमेर, चूरू व नागौर सहित प्रदेश के बारह जिलों की प्यास बुझ रही है।
- 1958 में इंदिरागांधी फीडर का निर्माण शुरू हुआ था, 11 अक्टूबर 1961 में राजस्थान में पहली बार इंदिरागांधी नहर की नौरंगदेसर वितरिका में पानी प्रवाहित किया गया था।
बिजाई के लिए मिलेगा पानी
इस बार समय पर मानसून के सक्रिय होने से भाखड़ा व पौंग बांध में अच्छी आवक हुई। इससे बांधों का जल स्तर काफी अच्छा हो गया है। रबी बिजाई के वक्त किसानों को सिंचाई पानी मिल सकेगा।
अमरजीत सिंह मेहरड़ा, मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग हनुमानगढ़
Updated on:
09 Aug 2023 12:29 pm
Published on:
09 Aug 2023 12:28 pm
बड़ी खबरें
View Allहनुमानगढ़
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
