खेतों में जड़ तंत्र को यूं मिल सकती है मजबूती
-जिले में धान की बिजाई शुरू, पंजीरी उखाडऩे से पहले सावधानी बरतने की दे रहे सलाह
-नर्सरी प्रबंधन से ही अच्छा उत्पादन ले सकते हैं किसान
हनुमानगढ़. जिले में धान की बिजाई शुरू हो गई है। किसान खेतों में इस समय इस कार्य में जुट गए हैं। मृदा एवं बीज जनित कवक रोग बकानी का नियंत्रण/प्रबंध नर्सरी तैयार करते समय या पंजीरी को खेत में ले जाते समय किया जा रहा है। इसलिए पंजीरी उखाडऩे से सात दिन पहले नर्सरी में भरे पानी में कार्बेंडिज्म पचास प्रतिशत की 500 ग्राम रेत में मिलाकर बिखेरने की सलाह दी जा रही है। कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार पंजीरी की जड़ों को इसी रसायन के घोल में छह घंटे डूबोकर रखने के बाद रोपाई करनी चाहिए। इसके अतिरिक्त किसानों को चाहिए कि पंजीरी हमेशा खड़े पानी से उखाडऩी चाहिए। ताकि पौधे की जड़ तंत्र को कम से कम नुकसान हो सके। जिले में औसतन 30 से 35 हजार हेक्टैयर में धान की बिजाई होती है। यहां उत्पादित बासमती धान की मांग देश-विदेशों में खूब होती है। गत बरसों में धान की सरकारी खरीद शुरू होने से किसानों का रुझान इसकी खेती की तरफ बढ़ा है। चालू खरीफ सीजन में धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य भी बढ़ाया गया है। इससे किसानों का रुझान इसकी खेती की तरफ और ज्यादा बढऩे के आसार हैं। बीते बरसों में जिले में धान की सरकारी खरीद भी शुरू हो गई है। इससे किसानों को एमएसपी का लाभ मिलने लगा है। हजारों क्विंटल धान का उत्पादन होने से किसान जिले को राइस बेल्ट घोषित करने की मांग भी कर रहे हैं। हालांकि सरकार स्तर पर इस मांग को पूरा नहीं किया जा रहा है। मगर किसान इस मांग को लेकर लगातार आवाज उठा रहे हैं।
……वर्जन….
बिजाई कार्य में जुटे
जिले में धान की बिजाई शुरू कर दी गई है। किसान विभिन्न किस्मों के धान की बिजाई कर रहे हैं। यहां के बासमती धान की मांग खूब रहती है। किसानों को इसकी खेती को लेकर उन्नत विधि की जानकारी दी जा रही है।
-बीआर बाकोलिया, सहायक निदेशक, कृषि विभाग हनुमानगढ़