
सहायक के अभाव में व्यवस्था असहाय
सहायक के अभाव में व्यवस्था असहाय
- दो दशक से ज्यादा समय से सहायक कर्मचारियों की नहीं हुई सीधी भर्ती
- सरकारी विद्यालयों में साफ-सफाई का जिम्मा पढ़ेसरियों पर
हनुमानगढ़. यूं तो पिछले कुछ बरसों से राजकीय विद्यालयों में पढ़ाई का स्तर सुधरा है। बोर्ड परीक्षा परिणाम भी बेहतर रहा है। मगर बात जब सरकारी विद्यालयों को साधन-संसाधन उपलब्ध कराने की आती है तो सरकारें अपेक्षानुरूप उत्साह नहीं दिखाती। वैसे भी सरकारी पाठशालाओं के संस्था प्रधानों को हर कार्य में जन सहयोग लेने के लिए उच्च स्तर से प्रोत्साहन से लेकर दबाव तक डाला जाता रहा है। ऐसे में सरकारी विद्यालयों में सहायक कर्मचारियों के अभाव की तरफ कोई ध्यान नहीं दे रहा है। संस्था प्रधानों की कोई सुन नहीं रहा है।
जानकारी के अनुसार बीते 24 साल से सहायक कर्मचारियों की सीधी भर्ती नहीं हुई है। ऐसे में जिले के सैकड़ों और प्रदेश के हजारों विद्यालयों में साफ-सफाई का जिम्मा शिक्षकों और बच्चों पर ही है। आंकड़ों के अनुसार राज्य के 65 हजार सरकारी स्कूलों में सहायक कर्मचारियों के 25859 पद स्वीकृत हैं। इसमें से 17655 पद खाली हैं। मतलब कि 68 फीसदी पद खाली हैं। इस कारण सरकारी स्कूलों में सफाई व्यवस्था को लेकर संस्था प्रधानों को अतिरिक्त माथापच्ची व प्रयास करने पड़ते हैं। स्कूल खुलने पर बच्चों और शिक्षकों के जिम्मे ही यह कार्य रहता है।
बिगड़ी रहती व्यवस्था
सरकारी विद्यालयों के संस्था प्रधानों की माने तो सहायक कर्मचारी के अभाव में पाठशाला में मूलभूत सुविधा संबंधी व्यवस्था बिगड़ी रहती है। इस कारण काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। बरसों से सीधी भर्ती नहीं होने से रिक्त पदों की संख्या निरंतर बढ़ रही है। इस पर राज्य सरकार को ध्यान देने की जरूरत है।
Published on:
20 Feb 2021 10:36 pm
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