
तिकड़म नहीं आया काम, देना पड़ेगा क्लेम, जिले में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत वंचित किसानों को क्लेम जारी करने को लेकर कृषि आयुक्त ने बीमा कंपनी को किया पाबंद
तिकड़म नहीं आया काम, देना पड़ेगा क्लेम, जिले में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत वंचित किसानों को क्लेम जारी करने को लेकर कृषि आयुक्त ने बीमा कंपनी को किया पाबंद
-इससे पहले बीमा कंपनी किसानों के हक पर मारे बैठे थी कुंडली
हनुमानगढ़. बीमा कंपनी ने किसानों के हक पर कुंडली मारने का पूरा प्रयास किया। लेकिन कोई तिकड़म काम नहीं आया। आखिर में जीत धरतीपुत्रों की हुई। स्थिति यह है कि बीमा कंपनी की सभी दलीलें धरी की धरी रह गई। इतना ही नहीं जांच के दौरान बीमा कंपनी क्लेम रोकने को लेकर किसी तरह का ठोस आधार भी प्रस्तुत नहीं कर पाई। इसके बाद कृषि विभाग की ओर से तैयार फसल कटाई प्रयोग और औसत उपज के आंकड़ों को सही मानते हुए अब नोहर व भादरा के वंचित किसानों को खरीफ २०१९ का बकाया बीमा क्लेम जारी करने की कवायद तेज कर दी गई है। इसके तहत कृषि विभाग के आयुक्त डॉ. ओमप्रकाश ने बीमा कंपनी को सख्त लहजे में निर्देशित किया है कि वह अविलंब जिले के किसानों को फसल बीमा क्लेम जारी करे। इससे अब जिले में वंचित किसानों को फसल बीमा का क्लेम जल्द मिलने की उम्मीद जगी है।
कोरोना के कारण देरी
नोहर तहसील में खरीफ २०१९ में कुल ४८५३७ किसानों ने बीमा करवाया था। इनमें ४०४४८ किसानों को २६३ करोड़ का क्लेम जारी कर दिया गया है। जबकि नोहर क्षेत्र के विवादित १४ पटवार मंडलों के ५५११ किसानों का क्लेम अब तक जारी नहीं किया गया। परंतु अब सांख्यिकी विभाग के सहायक निदेशक की रिपोर्ट तैयार होने के बाद किसानों को क्लेम जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। कृषि आयुक्त की ओर से क्लेम जारी करने को लेकर निर्देश जारी करने के बाद बीमा कंपनी ने विभाग को अवगत करवाया है कि बीमा कंपनी के कुछ कार्मिकों को कोरोना हो गया है। इसलिए क्लेम जारी करने में थोड़ी देरी हो सकती है। हालांकि बीमा कंपनी स्तर पर जल्द से जल्द बकाया बीमा क्लेम जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
खराबे के बाद काट रहे थे चक्कर
खरीफ २०१९ में नोहर व भादरा में मौसम खराब होने के कारण मूंग, मोठ, ग्वार, बाजरा, कपास आदि फसलों को नुकसान हुआ था। एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी ऑफ इंडिया को बीमा करने के लिए अधिकृत किया गया था। भादरा के भनाई, नोहर के चक सरदारपुरा, देइदास, उत्तरादाबास, गोगामेड़ी, जसाना, रामसरा, २२ एनटीआर, मेघाना, रामगढ़ सहित आसपास के इलाकों में हुए फसल कटाई प्रयोग को लेकर बीमा कंपनी ने आक्षेप लगाए थे। इसमें कृषि विभाग की ओर से नियमानुसार थ्रेसिंग की प्रक्रिया पूर्ण नहीं करवाने तथा औसत उत्पादन भी ठीक से नहीं निकाले जाने के आरोप बीमा कंपनी ने लगाए थे। इससे फसल खराबे के बाद प्रभावित किसान सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हो रहे थे।
दूध का दूध, पानी का पानी
जिले के नोहर व भादरा के १५ पटवार मंडलों में खरीफ २०१९ का बीमा क्लेम कंपनी ने रोक लिया था। लेकिन गत सप्ताह सांख्यिकी विभाग के सहायक निदेशक विनोद गोदारा की ओर से की गई जांच में दूध का दूध और पानी का पानी, सब साफ हो गया। हालात ऐसे थे कि जांच के वक्त बीमा कंपनी फसल कटाई प्रयोग को लेकर लगाए गए आरोपों के संबंध में कोई ठोस आधार प्रस्तुत नहीं कर पाई है। इसके बाद कृषि आयुक्त ने अब बीमा कंपनी को तत्काल प्रभावित किसानों को क्लेम जारी करने का निर्देश जारी किया है।
पत्रिका बना आवाज
राजस्थान पत्रिका ने नोहर व भादरा के १५ पटवार मंडलों में फसल बीमा को लेकर उपजे विवाद को लेकर किसानों की आवाज को खबरों के माध्यम से बुलंद किया। सामूहिक प्रयासों से अब इस विवाद का हल निकला है। पत्रिका ने 'क्लेम देने से बचने को बीमा कंपनी निकाल रही रास्ताÓ व 'किसानों की मुश्किलें हो सकती है खत्मÓ आदि शीर्षक के माध्यम से किसानों की आवाज को बुलंद किया। परिणामस्वरूप अब किसानों को क्लेम जारी करने को लेकर सरकार स्तर पर निर्देश जारी किए गए हैं।
.......फैक्ट फाइल.....
-खरीफ २०१९ में जिले के नोहर व भादरा के १५ पटवार मंडलों में हुए फसल खराबे के बाद अब प्रभावित किसानों को क्लेम जारी हो सकेगा।
-जिले में नोहर क्षेत्र में खरीफ २०१९ में कुल ४८५३७ किसानों ने करवाया था बीमा।
-नोहर में खरीफ २०१९ में हुए फसल खराबे की तुलना में ४०४४८ किसानों को २६३ करोड़ का क्लेम कंपनी ने किया जारी।
-खरीफ २०१९ पेटे नोहर के ५५११ किसानों का क्लेम अब तक जारी नहीं हुआ था, अब कृषि आयुक्त के निर्देश पर इन किसानों को बीमा क्लेम मिल सकेगा।
Published on:
15 Sept 2020 09:27 am
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