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ये श्मशान घाट किसी खुबसूरत पार्क से कम नहीं, सजावट देखकर आप भी हो जाएंगे हैरान

अस्थियां संभाल कर रखने के लिए अस्थि कक्ष बना हुआ है। जिसमें परिवारजन अल्मारी में दिवंगत की अस्थियां सुरक्षित रखते हैं।

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hindu cremation wharf

संगरिया। शमशान घाट का नाम सुनते ही अक्सर हमारे जेहन में एक अलग ही तरह की तस्वीर बनने लगती है। तो वहीं हमारे दिगाम में पैदा हुई श्मशान की छवि हमारे मन में डर भी पैदा कर देता है, लेकिन चारों ओर हरियाली से घिरा पार्क साथ ही फूलों की खुशबू से महकता माहौल अगर किसी शमशान घाट में देखने को मिले तो शायद आप उसे कोई पार्क समझ लें। हम आपको बता दें कि ऐसी ही प्राकृतिक छटा संगरिया के वार्ड चार मीरा कॉलोनी स्थित मुख्य श्मशान घाट में देखने को मिला। जो पर्यावरण संरक्षण की कहानी बयां करने के साथ ही पेड़-पौधे और जीवन के यथार्थ से भी अवगत कराता है।

41 फुट ऊंचे बजरंग बली की प्रतिमा-

दरअसल, सात साल पहले तक इस वीरान कल्याण भूमि में अकेला व्यक्ति दिन में भी जाने से कतराता था, पर अब देर रात तक लोगों की आवाजाही रहती है। यहां भगवान शिव के मंदिर, योग माता, यमराज, भैरों की मूर्तियों पर पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालु आते रहते हैं। तो वहीं यहां शमशान घाट में 41 फुट ऊंचे बजरंग बली और ध्यान मुद्रा में कैलाशवासी भगवान शिव की प्रतिमा का कार्य जोरों पर। जो कल्याण भूमि सेवा समिति के सेवा भावी पदाधिकारियों की सकारात्मक सोच और सेवा भावना के जुनून से संभव हुआ है।

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लोगों की मेहनत ने बदली तस्वीर-

श्मशान घाट के इस बदले तस्वीर को लेकर समिति सचिव आरके मोंगा बताते हैं कि वर्ष 2014 में कल्याण भूमि सेवा समिति ने सार-संभाल का जिम्मा लिया। इसके बाद लगातार कल्याण भूमि का कायाकल्प हो रहा है। तो वहीं अब तक करीब 30 लाख रुपए के विकास कार्य समिति ने व्यापार मंडल और जन सहयोग से करवाए हैं। मुख्य द्वार पर जीवन चक्र सचित्र अंकित है। जो हुतात्मा के संस्कार में पहुंचे लोगों को जीवनचर्या के बारे में सावचेत करता है। तो वहीं दूसरी ओर देवी देवताओं की भव्य मूर्तियां बरबस ही यहां आए लोगों को आकर्षित करती हैं।

हरियाली बरबस ही लोगों को करती आकर्षित-

यहां अंतिम संस्कार के समय हर व्यक्ति दुखी मन से यहां पहुंचता है पर कल्याण भूमि की प्राकृतिक छठा देखकर उसकी आत्मा को सुकून मिलता है। ऐसे में हर कोई समिति की सराहना करने से अपने आपको नहीं रोक पाता। जबकि यहां की हरियाली बरबस ही लोगों को अपनी कमाई से कुछ न कुछ दान देने के लिए प्रेरित करते हैं। समिति ने अपने स्तर पर आरा मशीन, ट्रेक्टर-ट्रॉली, दो वाटर कूलर उपलब्ध करवाए हैं। तो अमरनाथ सेवा समिति दो डीप फ्रिज और एक शव वाहन की व्यवस्था संभालती है। हाल के पास बने पार्क में कैलाश पर विराजे शिव प्रतिमा सहित फव्वारे लगाने का कार्य परवान पर है।

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श्मशान घाट समिति का कहना है कि जल्द ही यहां प्रवेश द्वार के समीप बने पार्क में शिव परिवार का भव्य निर्माण करवाया जाएगा। जिसका नक्शा तैयार है। कल्याण भूमि में बैठने के लिए गलीचे, स्टील कुर्सियां, करीब 40 गुणा 80 आकार का एक हॉल पुरुषों के लिए और दूसरा हॉल 25 गुणा 30 आकार महिलाओं के बैठने के लिए बना हुआ है। शौच, लघु शंका के लिए टॉयलेट, अस्थियां संभाल कर रखने के लिए अस्थि कक्ष बना हुआ है। जिसमें परिवारजन अल्मारी में दिवंगत की अस्थियां सुरक्षित रखते हैं। जबकि यहां लावारिस शवों के नि:शुल्क दाह-संस्कार पूरे रीति-रिवाजों के अनुसार अपनों की तरह सेवादार करते हैं। साथ ही अपने खर्चे पर हरिद्वार लावारिस अस्थियों का विसर्जन करवाते हैं।