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पढ़ाई-परीक्षा का पता नहीं, हनुमानगढ़ जिले की पाठशालाओं को खूब मिल रहा दान

हनुमानगढ़. कोविड-19 महामारी के चलते गत एक बरस से शिक्षण व्यवस्था पूर्णत: प्रभावित है। पढ़ाई से लेकर परीक्षा तक का अता-पता नहीं है। इसके बावजूद लोगबाग पाठशालाओं में खूब दान दे रहे हैं।
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पढ़ाई-परीक्षा का पता नहीं, हनुमानगढ़ जिले की पाठशालाओं को खूब मिल रहा दान

पढ़ाई-परीक्षा का पता नहीं, हनुमानगढ़ जिले की पाठशालाओं को खूब मिल रहा दान

पढ़ाई-परीक्षा का पता नहीं, हनुमानगढ़ जिले की पाठशालाओं को खूब मिल रहा दान
- जिले एवं प्रदेश की पाठशालाओं को निरंतर मिल रहा जनता से आर्थिक सहयोग
- बीते माह मिला एक करोड़ रुपए से अधिक दान
हनुमानगढ़. कोविड-19 महामारी के चलते गत एक बरस से शिक्षण व्यवस्था पूर्णत: प्रभावित है। पढ़ाई से लेकर परीक्षा तक का अता-पता नहीं है। इसके बावजूद लोगबाग पाठशालाओं में खूब दान दे रहे हैं। जिले से लेकर प्रदेश तक में सरकारी विद्यालयों को विभिन्न विकास कार्यों आदि के लिए दानदाता आर्थिक सहयोग कर रहे हैं। कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के चलते फिलहाल पाठशालाएं बंद हैं। मगर गत माह भी विद्यालयों को अच्छा आर्थिक सहयोग मिला।
प्रदेश की बात करें तो केवल मार्च में ही एक करोड़ रुपए से अधिक का दान लोगों ने सरकारी स्कूलों को दिया। शिक्षा विभाग की ओर से दान संबंधी मासिक रैंकिंग भी जारी की जाती है। सर्वाधिक दान प्राप्त करने वाले टॉप टेन जिलों में हनुमानगढ़ भी शामिल रहा। प्रथम स्थान पर चूरू जिला रहा। वहां के विद्यालयों को लोगों ने 23 लाख रुपए से भी ज्यादा का आर्थिक सहयोग दिया। जबकि बांसवाड़ा करीब दस लाख अठानवे हजार व सीकर करीब दस लाख अड़सठ हजार रुपए के साथ क्रमश: प्रथम एवं द्वितीय स्थान पर रहे।
कितने ट्रांजेक्शन व राशि
जिलों की रैंकिंग राशि एवं ट्रांजेक्शन के हिसाब से जारी की जाती है। राशि दान में हनुमानगढ़ जिला 355200 रुपए के साथ नौवें स्थान पर रहा। इसके लिए कुल 37 ट्रांजेक्शन किए गए। ट्रांजेक्शन रैंकिंग में हनुमानगढ़ जिला 28वें स्थान पर रहा। इसका मतलब कि जिले में अन्य कई जिलों की तुलना में कम ट्रांजेक्शन में अधिक राशि प्राप्त हुई। ट्रांजेक्शन रैंकिंग में झालावाड़ जिला प्रथम रहा। वहां ट्रांजेक्शन तो 622 हुए। मगर राशि केवल 127257 रुपए ही जमा हुई।
कहीं से भी अपने स्कूल को सहयोग
ज्ञान संकल्प पोर्टल पर डोनेट टू ए स्कूल के जरिए कहीं से भी विद्यालय को दान दिया जा सकता है। ऐसे पूर्व विद्यार्थी जो अब विभिन्न जिलों, प्रदेशों या देशों में निवास कर रहे हैं, वे भी आसानी से अपने स्कूल के विकास में आसानी से ऑनलाइन सहयोग कर सकते हैं। ऑनलाइन पहले ट्रांजेक्शन के लिए दानदाता के पंजीयन की भी जरूरत नहीं होती। हालांकि दूसरी बार ट्रांजेक्शन पर पंजीयन कराना पड़ता है। यह बहुत ही आसान सी प्रक्रिया होती है। इस योजना में दान करने वालों को टैक्स में भी निर्धारित छूट मिलती है।
मर्जी से कार्य भी
कई दानदाता तो केवल राशि देने तक ही सीमित रहते हैं। जबकि कई राशि से अपनी मर्जी के अनुसार कार्य विद्यालय में कराने के इच्छुक होते हैं। यह प्रावधान भी इस योजना में है। एसडीएमसी के खाते में दानदाता की दी गई राशि जमा हो जाती है। फिर पाठशाला प्रबंधन दानदाता की इच्छा के अनुरूप कार्य करवा सकती है। दान राशि को उसी वित्तीय वर्ष में खर्च करने की अनिवार्यता है।

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