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ब्याज के साथ अब वसूली खर्च में भी छूट, भूमि विकास बैंक से ऋण लेने वाले किसानों को राहत

https://www.patrika.com/hanumangarh-news/ हनुमानगढ़. अवधिपार ऋणी किसानों की मौत होने पर सरकार स्तर पर अब उनके परिजनों को राहत प्रदान की गई है। भूमि विकास बैंक स्तर पर अब ऐसे अवधिपार ऋणी किसान जिनकी मृत्यु हो गई है, उनके वारिस की ओर से बकाया समस्त मूलधन एक मुश्त जमा करवाने पर खाता बंद करवाने की स्थिति में मृतक ऋणी परिवार को सभी तरह के ब्याज व वसूली खर्च की छूट प्रदान की गई है।  
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हनुमानगढ़

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Purushotam Jha

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Updated: 1 Sep 2020, 8:28 AM IST

ब्याज के साथ अब वसूली खर्च में भी छूट, भूमि विकास बैंक से ऋण लेने वाले किसानों को राहत

ब्याज के साथ अब वसूली खर्च में भी छूट, भूमि विकास बैंक से ऋण लेने वाले किसानों को राहत

ब्याज के साथ अब वसूली खर्च में भी छूट, भूमि विकास बैंक से ऋण लेने वाले किसानों को राहत
हनुमानगढ़. अवधिपार ऋणी किसानों की मौत होने पर सरकार स्तर पर अब उनके परिजनों को राहत प्रदान की गई है। भूमि विकास बैंक स्तर पर अब ऐसे अवधिपार ऋणी किसान जिनकी मृत्यु हो गई है, उनके वारिस की ओर से बकाया समस्त मूलधन एक मुश्त जमा करवाने पर खाता बंद करवाने की स्थिति में मृतक ऋणी परिवार को सभी तरह के ब्याज व वसूली खर्च की छूट प्रदान की गई है।
सहकारी भूमि विकास बैंक से लोन लेने वाले किसानों राहत प्रदान करने के लिए सहकारिता मंत्री ने कुछ अहम निर्णय लिए हैं। इसमें हाल ही में एकमुश्त समझौता योजना २०२०-२१ स्वीकृत की गई है। इस योजना के तहत अवधिपार श्रेणी के किसानों के अवधिपार ब्याज व दंडनीय ब्याज को पचास प्रतिशत तक माफ किया गया है। बैंक सचिव प्रियंका जांगिड़ ने बताया कि इस योजना में एक जुलाई २०१९ तक अवधिपार हो चुके ऋण पात्र होंगे। संबंधित मामलों में तीस नवम्बर तक किसान इस योजना का लाभ उठा सकेंगे।
वहीं केंद्रीय सहकारी बैंकों से ऋण लेने को लेकर भी कई तरह के बदलाव किए गए हैं। इसमें सहकारी बैंकों के ऐसे ऋणी जो वर्तमान में अवधिपार श्रेणी में हैं तथा जिनका ऋण माफी योजना के तहत ऋण माफ नहीं हुआ है। ऐसे मामलों में मूल राशि के बराबर पुन: ऋण देने का फैसला सरकार स्तर पर लिया गया है। बैंक स्टॉफ के अनुसार संबंधित किसान की ओर से ऋण राशि जमा करवाने के बावजूद भूलवश कई किसानों को डिफाल्टर की श्रेणी में रख दिया गया। इसके बाद से इन्हें फसली ऋण वितरण में दिक्कतें आ रही थी। लेकिन अब सहकारिता विभाग ने निर्देश जारी कर बायोमैट्रिक सत्यापन से वंचित प्रकरणों का निस्तारण जीआरए के माध्यम से करवाने की बात कही है। ऐसे प्रकरणों में जिनमें ऋण माफी पोर्टल पर पैक्स/लैम्पस व्यवस्थापक की ओर से त्रुटिवश अवधिपार के रूप में अपलोड कर माफी प्रदान कर दी गई। मगर वास्तव में वह अनावधिपार है तो ऐसे प्रकरण का निस्तारण भी अब ग्रिवेंस, रीड्रिजल ऑथोरिटी (जीआरए) स्तर पर करने की स्वीकृति प्रदान कर दी है। इसके बाद सभी तरह की प्रक्रिया को पूरा करने में बैंक की टीम जुटी हुुई है।