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हनुमानगढ़. हड़प्पा सभ्यता से टक्कर लेने से पहले ही सिंधु सभ्यता का नगर मोहनजोदड़ो डूब गया। हड़प्पा से निष्कासित व्यापारियों का एक प्रमुख मोहनजोदड़ो में शरण लेकर वहां का प्रधान बन बैठता है। फिर स्वर्ण के लिए सिंधु नदी पर बांध बनवाता है। उससे सुमेरियन लोगों से तांबे के हथियार खरीदता है ताकि हड़प्पा पर हमला कर सके। मगर इससे पहले ही बांध टूटने से मोहनजोदड़ो नष्ट हो जाता है। यह कहानी है शुक्रवार को रिलीज हुई आशुतोष गोवरीकर की फिल्म मोहेंजो दारो की। सिंधु घाटी सभ्यता के मोहनजोदड़ो नगर की पृष्ठभूमि पर रची प्रेम कथा पर आधारित इस फिल्म में काल्पनिक विषयवस्तु का सहारा लिया गया है। फिल्म में हड़प्पा से लड़ाई का जो मंसूबा विलेन का दिखाया गया है, उससे हड़प्पा वालों का ताकतवर और योद्धा होने का पता चलता है। यह सर्वविदित है कि हड़प्पा सभ्यता के कालीबंगा में दुर्ग के अवशेष मिले हैं, जो यह पुष्टि करते हैं कि वहां के लोग योद्धा व लड़ाकू थे। हालांकि, फिल्म की शुरुआत में ही यह कहा गया है कि इसमें किसी ऐतिहासिक तथ्य, मान्यता व मत को चुनौती नहीं दी गई है और न ही प्रमाणिकता का दावा किया गया है।
अंत पर नहीं एक राय
फिल्म में मोहनजोदड़ो नगर डूबने से नष्ट हुआ दिखाया गया है, जबकि इतिहासकारों में इसे लेकर कई मत हैं। इसमें सिंधु नदी के रुख में बदलाव, सैलाब, हमलावर व भूकंप शामिल है। इतिहासकार मोहनजोदड़ो के नष्ट होने का इसमें से कोई एक कारण मानते हैं।
कालीबंगा बहुत प्राचीन
सिंधु घाटी सभ्यता के दो महत्वपूर्ण स्थल चिह्नित हुए थे, उनमें मोहनजोदड़ों के साथ कालीबंगा भी शामिल था। 1993 में हुए एक शोध के मुताबिक कालीबंगा सिंधु घाटी सभ्यता के समकालीन ही नहीं अपितु उससे पुरानी भी है। यह सरस्वती व द्वश्द्वंती नदियों के संगम पर था। लेकिन इस स्थल को वह स्थान नहीं मिल सका, जो मोहनजोदड़ो को मिला। इसे केवल राजस्थान की सभ्यता से ही जोड़कर देखा जाने लगा।
डॉ. श्यामसुंदर शर्मा, व्याख्याता, इतिहास।
कालीबंगा के लोग योद्धा
सरस्वती नदी का यह क्षेत्र है। यहां सैकड़ों थेहड़ हैं। इनका न तो उत्खनन हो रहा है और न ही संरक्षण। कालीबंगा में हड़प्पा सभ्यता के हजारों पुरा अवशेष मिले हैं। इसे पर्यटन स्थल के रूप में सही ढंग से प्रचारित करने की जरूरत है। यहां न केवल देशी बल्कि विदेशी पुरातत्व प्रेमी भी बड़ी संख्या आएंगे। कालीबंगा में दुर्ग के अवशेष मिले हैं, जो यह पुष्टि करते हैं कि हमलावरों से मुकाबले में यहां के लोग दक्ष थे।
दीनदयाल शर्मा, साहित्यकार।
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