
अफसरों की तकनीकी भूल से खारिज पाठशाला भवनों के निर्माण-मरम्मत प्रस्ताव
अफसरों की तकनीकी भूल से खारिज पाठशाला भवनों के निर्माण-मरम्मत प्रस्ताव
- तकमीना के अभाव में ही भेज दिए प्रस्ताव, निदेशालय ने किए निरस्त
हनुमानगढ़. शिक्षा विभाग के अधिकारियों की तकनीकी भूल के चलते निदेशालय ने पाठशाला भवनों के नव निर्माण एवं मरम्मत प्रस्ताव खारिज कर दिए हैं। जिले से जो प्रस्ताव निदेशालय को भेजे गए थे, उनमें निर्माण-मरम्मत कार्य के तकमीना/ ब्लू प्रिंट का अभाव था। ऐसे में निदेशालय ने सभी प्रस्तावों को निरस्त करते हुए नए सिरे से तकमीना/ ब्लू प्रिंट के साथ प्रस्ताव भिजवाने का निर्देश शिक्षा अधिकारियों को दिया है। इसके लिए तीन दिन का समय दिया गया है।
संयुक्त निदेशक, स्कूल शिक्षा बीकानेर संभाग प्रकाशचंद्र जाटोलिया ने इस संबंध में आदेश जारी किया है। खास बात यह कि संभाग में हनुमानगढ़ एवं श्रीगंगानगर जिले से जो प्रस्ताव भिजवाए गए थे, उनमें ही ब्लू प्रिंट का अभाव था। ऐसे में दोनों ही जिलों के मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी को शीघ्रता से नए प्रस्ताव बनाकर भेजने को कहा गया है। इसके बाद प्रदेश भर के प्रस्तावों की रिपोर्ट राज्य सरकार को भिजवाई जाएगी। वहीं बीकानेर जिले से प्रस्ताव बहुत कम संख्या में भिजवाए गए हैं। पूरे जिले से केवल पांच प्रस्ताव भिजवाए गए हैं। यह इतने कम हैं कि निदेशालय के अधिकारी खुद ही कह रहे हैं कि प्रस्तावों की संख्या बढ़ाई जाए।
ठोस कारण व अभिशंसा जरूरी
निदेशालय के आदेशानुसार नए सिरे से जो प्रस्ताव तैयार करने हैं, उनमें मुख्यत: तीन बिन्दुओं का ध्यान रखने को कहा गया है। पुराने प्रस्तावों में इन बिन्दुओं की अनदेखी की गई थी। अब प्रारंभिक एवं माध्यमिक विद्यालयों के प्रस्ताव अलग-अलग भिजवाने हैं। नवीन भवन निर्माण का प्रस्ताव तकमीना, ब्लू प्रिंट और नए भवन बनाने का ठोस कारण संबंधित प्रधानाचार्य/ प्रधानाध्यापक व जिला शिक्षा अधिकारी की अभिशंसा सहित भेजना होगा। इसी तरह बड़े स्तर पर जिन विद्यालयों में मरम्मत की आवश्यकता है, उनके प्राथमिकता के हिसाब से प्रस्ताव तैयार करने हैं। इनके साथ भी प्रधानाचार्य/ प्रधानाध्यापक व जिला शिक्षा अधिकारी की अभिशंसा होनी चाहिए।
बरत रहे लापरवाही
जानकारों की माने तो भवन निर्माण एवं मरम्मत के प्रस्ताव मांगे जाते रहते हैं। ऐसे में शिक्षा अधिकारियों का प्रस्ताव भिजवाने का अनुभव है। इसके बावजूद प्रस्ताव भेजने में सुस्ती व लापरवाही बरती जाती है। तकमीना वगैरह का अभाव होना इसका प्रमाण है। इससे कार्य में अनावश्यक देरी होती है। अंतत: संबंधित विद्यालय का विकास अटकता है। इसका खमियाजा विद्यार्थियों को ही भुगतना पड़ता है।
Published on:
26 Jun 2021 11:21 am
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