'राज के काज' में बढ़ रही बाधा
- हर बरस औसतन दर्ज हो रहे करीब 50 मुकदमे
- कानून के दुरुपयोग के भी लगते रहे हैं आरोप
- इन प्रकरणों में एफआर, समझौते की जानकारी देने में पुलिस के हाथ खड़े
अदरीस खान @ हनुमानगढ़. राज के काज में बाधा की खाज बढ़ रही है। जिले में राजकार्य में बाधा के मुकदमों की संख्या में हर साल इजाफा हो रहा है। अगर पिछले कुछ बरसों के आंकड़ों पर नजर डालें तो हर साल औसतन पचास बार सरकार के 'कामकाज' में बाधा पहुंचाई जा रही है। राजकार्य में बाधा के मामले आईपीसी की धारा 332, 353 के तहत दर्ज किए जाते हैं। खास बात यह कि एक तरफ तो राज के कार्य में बाधा पहुंचाने के मामलों में कमी नहीं आ रही है।
वहीं दूसरी तरफ आईपीसी की धारा 332, 353 के दुरुपयोग के आरोप भी सरकारी कार्मिकों एवं सिस्टम पर निरंतर लगाए जाते रहे हैं। व्यक्तिगत या दूसरे तरह के विवादों को भी गंभीर बनाने के लिए जानबूझकर राजकार्य में बाधा का प्रकरण दर्ज करवा दिया जाता है। इस तरह के आरोप समय-समय पर लगते रहे हैं। अब इसमें हकीकत जो भी हो। मगर वस्तुस्थिति यह है कि राज के काम में बाधा भी बढ़ रही है और बेवजह राजकार्य में बाधा के प्रकरण बनाने के आरोप भी लग रहे हैं।