
90 दिन से अधिक चला धरना, अभी तक नहीं हुई सुनवाई
90 दिन से अधिक चला धरना, अभी तक नहीं हुई सुनवाई
- आश्वासन दिया, अब ठंडे बस्ते में प्रस्ताव
हनुमानगढ़. सीकर की तर्ज पर जिला अस्पताल में बेड की संख्या अतिरिक्त सौ करने का मामला ठंडे बस्ते पर है। टाउन के नागरिकों ने मांगों को लेकर 90 दिन से अधिक धरना दिया था। लेकिन अभी जिला अस्पताल में बेड की संख्या बढ़ाने को लेकर आगामी कार्यवाही नहीं हुई। इसलिए जिला अस्पताल बचाओ संघर्ष समिति के सदस्यों ने हाल में विधायक को समझौता वार्ता में हुए निर्णय के बारे में अवगत करवाया और जिला अस्पताल में सौ बेड बढ़ाने की मांग की। जिला अस्पताल के कायाकल्प को लेकर 35 से 55 करोड़ रुपए तक केबजट पर बात हुई थी। इस राशि से ओपीडी ब्लॉक को बहुमंजिला का रूप दिया जाएगा। यह निर्णय गत 5 मार्च को जिला अस्पताल संघर्ष समिति के सदस्यों व जिला प्रशासन के अधिकारियों ने लिया था। इसमें मेडिकल कॉलेज के बजट में से महात्मा गांधी जिला चिकित्सालय में सौन्दर्यकरण, नवीनीकरण व पुन: निर्माण कार्य करवाया जाएगा। इसके अलावा महात्मा गांधी जिला चिकित्सालय में 200 बेड व 100 एमसीएच के बेड संचालित है। जिला चिकित्सालय में 100 बेड बढ़ाकर 400 बैड करने पर सहमति हुई थी। इसके बाद से कोई आगामी कार्यवाही नहीं हुई। सूत्रों की माने तो नवां बाइपास पर निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेज का निर्माण पूरा होने के बाद ही अस्पताल के भवन के लिए डीपीआर तैयार की जाएगी। उस वक्त जिला अस्पताल के भवन को शामिल करने के लिए डीपीआर में जिक्र किया जाएगा। फिलहाल 2023 में मेडिकल कॉलेज का निर्माण करना निर्धारित है। इसके बाद इसके सामने स्थित 16 बीघा में अस्पताल निर्माण की डीपीआर तैयार की जाएगी। उसी दौरान जिला अस्पताल का कायाकल्प करने के लिए डीपीआर तैयार होगी।
जिला अस्पताल प्रशासन ने यह किया था तय
अगस्त 2021 में जिला अस्पताल की इमारत को छह मंजिला करने का प्रस्ताव तैयार किया गया था। इस नक्शे में सड़कों की चौड़ाई 12 मीटर व डिवाइडर दिखाया गया था। इन डिवाइडरों पर पौधरोपण कर सौंदर्यीकरण की योजना तैयार की गई थी। वहीं तीन प्रवेश द्वार की चौड़ाई बढ़ाते हुए चालीस फीट करने को लेकर भी नक्शे में योजना दर्शा रखी थी। लेकिन इसके बाद से मेडिकल कॉलेज के लिए गठित टीम ने इस योजना पर काम बंद कर दिया। इसके पीछे की वजह भविष्य में पार्किग की दिक्कत व अन्य समस्याओं का जिक्र किया गया। मेडिकल कॉलेज का बेस अस्पताल जिला अस्पताल रखते हुए कायाकल्प करने की जो योजना तैयार की गई थी। उसी के मुताबिक ग्राउंड फ्लोर पर 110 बेड का विभिन्न वार्ड, फस्र्ट फ्लोर पर 100 बेड के विभिन्न वार्ड, वर्तमान में एक्स रे कक्ष, सीटी स्कैन की सुविधा को एमसीएच की पुरानी यूनिट में शिफ्ट करने की कागजी कार्यवाही की गई थी। ऑपरेशन थियेटर को ग्राउंड फ्लोर पर ही रखा जाना था। एमसीएच यूनिट के फ्स्र्ट फ्लोर पर बीस बेड का एक वार्ड, द्वितीय फ्लोर पर 50 बेड का एक वार्ड व इसके अलावा बीस बेड का दूसरा वार्ड व एमबीबीएस स्टूडेंट के लिए लेक्चर थियेटर भी किए जाने का निर्णय लिया गया था। छह मंजिला इमारत में जनरल मेडिसन के चार वार्ड, प्रत्येक वार्ड में 25 बेड करने की योजना थी। इसी तरह जनरल सर्जरी के भी चार वार्ड और इनमें बेड की संख्या सौ की गई थी। बच्चों के इलाज के लिए दो वार्ड। प्रत्येक वार्ड में 50 बच्चों को भर्ती करने की सुविधा। इसके अलावा 50-50 बेड की क्षमता के दो जेएसएसवाई वार्ड। कान-नाक व गले से संबंधित रोगी के इलाज के लिए 10 बेड का एक वार्ड अलग से करने का प्रावधान किया गया था। इसी छह मंजिला इमारत में आखों के इलाज के लिए एक यूनिट भी तय की गई थी। जिसमें दस बेड पर रोगी भर्ती करने की सुविधा नक्शे में दर्शाई गई थी।
योजना बदली तो लगाया था धरना
उक्त योजना के बदलते ही टाउन के नागरिकों ने जिला अस्पताल के समक्ष धरना शुरू कर दिया। इनकी मांग थी कि जिला अस्पताल की इमारत को पूर्व में प्रस्तावित छह मंजिला किया जाए और नवां बाइपास पर निर्माणाधीण मेडिकल कॉलेज का बेस अस्पताल भी जिला अस्पताल को ही रखा जाए। इन मांगों को लेकर 90 दिन से अधिक धरना चला। जिसमें भाजपा के पदाधिकारियों ने भी समर्थन किया। इसके बाद जिला प्रशासन व धरने पर बैठे लोगों के बीच समझौता वार्ता हुई। जिसमें जिला अस्पताल में सौ बेड अतिरिक्त करते हुए 35 से 55 करोड़ रुपए का बजट पारित करने का आश्वासन दिया गया। लेकिन अभी तक आगामी कार्यवाही नहीं हुई।
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Published on:
17 Apr 2022, 10:26 PM IST
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