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बांधों का लेवल सुधरे तो राजस्थान को मिले राहत

https://www.patrika.com/hanumangarh-news/ हनुमानगढ़. पौंग व भाखड़ा बांधों के जल स्तर में अपेक्षित सुधार नहीं होने से इंदिरागांधी नहर के सिंचाई रेग्यूलेशन पर सस्पेंस बरकरार है। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि नहर में सिंचाई लायक पानी चल रहा है। लेकिन आगे पानी मिलता रहेगा या नहीं इसकी बीबीएमबी स्तर पर गारंटी नहीं मिलने के कारण सिंचाई रेग्यूलेशन जारी करने में दिक्कत आ रही है।  

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बांधों का लेवल सुधरे तो राजस्थान को मिले राहत

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बांधों का लेवल सुधरे तो राजस्थान को मिले राहत
-बांधों में आवक घटने से इंदिरागांधी नहर में सिंचाई रेग्यूलेशन पर सस्पेंस बरकरार
हनुमानगढ़. पौंग व भाखड़ा बांधों के जल स्तर में अपेक्षित सुधार नहीं होने से इंदिरागांधी नहर के सिंचाई रेग्यूलेशन पर सस्पेंस बरकरार है। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि नहर में सिंचाई लायक पानी चल रहा है। लेकिन आगे पानी मिलता रहेगा या नहीं इसकी बीबीएमबी स्तर पर गारंटी नहीं मिलने के कारण सिंचाई रेग्यूलेशन जारी करने में दिक्कत आ रही है।
बीबीएमबी स्तर पर पानी की गारंटी मिलने के बाद ही सिंचाई रेग्यूलेशन की स्थिति साफ हो सकेगी। बांधों के जल स्तर की बात करें तो २६ जुलाई २०२१ को भाखड़ा बांध का जल स्तर १५७२.८९ फीट था। इसी तरह पौंग बांध का जल स्तर १३१३.०८ फीट था। आगे रबी सीजन में पानी का संकट नहीं आए, इसे देखते हुए बांाधों में पानी भंडारित किया जा रहा है। वर्तमान में ३१ जुलाई तक का राजस्थान का शेयर निर्धारित है। इसके बाद का शेयर निर्धारित करने के लिए ३० जुलाई तक तक बीबीएमबी की बैठक प्रस्तावित है। इसमें अगस्त माह में राजस्थान को मिलने वाले पानी का निर्धारण किया जाएगा।

बीस सितम्बर तक भराव
बांधों के भराव का सीजन २० सितम्बर तक माना जाता है। इस तरह इस बार मानसून के ज्यादा सक्रिय नहीं होने के कारण जुलाई के अंतिम सप्ताह में भी पौंग बांध अपनी भराव क्षमता से करीब ७० फीट खाली है। इस बांध की भराव क्षमता १३८० फीट के करीब है। पौंग बांध में करीब पचास प्रतिशत हिस्सा राजस्थान का निर्धारित है। इस बांध का जल स्तर बढऩे के बाद ही राजस्थान को राहत मिलने के आसार हैं।

पिछले पखवाड़े ठीक रही स्थिति
पिछले पखवाड़े में हिमाचल प्रदेश में बादल फटने से पौंग बांध के जल ग्रहण क्षेत्रों में अच्छी आवक हुई। एक ही दिन में दो लाख से ढाई लाख क्यूसेक पानी की आवक होने के बाद बांध का लेवल कुछ सुधरा भी। लेकिन इसके बाद फिर आवक घटने के कारण जल संकट की स्थिति दूर नहीं हो रही।