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बीबीएमबी की बैठक में नहीं तय हो सका प्रदेश के पूरे माह का शेयर

https://www.patrika.com/hanumangarh-news/ हनुमानगढ़. नहरी पानी मामले में संकट की स्थिति दूर नहीं हो पा रही है। हालात इतने विकट होते जा रहे हैं कि अब बीबीएमबी भी किसी तरह का रिस्क लेने से गुरेज कर रहा है।  

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बीबीएमबी की बैठक में नहीं तय हो सका प्रदेश के पूरे माह का शेयर

बीबीएमबी की बैठक में नहीं तय हो सका प्रदेश के पूरे माह का शेयर

बीबीएमबी की बैठक में नहीं तय हो सका प्रदेश के पूरे माह का शेयर
-नहरों में जल संकट की स्थिति हो रही गंभीर

हनुमानगढ़. नहरी पानी मामले में संकट की स्थिति दूर नहीं हो पा रही है। हालात इतने विकट होते जा रहे हैं कि अब बीबीएमबी भी किसी तरह का रिस्क लेने से गुरेज कर रहा है। स्थिति यह है कि भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड (बीबीएमबी) की गुरुवार को वीडयो कान्फ्रेंसिंग के जरिए संपन्न हुई बैठक में भी अगले माह के शेयर की स्थिति साफ नहीं हो सकी। इसमें पूरे फरवरी माह के शेयर का निर्धारण करने को लेकर हालांकि कई देर तक चर्चा जरूर हुई। लेकिन बांधों में पानी की आवक नहीं सुधरने के कारण अगले माह के पानी का फैसला इस बैठक में नहीं हो सका। संभवत: जल संकट की स्थिति के कारण इस बार किस्तों में शेयर निर्धारित किया जाएगा। काफी देर तक चली चर्चा के बाद भी बीबीएमबी चैयरमेन वर्तमान में उपलब्ध जल के हिसाब से दस फरवरी तक इंदिरागांधी नहर को तीन में एक समूह में चलाने जितना पानी देने पर ही सहमत हुए। इसके बाद फिर से नौ या दस फरवरी को बैठक बुलाकर आगे के शेयर की स्थिति स्पष्ट करने की बात चैयरमेन ने कही। बीबीएमबी की बैठक में राजस्थान का प्रतिनिधित्व करते हुए जल संसाधन विभाग उत्तर संभाग हनुमानगढ़ कार्यालय के मुख्य अभियंता विनोद मित्तल ने राजस्थान की मांग से चैयरमेन को अवगत करवाया। लेकिन चैयरमेन ने अभी और इंतजार करने की बात कहकर एक बार केवल दस फरवरी तक का शेयर निर्धारित किया है।

समझिए पानी का गणित
२१ सितम्बर २०२० को बांधों में उपलब्ध जल का आंकलन करने के अनुसार रावी व्यास नदियों के पानी में राजस्थान का डिप्लीशन अवधि में हिस्सा १७८३९६३ क्यूसेज डेज बनता है। इसमें इंदिरागांधी नहर परियोजना का हिस्सा १३३१८५७ क्यूसेक डेज है। इस उपलब्ध पानी के आधार पर विभाग की ओर से सात बारी पानी का निर्धारण किया गया। इसमें दो बारी पानी यानी 26 सितम्बर से तीस अक्टूबर २०२० तक इंदिरागांधी नहर को चार में दो समूह में चलाने के बाद बाकी की पांच बारी तीन में एक समूह में चलाने का रेग्यूलेशन पारित किया गया है। इस रेग्यूलेशन के अनुसार नहरों को चलाने के लिए भी कुल १५६१३७५ क्यूसेक डेज पानी की जरूरत है। जाहिर है इस रेग्यूलेशन को प्रभावी बनाने में भी वर्तमान परिस्थिति को देखते हुए २२९५१८ क्यूसेक डेज पानी की कमी होगी। पूर्व में तय शेयर की तुलना में २५ प्रतिशत बैटर इनफ्लो मानते हुए इंदिरागांधी नहर में सात बारी पानी चलाने का रेग्यूलेशन निर्धारित किया था। लेकिन अब मावठ कमजोर रहने के कारण जल संकट की स्थिति बनी हुई है। हालात ऐसे हो रहे हैं कि सातवीं बारी पानी को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। दस फरवरी तक नहरों में सिंचाई पानी चलाने के बाद अब आगे तय शेयर के अनुसार केवल पेयजल चलाने जितना पानी बचता है। इसलिए किसानों के साथ ही अब विभागीय अधिकारियों में भी बेचैनी बढऩे लगी है।