कोटा

लगी जो आग तो बुझा नहीं पाएंगे

जिले में गेहूं कटाई व उसके बाद आग लगने की काफी घटनाएं होती हैं। लेकिन आग बुझाने के संसाधनों की बात करें तो हालात खतरनाक हैं।

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May 14, 2017

जिले में गेहूं कटाई व उसके बाद आग लगने की काफी घटनाएं होती हैं। लेकिन आग बुझाने के संसाधनों की बात करें तो हालात खतरनाक हैं। अगर बिजली गुल हो तो दमकल की गाडिय़ों में पानी भरने के लिए जनरेटर तक की सुविधा नहीं है। नगर परिषद के पास करोड़ों का बजट है। फिर भी अग्निशमन कार्यालय में असुविधाओं की भरमार है। शहर में किसी बड़ी इमारत होटल या मैरिज पैलेस आदि में आग लगने की घटना हो जाए तो अग्निशमन कर्मचारी उसे बुझा नहीं पाएंगे। क्योंकि उनके पास लेडर्स की व्यवस्था ही नहीं है। और ना ही उनको बड़ी इमारत में आग लगने पर बचाव व राहत कार्य को लेकर अब तक कोई प्रशिक्षण दिया गया है।


इस वित्तीय वर्ष परिषद ने विकास कार्यों के लिए 232 करोड़ रुपए का बजट पारित किया। हैरत की बात है कि करोड़ों रुपए बजट के बाजवूद परिषद हजारों रुपए की लागत के अग्निशमन यंत्र तक नहीं खरीद पा रही। इसके अलावा वर्तमान में हनुमानगढ़ जिला मुख्यालय पर केवल तीन ही दमकल की गाडिय़ां हैं, वह भी खस्ता हाल है। इसके अलावा दो बड़ी गाडियां पिछले डेढ़ माह से मरम्मत के लिए गई हुई हैं, जो अब तक ठीक होकर नहीं आई।

अग्निशमन कार्यालय में करीब 19 फायरमैन स्थाई रूप से कार्यरत हैं। जबकि आठ कर्मचारी अनुबंध पर हैं। इन कर्मचारियों के पास आग लगनी जैसी बड़ी घटनाओं के हिसाब से यूनिफार्म तक नहीं हैं। नियम-कायदों की खानापूर्ति के लिए केवल जूते व हेलमेट की ही व्यवस्था है।

अग्निशमन कार्यालय में 15 हजार लीटर की दो व एक गाड़ी 500 लीटर फॉम की है। इन गाडिय़ों के सहारे फायरमैन पीलीबंगा, रावतसर, संगरिया, टिब्बी, गोलूवाला व आसपास के सभी गावों में आग बुझाने जाते हैं। इन हालात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि आग लगने की घटनाओं के दौरान कर्मचारियों को कितनी मशक्कत करनी पड़ती होगी। आंकड़ों के अनुसार गत एक माह में अब तक 25 जगह आग लगने की घटनाएं हो चुकी हैं।

अगर बिजली गुल हो और उसी समय शहर में या जिले के किसी अन्य स्थान पर आग लग जाए तो उसे बुझाने के लिए दमकल समय पर नहीं पहुंच पाएगी। क्योंकि बिजली गुल होने की स्थिति में गाडिय़ों में पानी भरने के लिए दमकल विभाग के पास जेनरेटर की व्यवस्था नहीं है। ऐसी स्थिति में बिजली की प्रतीक्षा के अलावा कोई चारा नहीं होता। तब तक भले ही कितना नुकसान हो जाए। इस कमी को दूर करने के लिए आज तक किसी अधिकारी ने प्रयास नहीं किया। दमकल कार्यालय में दो सबमर्सिबल पंप लगे हैं। इनसे दमकल की गाडिय़ों में पानी भरा जाता है।

जंक्शन या आसपास के इलाके में आग लगी हो तो पानी भरने के लिए टाउन कार्यालय में ही आना पड़ता है। शहर व आसपास के इलाके में पानी भरने का अन्य कोई विकल्प नहीं है।

अशोक कुमार, दमकल प्रभारी।

दमकल कार्यालय में जनरेटर व अन्य सुविधाएं मुहैया कराने का प्रयास कर रहे हैं। परिषद की अगली बैठक में प्रस्ताव लेकर सभी साधन-संसाधन उपलब्ध कराने की कोशिश करेंगे।

राजकुमार हिसारिया, सभापति, नगर परिषद।

Published on:
14 May 2017 09:31 am
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