अंग्रेजों की शोषक कानूनी व्यवस्था की तर्ज पर बनाए गए तीनों कृषि कानून

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हनुमानगढ़. अंग्रेजी शोषक कानूनी व्यवस्था की तर्ज पर ही केन्द्र सरकार ने हाल ही खेती-मंडी संबंधी तीनों कानून बनाए हैं। कोरोना संक्रमण संकटकाल में अध्यादेश लाकर कानून लागू करने की जल्दबाजी की कोई जरूरत नहीं थी।

By: adrish khan

Published: 30 Jan 2021, 12:12 PM IST

अंग्रेजों की शोषक कानूनी व्यवस्था की तर्ज पर बनाए गए तीनों कृषि कानून
- तीनों कृषि कानून वापसी की स्थिति में वैकल्पिक कानूनों पर मंथन
- देश में हजार से ज्यादा कानून लोकतंत्र एवं मानवाधिकारों के खिलाफ
हनुमानगढ़. अंग्रेजी शोषक कानूनी व्यवस्था की तर्ज पर ही केन्द्र सरकार ने हाल ही खेती-मंडी संबंधी तीनों कानून बनाए हैं। कोरोना संक्रमण संकटकाल में अध्यादेश लाकर कानून लागू करने की जल्दबाजी की कोई जरूरत नहीं थी। स्वदेशी कानून सोसायटी कृषि कानूनों के विरोध से भी एक कदम आगे सोच रही है। हर तरफ मांग उठ रही है कि तीनों कृषि कानून वापस लिए जाए। मगर इन कानूनों को वापस लेने के बाद किसानों के हित में कौनसा कानून लागू हो, इसको लेकर सोसायटी ने मंथन शुरू कर दिया है। यह बात सेवानिवृत्त आईपीएस एवं स्वदेशी कानून सोसायटी अध्यक्ष दिलीप जाखड़ ने शुक्रवार को यहां व्यापार मंडल धर्मशाला में आयोजित प्रेस वार्ता में कही।
उन्होंने बताया कि पुलिस अधिनियम से लेकर आईपीसी, सीपीसी, साक्ष्य अधिनियम, विदेशी कानून, वन कानून, प्रेस व पुस्तक कानून, दिल्ली विशेष पुलिस अधिनियम आदि ऐसे कानून हैं जो अंग्रेजों के शासनकाल में बने। इनका मुख्य लक्ष्य अंग्रेजीराज और उनके हितों को संरक्षित करना था। जनता का हित इन कानूनों का ध्येय बिल्कुल नहीं था। आजादी के बाद थोड़े-बहुत परिवर्तन कर इन कानूनों को ज्यों का त्यों अपना लिया गया। सोसायटी अध्यक्ष जाखड़ ने बताया कि विधि आयोग, सेंटर फोर सिविल सोसायटी और स्वदेशी कानून सोसायटी ने एक हजार से ज्यादा ऐसे कानून छांटे हैं जो वर्तमान में लोकतंत्र, मानवाधिकार एवं अंतरराष्ट्रीय कानून के विरोधी हैं। इसके बावजूद हम उनको ढो रहे हैं। प्रेस वार्ता में एडवोकेट विजयसिंह चौहान, एडवोकेट सुशील भाकर, प्यारेलाल बंसल, एडवोकेट संयोग शर्मा, मनफूल भादू, सुधीर गोदारा आदि मौजूद रहे।
अर्टोनी जनरल और जज भी नहीं जाने
वरिष्ठ अधिवक्ता शंकर सोनी ने कहा कि देश में इतने कानून हैं कि उनकी सही संख्या तो अर्टोनी जनरल और जज भी नहीं बता सकते। कानूनों का लक्ष्य जनता के हितों का संरक्षण होना चाहिए। जबकि होता इसका उल्टा है। पुलिस जनता के प्रति जवाबदेह होनी चाहिए। मगर वह राज्य के प्रति जवाबदेह है। कानून ऐसे हैं जो जनता के बजाय राज्य के हित साधते हैं। इन पर मंथन करना होगा। अंग्रेजों की शासन करने वाली मानसिकता से बनाए गए कानूनों को बदलने एवं उनमें सुधार की जरूरत है।

adrish khan Reporting
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