ज्ञानदान में बेरोजगारी से तंग गुरुजी आत्मनिर्भर, पकौड़ा-कचौरी, फल-सब्जी बेच चला रहे घर

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हनुमानगढ़. पकौड़ा विक्रय को नेताओं ने कभी शिक्षित बेरोजगार के लिए अच्छा काम-धंधा बताया था। कोरोना महामारी ने नेताओं की वाणी को सही साबित कर दिया है। कुछ माह पहले ज्ञानदान करने वाले गुरुजी आजकल बेरोजगारी से तंग होकर पकौड़ा-कचौरी, फल-सब्जी बेचकर घर चला रहे हैं।

By: adrish khan

Published: 30 Nov 2020, 08:33 PM IST

ज्ञानदान में बेरोजगारी से तंग गुरुजी आत्मनिर्भर, पकौड़ा-कचौरी, फल-सब्जी बेच चला रहे घर
- निजी स्कूलों के शिक्षक लड़ रहे हालात से, दे रहे संदेश कि कोई काम नहीं होता छोटा
- सरकार से राहत पैकेज देने की मांग, नहीं मिली कोई सहायता
हनुमानगढ़. पकौड़ा विक्रय को नेताओं ने कभी शिक्षित बेरोजगार के लिए अच्छा काम-धंधा बताया था। कोरोना महामारी ने नेताओं की वाणी को सही साबित कर दिया है। कुछ माह पहले ज्ञानदान करने वाले गुरुजी आजकल बेरोजगारी से तंग होकर पकौड़ा-कचौरी, फल-सब्जी बेचकर घर चला रहे हैं। क्योंकि महीनों से विद्यालय बंद हैं। ऐसे में अल्पवेतन पर विद्यादान करने वाले निजी स्कूलों के शिक्षकों के समक्ष बेरोजगारी की व्याधि खड़ी हो गई। इसे दूर करने के लिए कोरोना संक्रमण संकट के बीच जब कोई राह ना दिखी तो शिक्षकों ने जीवटता का परिचय देते हुए फल-सब्जी की दुकान, कचौरी-पकौड़े की रेहड़ी आदि लगाने लग गए।
जिले की बात करें तो हालात यह हैं कि ना केवल शिक्षक बल्कि मंझले और छोटे निजी विद्यालयों के संचालकों ने भी ऐसे ही काम धंधे शुरू कर दिए हैं। बेरोजगारी का यह वक्त काट रहे हैं। साथ ही विद्यार्थियों को यह संदेश भी दे रहे हैं कि मेहनत व ईमानदारी से रोटी कमाने में कोई शर्म नहीं है और कोई कार्य छोटा-बड़ा नहीं होता। दूसरी तरफ यह सवाल भी पैदा होता है कि सरकार का बीस हजार करोड़ का पैकेज हो या जरूरतमंदों के लिए राशन, निजी स्कूलों के शिक्षकों को कुछ नहीं मिला।
लौटे नहीं, संघर्ष किया
नोहर कस्बे के प्रमुख निजी स्कूल के शिक्षक प्रदीप सिंह को मार्च का वेतन देकर लॉकडाउन के बाद हटा दिया गया। प्रयागराज लौटने से बेहतर यहीं काम-धंधा करने की ठानी। उनका साथ दिया स्कूल में ऑटो चलाने वाले राकेश राव ने जो कोरोना संकट के बाद कस्बे के भगतसिंह चौक पर चाय की थड़ी लगाने लगे थे। 28 अक्टूबर से प्रदीप सिंह रेहड़ी लगाकर कढ़ी कचौरी बेच रहे हैं। उनकी कढ़ी कचौरी, कढ़ी चावल व छोला पूरी आमजन को बहुत रास आ रही है। आराम से घर खर्च निकल रहा है।
कम खर्च का काम
हनुमानगढ़ के गांव चौहिलांवाली में निजी स्कूल संचालक राकेश स्वामी अब गांव में भुजिया-बिस्किट व स्टेशनरी की दुकान चला रहे हैं। कोरोना संकट में कोई दूसरा कामकाज शुरू करना ठीक नहीं लगा। वैसे भी अन्य कोई व्यापार शुरू करने के लिए लाखों रुपए की जरूरत होती है। दुकान के कारण घर खर्च निकल रहा है। वे सरकार से निजी स्कूलों के शिक्षकों व संचालकों के लिए राहत की कोई योजना लागू करने की मांग करते हैं।
गुजर बसर के लिए चला रहे आटो रिक्शा
हनुमानगढ़ जंक्शन निवासी मनोज पडि़हार एमए बीएड हैं और निजी विद्यालय में अध्यापन कार्य करवा रहे थे। लॉक डाउन से पहले तक सब कुछ बढिय़ा चल रहा था लेकिन अपे्रल माह से निजी विद्यालय से जवाब मिल गया। इधर उधर रोजगार के लिए प्रयास किए लेकिन बात नहीं बनी तो अब आटो रिक्श चलाने लगे। बकौल पडि़हार जीवन की गाड़ी तो चलानी ही थी, सो आटो रिक्शा चलाने लगे।
ज्वैलरी बनाने का कार्य किया आरंभ
टिब्बी कस्बे के विनोद कुमार सोनी अब अपने पुश्तैनी कार्य को अपना कर परिवार का भरण पोषण कर रहे है। विनोद कुमार 15 सालों से निजी विद्यालय में शिक्षक के तौर पर काम कर रहे थे। उन्होने जून माह तक स्कूल खुलने का इंतजार किया लेकिन जब लगा कि स्कूल खुलने में अभी समय लगेगा तो उन्होने अपना पुश्तैनी कार्य सुनार का काम सीखना शुरू किया। लगातार परिश्रम के बाद उन्होने सुनार का काम सीखा तथा अब हनुमानगढ में एक ज्वैलरी की दुकान पर काम कर रहे है।
मनरेगा में शुरू की मजदूरी
चंदूरवाली गांव निवासी सतपाल 10 ***** से प्राइवेट स्कूल में पढ़ा रहे हैं। लॉक डाउन केे बाद वे अब काश्त के अलावा मनरेगा में मजदूरी कर रहे है। उनका कहना है कि लॉक डाउन के बाद स्कूल बंद होने से उनकी आर्थिक स्थिति गडबडा गई थी। जिसके कारण वह मनरेगा में मजदूरी के लिए जाते है। जब मनरेगा का काम नही मिलता है तो वे अपनी अढाई बीघा जमीन की काश्त में परिवार का सहयोग कर रहे है। उनका कहना है कि सरकार को निजी स्कूलों को खोलने की ढील दी जानी चाहिए। ताकि बेरोजगार हो चुके प्राइवेट स्कूलों के शिक्षकों को राहत मिल सके।
सब्जी व सेंवई का सहारा
जंक्शन के गांधीनगर स्थित निजी विद्यालय की अध्यापिका सोनिया गोरा ने अपने कुशल गृहिणी के गुणों को लॉकडाउन के संकट से उबरने का आधार बनाया। वे सेंवई, पापड़ वगैरह बनाकर विक्रय करती हैं। साथ ही विद्यालय बंद होने के बाद बचे समय का सदुपयोग करने तथा कुछ आर्थिक सम्बल के लिए घर में ही सब्जी की छोटी सी दुकान खोल ली। वे निरंतर सब्जी विक्रय कर पैसे जुटा रही हैं तथा अन्य शिक्षकों को संकट से जूझने का हौसला दे रही हैं।

adrish khan Reporting
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