
जिला अस्पताल ने मंगवाई एलाइजा की 13 किट, आज से होगी जांच, 10 संदिग्ध रोगी आए सामने
जिला अस्पताल ने मंगवाई एलाइजा की 13 किट, आज से होगी जांच, 10 संदिग्ध रोगी आए सामने
- जिले में अब तक डेंगू के 16 रोगी आ चुके हैं सामने
हनुमानगढ़. जिला अस्पताल में सोमवार से एलाइजा जांच की जाएगी। संदिग्ध डेंगू रोगी की जांच के लिए 13 एलाइजा की किट मंगवाई गई है। एक किट से 96 रोगी की एलाइजा जांच की जा सकती है। जिला अस्पताल की लैब में अब तक रेपिड कार्ड के जरिए डेंगू के दस संदिग्ध रोगी सामने आ चुके हैं। इनकी पुष्टि के लिए गंभीर रोगियों की सोमवार को एलाइजा की जांच होगी। इनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर ही स्वास्थ्य विभाग डेंगू होने की पुष्टि करेगा। इधर, जिले में अब तक डेंगू के 16 रोगी सामने आ चुके हैं। यह वे रोगी हैं जिनका इलाज अन्य जिलों में चल रहा था। दरअसल जिले में एलाइजा जांच नहीं होने के कारण स्वास्थ्य विभाग के रिकार्ड में स्थानीय आंकड़ा दर्ज नहीं है। जानकारी के अनुसार डेंगू बुखार तीन तरह का होता है। पहला साधारण डेंगू बुखार, दूसरा डेंगू हैमरेजिक बुखार (डीएचएफ), डेंगू शॉक सिंड्रोम (डीएसएस)। इन तीनों में से दूसरे और तीसरे तरह का डेंगू सबसे ज्यादा खतरनाक होता है। साधारण डेंगू बुखार अपने आप ठीक हो जाता है और इससे जान जाने का खतरा नहीं होता लेकिन अगर किसी को डीएचएफ या डीएसएस है और उसका फौरन इलाज लेना चाहिए।
डेंगू में यह होते हैं लक्षण
- साधारण डेंगू बुखार में ठंड लगने के बाद अचानक तेज बुखार चढ़ता है। सिर, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द होना, आंखों के पिछले हिस्से में दर्द होना, जो आंखों को दबाने या हिलाने से और बढ़ जाता है। इसके अलावा बहुत ज्यादा कमजोरी लगना, भूख न लगना, शरीर खासकर चेहरे, गर्दन और छाती पर लाल-गुलाबी रंग के रैशेज होना। बुखार करीब 5 से 7 दिन तक रहता है और मरीज ठीक हो जाता है। ज्यादातर मामलों में इसी किस्म का डेंगू बुखार होता है।
- डेंगू हैमरेजिक बुखार होने पर नाक और मसूढ़ों से खून आना, शौच या उलटी में खून आना. स्किन पर गहरे नीले-काले रंग के छोटे या बड़े चिकत्ते पड़ जाते हैं।
- डेंगू शॉक सिंड्रोम होने पर मरीज बहुत बेचैन हो जाता है और तेज बुखार के बावजूद उसकी स्किन ठंडी महसूस होती है। मरीज धीरे-धीरे होश खोने लगता है।
मरीज की नाड़ी कभी तेज और कभी धीरे चलने लगती है। उसका ब्लड प्रेशर एकदम लो हो जाता है।
प्लेटलेट्स की भूमिका
आमतौर पर शरीर में ढाई से तीन लाख प्लेटलेट्स होते हैं। प्लेटलेट्स बॉडी की ब्लीडिंग रोकने का काम करती हैं। अगर प्लेटलेट्स एक लाख से कम हो जाएं तो उसकी वजह डेंगू हो सकता है। हालांकि यह जरूरी नहीं है कि जिसे डेंगू हो, उसकी प्लेटलेट्स नीचे ही जाएं। प्लेटलेट्स अगर एक लाख से कम हैं तो मरीज को फौरन हॉस्पिटल में भर्ती कराना चाहिए। अगर प्लेटलेट्स गिरकर 20 हजार तक या उससे नीचे पहुंच जाएं तो प्लेटलेट्स चढ़ाने की जरूरत पड़ती है। 40-50 हजार प्लेटलेट्स तक ब्लीडिंग नहीं होती। बच्चों का इम्यून सिस्टम ज्यादा कमजोर होता है और वे खुले में ज्यादा रहते हैं इसलिए उनके प्रति सचेत होने की ज्यादा जरूरत है।
स्थानीय पार्षद व सरपंच को कहकर करवाएं फोगिंग
घर या ऑफिस के आसपास पानी जमा न होने दें, गड्ढ़ों को मिट्टी से भर दें, रुकी हुई नालियों को साफ करवाएं और स्थानीय पार्षद व सरपंच को कहकर इलाके में फोगिंग करवाएं और एमएलओ दवा का छिड़काव भी करवाएं। अगर पानी जमा होने से रोकना मुमकिन नहीं है तो उसमें पेट्रोल या केरोसिन ऑयल डालें।
- रूम कूलर, फूलदानों का सारा पानी हफ्ते में एक बार और पक्षियों को दाना-पानी देने के बर्तन को रोज पूरी तरह से खाली करें, उन्हें सुखाएं और फिर भरें।
- डेंगू के मच्छर साफ पानी में पनपते हैं, इसलिए पानी की टंकी को अच्छी तरह बंद करके रखें।
- घर की खिड़कियों और दरवाजों पर जाली लगवाकर मच्छरों को घर में आने से रोकें।
- मच्छरों को भगाने और मारने के लिए मच्छरनाशक क्रीम, स्प्रे, मैट्स, कॉइल्स आदि का इस्तेमाल करें।
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Published on:
18 Oct 2021 09:43 pm
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