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शिवालिक की पहाडिय़ों में मानसून की मेहरबानी से घग्घर में फिर शुरू हुई पानी की आवक

शिवालिक की पहाडिय़ों में मानसून की मेहरबानी से घग्घर में फिर शुरू हुई पानी की आवक-वर्तमान में घग्घर नदी के गुल्ला चिक्का हैड पर 9240 क्यूसेक पानी हो रहा प्रवाहित-इस वर्ष ग्यारह अगस्त को घग्घर के नाली बेड में बंद हो गया था पानी का प्रवाह  

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शिवालिक की पहाडिय़ों में मानसून की मेहरबानी से घग्घर में फिर शुरू हुई पानी की आवक

शिवालिक की पहाडिय़ों में मानसून की मेहरबानी से घग्घर में फिर शुरू हुई पानी की आवक

हनुमानगढ़। करीब एक पखवाड़े तक पानी प्रवाहित होने के बाद घग्घर के नाली बेड में इस वर्ष 11 अगस्त को पानी का प्रवाह बंद हो गया था। मगर इन दिनों शिवालिक की पहाडिय़ों में मानसून की मेहरबानी होने से घग्घर नदी में फिर पानी की आवक होने लगी है। 23 अगस्त 2021 को घग्घर नदी के गुल्ला चिक्का हैड पर 9240 क्यूसेक पानी प्रवाहित हो रहा था। इसी तरह खनौरी हैड पर 1850 व चांदपुर हैड पर 800 क्यूसेक पानी चल रहा था। आगे बरसात जारी रहने पर पानी का प्रवाह तेज होता है तो हरियाणा के ओटू हैड के रास्ते पानी राजस्थान के नाली बेड में भी आ सकता है।

राजस्थान में घग्घर नदी के पानी से हनुमानगढ़ व श्रीगंगानगर जिले में पचास हजार हेक्टैयर से अधिक क्षेत्र में धान की फसल सिंचित होती है। राजस्थान में करीब एक सौ से अधिक किलोमीटर क्षेत्र में इस नदी का प्रवाह है। शिवालिक की पहाडिय़ों से इस नदी का उद्गम माना जाता है। जबकि श्रीगंगानगर जिले के अनूपगढ़ क्षेत्र में पाक सीमा पर स्थिति भेड़ ताल तक यह पानी पहुंचता है। घग्घर नदी राजस्थान की एक मात्र ऐसी नदी है, जिसकी सीमा पाकिस्तान सीमा को छूती है। वहीं धान उत्पादन के लिहाज से देखें तो किसानों को इसका उचित मोल नहीं मिल पा रहा है। सरकारी उदासीनता के चलते एक दशक से जिले में धान की सरकारी खरीद शुरू नहीं हो रही है। जिले में पिछले वर्ष किसान 1600 रुपए प्रति क्विंटल भाव में धान बेचने को मजबूर थे। जबकि इसका समर्थन मूल्य 1808 रुपए निर्धारित था।

धान उत्पादन पर नजर
हनुमानगढ़ जिले में धान का गत वर्ष औसत उत्पादन 60 क्विंटल प्रति हेक्टैयर हुआ था। पिछले पखवाड़े से बरसात नहीं होने तथा घग्घर नाली बेड में पानी की आवक थमने के कारण धान की फसल में सिंचाई पानी की कमी चल रही है। ज्यादातर धान की फसल को किसान टयूबवैल से सिंचाई करते हैं। नाली बेड में पानी की आवक होने पर किसान पंप करके खेतों में पानी लगाते हैं। इस तरह इस वक्त धान की फसल को सिंचाई पानी की जरूरत है। घग्घर नदी में पानी प्रवाहित होता है तो धान की फसल को काफी फायदा होगा।

यहां से आता पानी
हिमाचल, पंजाब व हरियाणा के आसपास शिवालिक की पहाडिय़ों से घग्घर में पानी का प्रवाह होता है। काफी मात्रा में हरियाणा के ओटू हैड पर पानी का भंडारण कर लिया जाता है। इसके बाद राजस्थान में पानी छोड़ा जाता है। इसके बाद अनूपगढ़ के रास्ते घग्घर का पानी पाकिस्तान जाता है। अनूपगढ़ के रास्ते ही पानी पाक सीमा स्थित भेड़ताल पर पहुंचता है। घग्घर का आगमन हिमाचल प्रदेश के शिमला के पास शिवालिक पहाडिय़ों के पास से माना जाता है।

एक दशक में नाली बेड में चले अधिकतम पानी पर नजर
वर्ष----------पानी
2011--------3000
2012-------- 3000
2013--------4000
2014--------1800
2015--------4000
2016--------3000
2017--------2400
2018--------4700
2019--------5000
2020--------3000
2021--------5000
(नोट: घग्घर के नाली बेड में प्रवाहित पानी को क्यूसेक में समझें।)