
पत्रिका मुहिम....जी-तोड़ मेहनत के बाद भी नहीं मिल रहा धान का उचित मोल
पत्रिका मुहिम: धरतीपुत्रों को धान का मिले उचित मोल
जी-तोड़ मेहनत के बाद भी नहीं मिल रहा धान का उचित मोल
-घग्घर क्षेत्र के किसानों को एक दशक से धान की सरकारी खरीद का इंतजार
हनुमानगढ़. शिवालिक की पहाडिय़ों में मानसून की मेहरबानी होने से इस बार भी घग्घर नदी क्षेत्र में समय पर पानी की आवक हो गई। इससे क्षेत्र के नाली बेल्ट में धान का औसत उत्पादन होने का अनुमान है। जिले की बात करें तो बारिश की कमी इस समय किसानों को खूब खल रही है। जैसे-तैसे किसान इस वक्त फसलों में सिंचाई पानी की कमी दूर करने में लगे हुए हैं। ताकि धान का अधिकाधिक उत्पादन हो सके। लेकिन बीते एक दशक से जिले के किसानों के हालात ऐसे हो रहे हैं कि जी-तोड़ मेहनत के बाद भी इनको धान का उचित मोल नहीं मिल रहा। गत वर्ष की बात करें तो न्यूनतम समर्थन मूल्य की तुलना में किसानों को औसतन तीन सौ से चार सौ रुपए प्रति क्विंटल कम भाव मिले थे। इस बार भी यदि सरकारी खरीद नहीं होती है तो किसानों को औने-पौने दाम पर ही फसल बेचनी पड़ेगी। धान उत्पादन की बात करें तो हनुमानगढ़ जिले में घग्घर के नाली बेल्ट में बरसों से किसान धान की खेती कर रहे हैं। पहले सरकार धान के पीआर वैरायटी की सरकारी खरीद भी करती थी। लेकिन बाद की सरकरों ने किसान हितों की अनदेखी करते हुए खरीद केंद्र ही यहां स्वीकृत करना उचित नहीं समझा। इसके कारण क्षेत्र के हजारों किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य से भी कम रेट में फसल बेचनी पड़ रही है।
उत्पादन पर नजर
धान उत्पादन के लिहाज से हनुमानगढ़ जिले में पीलीबंगा, टाउन, जंक्शन, संगरिया, टिब्बी, तलवाड़ा झील आदि क्षेत्रों में खूब उत्पादन होता है। वर्ष २०१८-१९ की बात करें तो हनुमानगढ़ मंडी क्षेत्र में ११२४६५ एमटी धान की आवक हुई थी। इसी तरह वर्ष २०१९-२० में ९५९८४ एमटी व वर्ष २०२०-२१ में ७४७३६ एमटी धान की आवक हुई थी। इसी तरह संगरिया मंडी क्षेत्र में क्रमश: ४०६७, ८९८९ व २४६३ एमटी, पीलीबंग मंडी क्षेत्र में क्रमश: २३६२९, २५१३४ व १७८१७ एमटी धान की आवक हुई थी।
प्रति वर्ष कितना नुकसान
भाजपा कार्यकर्ताओं ने जिलाध्यक्ष बलवीर बिश्नोई के नेतृत्व में गत दिनों कलक्टर को ज्ञापन सौंपा था। इसमें बताया था कि हनुमानगढ़ तथा श्रीगंगानगर जिलों में 42 हजार हैक्टर में धान की खेती होती है। इसमें 50 प्रतिशत क्षेत्र में परमल धान की औसतन उपज 85 क्विंटल प्रति हैक्टेयर होती है। कुल 17.85 लाख क्विंटल धान का उत्पादन होता है। परमल धान को सरकारी रेट पर खरीदने का प्रावधान है। राज्य सरकार अनुशंषा कर दे तो केंद्र सरकार धान की खरीद शुरू कर दे। ज्ञापन में बताया गया कि सरकारी खरीद नहीं होने से प्रति वर्ष दोनों जिलों के किसानों को करीब 5० करोड़ रुपए का आर्थिक नुकसान हो रहा है।
......फैक्ट फाइल....
-हनुमानगढ़ जिले में चालू खरीफ सीजन में ३३ हजार हेक्टेयर में धान की बिजाई हुई।
-प्रति हेक्टैयर साठ क्विंटल धान उत्पादन का अनुमान है।
-सरकारी खरीद नहीं होने से श्रीगंगानगर व हनुमानगढ़ जिले के किसानों को प्रति वर्ष करीब ५० करोड़ का नुकसान हो रहा है।
-वर्ष २०१८-१९ में हनुमानगढ़ मंडी क्षेत्र में ११२४६५, वर्ष २०१९-२० में ९५९८४ एमटी व वर्ष २०२०-२१ में ७४७३६ एमटी धान की आवक हुई थी।
.......वर्जन.....
सरकार तक पहुंचा रहे मांग
जिले में जो धान होता है, उसकी गुणवत्ता काफी अच्छी होती है। करीब एक दशक पहले तक मंडियों में धान की सरकारी खरीद भी होती थी। इसके बाद किन्हीं कारणो से सरकारी खरीद नहीं हुई। किसानों की मांग को सरकार तक पहुंचा रहे हैं। सरकार के निर्देशानुसार ही खरीद संभव हो सकेगी।
-सीएल वर्मा, सचिव, मंडी समिति हनुमानगढ़
Published on:
28 Aug 2021 08:10 pm
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