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नहरी पानी की मांग, किसानों व पुलिस में तनातनी

https://www.patrika.com/hanumangarh-news/ हनुमानगढ. लंबे समय से इंदिरागांधी नहर में सिंचाई पानी का रेग्यूलेशन जारी नहीं होने से किसानों में रोष बढ़ता जा रहा है। नौरंगदेसर-रावतसर वितरिका में पानी छोडऩे तथा इंदिरागांधी मुख्य नहर का रेगुलेशन निर्धारित करने की मांग को लेकर किसानों ने मंगलवार को संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले जल संसाधन विभाग उत्तर संभाग हनुमानगढ़ कार्यालय का घेराव किया।  

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नहरी पानी की मांग, किसानों व पुलिस में तनातनी

नहरी पानी की मांग, किसानों व पुलिस में तनातनी

नहरी पानी की मांग, किसानों व पुलिस में तनातनी
-चीफ इंजीनियर कार्यालय को घेर कर किसानों ने जताया रोष
-अधिकारियों की ओर से लिखित आश्वासन मिलने पर माने किसान

हनुमानगढ. लंबे समय से इंदिरागांधी नहर में सिंचाई पानी का रेग्यूलेशन जारी नहीं होने से किसानों में रोष बढ़ता जा रहा है। नौरंगदेसर-रावतसर वितरिका में पानी छोडऩे तथा इंदिरागांधी मुख्य नहर का रेगुलेशन निर्धारित करने की मांग को लेकर किसानों ने मंगलवार को संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले जल संसाधन विभाग उत्तर संभाग हनुमानगढ़ कार्यालय का घेराव किया। किसानों के रोष को देखते हुए कार्यालय के मुख्य द्वार पर पुलिस का जाब्ता तैनात रहा। जैसे ही किसान मुख्य द्वार को फांदकर कार्यालय में जाने लगे तो मौजूद पुलिस कर्मियों ने उन्हें रोकने का प्रयास किया। इस दौरान पुलिस व किसानों के बीच काफी तनातनी का माहौल बन गया। किसान गेट खोलकर सिंचाई विभाग कार्यालय परिसर में जाकर नारेबाजी करने लगे व धरना शुरू कर दिया। हालांकि उस समय मुख्य अभियंता कार्यालय में मौजूद नहीं थे। इससे किसानों में रोष और बढ़ गया। किसान नेताओं ने सरकार पर किसान हितों की अनदेखी करने का आरोप लगाया। मौके पर विभाग के एसई की ओर से मांगों को लेकर आश्वासन देने के बाद किसान नेता रघुवीर सिंह वर्मा ने बताया कि यदि मांग के अनुसार रावतसर-नौरंगदेसर वितरिका में पानी नहीं चला तो आंदोलन तेज किया जाएगा। साथ ही इंदिरागांधी नहर में जल्द सिंचाई रेग्यूलेशन जारी करने की मांग को लेकर रणनीति बनाई जाएगी।

इसलिए बढ़ा रोष
संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले मंगलवार को जल संसाधन उत्तर संभाग हनुमानगढ़ कार्यालय के समक्ष विरोध-प्रदर्शन कर रहे किसानों को पुलिस जाब्ते ने गेट पर रोक लिया। तभी भाजपा के कुछ नेता दूसरे गेट से कार्यालय के अंदर जाने लगे। इन्हें कार्यालय के अंदर जाने की पुलिस की ओर से अनुमति देने पर किसान व उनकी अगुवाई कर रहे किसान प्रतिनिधि भड़क गए। रघुवीर सिंह वर्मा व रेशमसिंह मानुका के नेतृत्व में आक्रोशित प्रदर्शनकारी गेट पर चढ़कर अंदर जाने का प्रयास करने लगे। पुलिस कर्मियों ने उन्हें रोकने का प्रयास किया लेकिन वे मुख्य अभियंता के कार्यालय के चैम्बर तक पहुंच गए और बाहर धरना लगा दिया तथा मुख्य अभियंता के आने का इंतजार करने लगे।

यह बोले किसान नेता
मुख्य अभियंता कार्यालय के समक्ष हुई सभा में वक्ताओं ने कहा कि मार्च में इंदिरा गांधी मुख्य नहर की मरम्मत के चलते नहरबंदी ली गई थी। नहरबंदी को खत्म हुए करीब चार माह हो चुके हैं। लेकिन अभी तक इंदिरागांधी नहर परियोजना में सिंचाई पानी को लेकर रेगुलेशन निर्धारित नहीं किया गया है। इंदिरागांधी नहर परियोजना की रावतसर व नौरंगदेसर वितरिका में करीब एक माह से सिंचाई पानी नहीं छोड़ा गया है। इससे इस इलाके में फसलें झुलस रही हैं। पौंग बांध का जलस्तर वर्तमान में निर्धारित सीमा से कम बताया जा रहा है। लेकिन पिछले कुछ दिनों से इससे भी कम जलस्तर होने पर भी राजस्थान की नहरों में रेगुलेशन बनाकर पानी दिया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इंदिरागांधी नहर के प्रथम चरण का रेगुलेशन न बनाकर किसानों को बर्बाद कर रही है।

यह रहे मौजूद
किसानों की सभा में वक्ताओं ने रावतसर-नौरंगदेसर वितरिका में जल्द पानी छोडऩे, राजस्थान की तरफ से बीबीएमबी की बैठक में प्रभावी बात रखते हुए तत्काल मांग के अनुसार राजस्थान का शेयर निर्धारित करवाने, सिंचाई पानी की जरूरत को देखते हुए इंदिरा गांधी नहर परियोजना क्षेत्र में नहरों को चार में से दो समूह में चलाकर उसी हिसाब से किसानों को पानी देने की मांग की। इस मौके पर गोपाल बिश्नोई, करणवीर सिंह, हरजिंद्र सिंह, चरणजीत सिंह, तलविंद्र सिंह, स्वराज सिंह, गुरप्रीत मान, रजनदीप सिंह, हरदीप सरां, संजय, जाकिर, मनप्रीत मान, सद्दाम हुसैन, श्याम सुंदर शर्मा, रामप्रताप भांभू, सुखमंद्र सिंह, लखवीर सिंह, सरबजीत सिंह, सुरेन्द्रपाल सिंह आदि मौजूद थे।

लिखित आश्वासन मिला
घेराव-प्रदर्शन कर रहे किसानों से दोपहर को विभाग के एसई ने धरनास्थल पर जाकर बात की। उन्होंने किसानों को आश्वासन दिया कि तीन सितंबर को रावतसर-नौरंगदेसर वितरिका में पानी चलाया जाएगा। इस पर किसानों का कहना था कि रेगुलेशन बना हुआ नहीं है। इसलिए उन्हें उनकी बात पर विश्वास नहीं हैं। वह उन्हें तीन सितंबर से पानी चलाने की बात लिखित में दें। इस पर एसई ने उन्हें लिखित में पानी चलाने का आश्वासन दिया। इसमें बताया कि तीन सितम्बर को सूरतगढ़ ब्रांच के बंद होने के बाद उक्त नहरों में पानी चला दिया जाएगा। इसके बाद किसानों ने धरना समाप्त किया।