पानी मामले में पंजाब दिखाने लगा पैंतरेबाजी, इंदिरागांधी नहर पर मंडराने लगे संकट के बादल

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हनुमानगढ़. इंदिरागांधी नहर में सिंचाई पानी को लेकर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। स्थिति यह है कि पानी मामले में पंजाब ने अपनी पैंतरेबाजी अभी से शुरू कर दी है।

 

By: Purushottam Jha

Published: 18 Dec 2020, 09:03 AM IST

पानी मामले में पंजाब दिखाने लगा पैंतरेबाजी, इंदिरागांधी नहर पर मंडराने लगे संकट के बादल
-अनुमानित 25 प्रतिशत इनफ्लो की तुलना में महज 2 प्रतिशत ही हुई आवक
-मावठ मजबूत नहीं रहने पर शेयर की स्थिति काफी कमजोर रहने की आशंका

हनुमानगढ़. इंदिरागांधी नहर में सिंचाई पानी को लेकर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। स्थिति यह है कि पानी मामले में पंजाब ने अपनी पैंतरेबाजी अभी से शुरू कर दी है। जल संकट की स्थिति को भांपते हुए पंजाब मौका-बेमौका राजस्थान के शेयर में कटौती करने से पीछे नहीं हट रहा है। हालात ऐसे हैं कि दिसम्बर के पहले सप्ताह में ही पंजाब ने रणजीत सागर बांध से राजस्थान क्षेत्र के लिए प्रवाहित पानी की मात्रा घटा दी। इंदिरागांधी नहर में अचानक करीब दो हजार क्यूसेक पानी की कमी आ जाने से कई प्रमुख नहरों के पिटने की नौबत आ गई। राजस्थान सरकार ने तत्काल बीबीएमबी चैयरमेन से समन्वय बनाकर हरिके बैराज से तय शेयर के अनुसार राजस्थान क्षेत्र के लिए पानी प्रवाहित करवाया। इसके बाद रेग्यूलेशन के अनुसार नहरों का संचालन संभव हुआ।
अब जिस तरीके से मावठ लगातार कमजोर जा रही है, उससे इंदिरागांधी नहर में जल संकट की स्थिति भी गहराती जा रही है। यही हालात रहे तो फरवरी के अंत तक राजस्थान का शेयर खत्म हो जाएगा। इस बारे में जल संसाधन विभाग उत्तर संभाग हनुमानगढ़ के मुख्य अभियंता का कहना है कि तीनों बांधों से पानी की निकासी को लेकर जो प्रबंधन किया जाता है, वह ठीक से नहीं हो पाने के कारण हरिके बैराज का पौंड लेवल टूट गया। इससे राजस्थान कैनाल की नहरों पर विपरीत असर पड़ सकता था। लेकिन राजस्थान ने तत्काल समन्वय बनाकर स्थिति को बिगडऩे से बचा लिया। अभी बांधों में ड्राई सीजन में जितनी आवक की उम्मीद की गई थी, उसकी तुलना में दो से तीन प्रतिशत पानी की आवक हो पाई है। यही स्थिति रहने पर फरवरी में हमारा शेयर खत्म हो जाएगा। इसके बाद रेग्यूलेशन बदलने की नौबत भी आ सकती है। हालांकि मावठ का सीजन आगे एक माह तक बने रहने की संभावना है। इसलिए भविष्य का रेग्यूलेशन क्या होगा, इस बारे में अभी कुछ नहीं कहा जा सकता। अभी इंदिरागांधी नहर को राजस्थान में तीन में एक समूह में चलाया जा रहा है।


समझिए नुकसान को
रणजीत सागर बांध का संचालन पंजाब सरकार करती है। पिछले सप्ताह रणजीत सागर बांध से जितना पानी छोडऩा चाहिए था, उतना पंजाब ने नहीं छोड़ा। करीब दो हजार क्यूसेक पानी की कमी के कारण हरिके बैराज का पौंड लेवल मेनटेन नहीं हो सका। इससे राजस्थान की इंदिरागांधी नहर पर काफी प्रभाव पड़ा। समय पर पानी का प्रबंधन यदि सही नहीं करवाया जाता तो राजस्थान को बड़ा नुकसान हो सकता था। लेकिन जल संसाधन विभाग राजस्थान के शासन सचिव ने तत्काल इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए बीबीएमबी चैयरमेन से समन्वय करके स्थिति को सामान्य करवा दिया। इस वक्त हनुमानगढ़ व श्रीगंगानगर जिले की बात करें तो गेहूं की फसल में पहला सिंचाई पानी देने में किसान लगे हैं। यदि नहरें पिटती तो हजारों किसान प्रभावित होते।

रेग्यूलेशन पर नजर
२१ सितम्बर २०२० के आंकलन के अनुसार रावी व्यास नदियों के पानी में राजस्थान का डिप्लीशन अवधि में यानी २१ सितम्बर २०२० से २० मई २०२१ में पानी का हिस्सा १७८३९६३ क्यूसेक डेज बनता है। जिसमें से इंदिरागांधी नहर परियोजना का हिस्सा १३३१८५७ क्यूसेक डेज बनता है। जल परामर्शदात्री समिति की ओर से इस वर्ष पानी की उपलब्धता के अनुसार नहरें चार में दो समूह अथवा तीन में एक समूह में चलाकर कुल सात बारी पानी दिए जाने का निर्णय लिया गया है। उक्त सात बारी पानी चलाने के लिए १५५७१२५ क्यूसेक डेज की जरूरत पड़ेगी। जो निर्धारित से २२५२६८ क्यूसेक डेज अधिक है। इस कमी की पूर्ति डिप्लीशन अवधि में अनुमानित ड्राइ इयर इनफ्लो से २५.५२ प्रतिशत इनफ्लोज आने पर ही संभव हो सकेगी। वहीं सात दिसम्बर २०२० तक इनफ्लो की स्थिति के अनुसार रावी व्यास नदियों में वास्तविक इनफ्लो ड्राइ इयर इनफ्लो से केवल २.६८ प्रतिशत अधिक हैं। इस स्थिति में वर्तमान में जारी किए गए रेग्यूलेशन के लिए पानी की आवश्यकता भी पूरी नहीं हो पा रही है।

यह है बांधों का जल स्तर
१५ दिसम्बर २०२० को भाखड़ा बांध का जल स्तर १६२२.०४ फीट था। जबकि आवक ६८९५ क्यूसेक थी। जबकि पौंग बांध का जल स्तर १३५०.३२ फीट था। वहीं आवक की स्थिति २१३० क्यूसेक रही। इस समय सभी दोनों बांधों में आवक की स्थिति सुधरने की उम्मीद लगाए बैठे हैं। यदि आवक की स्थिति नहीं सुधरी तो भविष्य में सिंचाई पानी की स्थिति बिगड़ सकती है।

.....फैक्ट फाइल.....
-इंदिरागांधी नहर से राजस्थान के दस जिलों को पानी मिलता है।
-वर्तमान में इंदिरागांधी नहर को तीन में एक समूह में चलाया जा रहा है।
-१५ दिसम्बर २०२० को पौंग बांध का जल स्तर १३५०.३२ फीट था।
-बांधों में ड्राइ सीजन में अनुमानित २५.५२ प्रतिशत इनफ्लो की तुलना में अब तक महज २.६८ प्रतिशत की हुई आवक।

.....वर्जन....
टूट गया हरिके बैराज का पौंड लेवल
इस समय बांधों में पानी की आवक उम्मीद के मुताबिक काफी कम हो रही है। पिछले सप्ताह रणजीत सागर बांध से कम पानी प्रवाहित करने के कारण हरिके बैराज का पौंड लेवल भी टूट गया था। इससे राजस्थान की इंदिरागांधी नहर को बड़ा नुकसान हो सकता था। राजस्थान सरकार ने समन्वय बनाकर तत्काल तय शेयर के अनुसार पानी प्रवाहित करवा स्थिति को बिगडऩे से बचा लिया। रणजीत सागर बांध का संचालन पंजाब सरकार करती है।
-विनोद मित्तल, मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग उत्तर संभाग हनुमानगढ़

Purushottam Jha Reporting
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