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पत्नी के आत्महत्या दुष्प्रेरण मामले में पति को पुलिस ने माना आरोपी, कोर्ट ने संदेह का लाभ देते हुए किया बरी

हनुमानगढ़. आत्महत्या दुष्प्रेरण के प्रकरण में अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश द्वितीय श्यामकुमार व्यास ने आरोपी पति को संदेह का लाभ देते हुए दोष मुक्त करार देते हुए बरी कर दिया।
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पत्नी के आत्महत्या दुष्प्रेरण मामले में पति को पुलिस ने माना आरोपी, कोर्ट ने संदेह का लाभ देते हुए किया बरी

पत्नी के आत्महत्या दुष्प्रेरण मामले में पति को पुलिस ने माना आरोपी, कोर्ट ने संदेह का लाभ देते हुए किया बरी

पत्नी के आत्महत्या दुष्प्रेरण मामले में पति को पुलिस ने माना आरोपी, कोर्ट ने संदेह का लाभ देते हुए किया बरी
- पीलीबंगा थाना क्षेत्र के गांव माणक थेड़ी का प्रकरण
हनुमानगढ़. आत्महत्या दुष्प्रेरण के प्रकरण में अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश द्वितीय श्यामकुमार व्यास ने शुक्रवार को आरोपी पति को संदेह का लाभ देते हुए दोष मुक्त करार देते हुए बरी कर दिया। पीलीबंगा पुलिस थाना क्षेत्र के गांव माणक थेड़ी का यह मामला 2019 से न्यायालय में विचाराधीन था। महत्वपूर्ण यह कि पुलिस ने न्यायालय में प्रस्तुत चालान में मृतका के पति को आरोपी बनाया था। सुनवाई के दौरान न्यायालय ने सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए आरोपी पति को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।
बचाव पक्ष के एडवोकेट पवन श्रीवास्तव ने बताया कि 2019 में रोहिताश पुत्र लालचन्द निवासी माणक थेड़ी पीएस पीलीबंगा की पत्नी शकीला पुत्री हेतराम मेघवाल ने श्रीगंगानगर के राजकीय चिकित्सालय में उपचार के दौरान पुलिस को दिए पर्चा बयान में बताया था कि उसकी शादी दस वर्ष पूर्व हुई थी। शराब के सेवन का आदी उसका पति शादी के बाद से उसके साथ निरंतर मारपीट करता है। शकीला ने आरोप लगाया था कि 21 मार्च 2019 को उसके पति रोहिताश ने धमकी दी कि आज वह गला घोंटकर उसे मार देगा। शकीला के अनुसार रोहिताश उसे मारता, इससे पहले ही उसने घर में पड़ी चिमनी का तेल अपने ऊपर डाल कर खुद को आग लगा ली। पीलीबंगा पुलिस ने आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरित करने के आरोप में आईपीसी की धारा 306, 498 ए एवं 323 में मुकदमा दर्ज किया। रोहिताश को आरोपी मानकर गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में जेल भिजवा दिया। रोहिताश तभी से न्यायिक अभिरक्षा में चल रहा था। न्यायालय में पैरवी के दौरान 11 रूलिंग पेश की गई और 16 गवाहों से बहस कर मामले को फैसले तक ले जाया गया। न्यायाधीश ने एपीपी नरेन्द्र सिंधी व आरोपी के वकील की बहस सुनने के बाद 13 अप्रेल को इस मामले में फैसला सुरक्षित रखा। सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश संख्या दो श्याम कुमार व्यास ने शुक्रवार को रोहिताश को संदेह का लाभ देकर बरी कर दिया।

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