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चूक होते ही बिगड़ जाएंगे हालात, यूरिया प्रबंधन सरकारी तंत्र के लिए बना चुनौती

https://www.patrika.com/hanumangarh-news/ हनुमानगढ़. जिले की जीडीपी में कृषि का बड़ा योगदान है। इसमें भी रबी की प्रमुख फसल गेहूं की खेती से हनुमानगढ़ जिले का नाम पूरे प्रदेश में जाना जाता है।  

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चूक होते ही बिगड़ जाएंगे हालात, यूरिया प्रबंधन सरकारी तंत्र के लिए बना चुनौती

चूक होते ही बिगड़ जाएंगे हालात, यूरिया प्रबंधन सरकारी तंत्र के लिए बना चुनौती

चूक होते ही बिगड़ जाएंगे हालात, यूरिया प्रबंधन सरकारी तंत्र के लिए बना चुनौती
-जिले में रबी की प्रमुख फसल गेहूं बिजाई का बढ़ रहा रकबा, यूरिया की मांग भी उसी अनुपात में बढऩे के आसार
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हनुमानगढ़. जिले की जीडीपी में कृषि का बड़ा योगदान है। इसमें भी रबी की प्रमुख फसल गेहूं की खेती से हनुमानगढ़ जिले का नाम पूरे प्रदेश में जाना जाता है। इस बार भी एक लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में गेहंू की बिजाई हो चुकी है। दो लाख हैक्टेयर तक बिजाई का रकबा जाने की उम्मीद है। इस स्थिति में इस फसल को पोषक तत्वों की खूब जरूरत पड़ेगी। इसके लिहाज से सरकार स्तर पर करीब एक लाख मीट्रिक टन यूरिया का आवंटन हनुमानगढ़ जिले के लिए किया गया है।
इसमें किसानों को यूरिया वितरित करने का काम भी शुरू कर दिया गया है। मगर इन दिनों पंजाब में यूरिया की आपूर्ति मांग के अनुसार नहीं होने से हनुमानगढ़ व आसपास के जिले से इसकी मांग पूरी की जाने लगी है। इसकी शिकायत मिलने के बाद हालांकि कृषि विभाग के अधिकारी सक्रिय हो गए हैं।
इसके तहत खाद विक्रेताओं के प्रतिदिन के स्टॉक रजिस्ट्रर को जांचने का काम भी विभाग स्तर पर किया जा रहा है। हालात ऐसे हैं कि आगे मामूली चूक होते ही इसका खमियाजा जिले के किसानों को भुगतना पड़ सकता है। क्योंकि जिले को आवंटित यूरिया को यदि पंजाब भेज दिया जाएगा तो निश्चित तौर पर जिले के किसानों को खाली हाथ रहना पड़ेगा। इस स्थिति में वर्तमान में सरकारी तंत्र के लिए यूरिया प्रबंधन का कार्य चुनौती बना हुआ है। विभागीय अधिकारियों की मानें तो बीते सप्ताह में हनुमानगढ़ जिले से तीन से चार सौ क्विंटल यूरिया अवैध रूप से पंजाब जाने की शिकायतें मिली थी। इसके बाद सत्यापन करने पर शिकायत सही निकली। अब सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थित खाद विक्रेता फर्मों के स्टॉक रजिस्ट्रर को जांचने का काम नियमित रूप से किया जा रहा है। जिन दुकानों पर स्टॉक के अनुसार दस्तावेज नहीं मिले, उनको नोटिस भी जारी किया गया है।
कृषि विभाग हनुमानगढ़ के उप निदेशक दानाराम गोदारा के अनुसार पंजाब के सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थित दुकानों पर हम लागातार जांच कर रहे हैं। अपने जिले के अधिकार क्षेत्र वाले दुकानदारों को पंजाब में यूरिया नहीं भेजने के लिए पाबंद कर रहे हैं। जिन दुकानदारों की ओर से नियम विरुद्ध यूरिया का कारोबार किया जा रहा है, उनको नोटिस भी जारी किया गया है। हमारी टीम जिले में लगातार यूरिया के स्टॉक को जांचने में लगी है। जिससे भविष्य में यूरिया किल्लत की स्थिति से बचा जा सके।

कितनी आपूर्ति हुई
हनुमानगढ़ जिले में रबी सीजन में एक लाख मीट्रिक टन यूरिया की मांग है। इसमें अभी तक ४४००० एमटी यूरिया की आपूर्ति जिले को करवा दी गई है। वितरण के बाद अभी जिले में बीस हजार एमटी यूरिया का स्टॉक भी पड़ा है। जबकि यूरिया के रैक लगातार हनुमानगढ़ पहुंचने का सिलसिला जारी है। इससे रबी सीजन में अभी यूरिया किल्लत की स्थिति नहीं आई है। लेकिन प्रबंधन में चूक होते ही कभी भी किल्लत की स्थिति बन सकती है।

कब तक रहेगी मांग
जिले में औसतन दो लाख हेक्टेयर में गेहूं की बिजाई होती है। इसमें पंद्रह से बीस फरवरी तक यूरिया की मांग रहती है। किसान सिंचाई के साथ यूरिया का उपयोग खेती में करते हैं। बीते वर्षों में गेहूं उत्पादन में जिला पूरे प्रदेश में सिरमौर रहा है।

बिजाई पर नजर
हनुमानगढ़ जिले में वर्ष २००७-०८ में गेहूं बिजाई ११९२६१ हेक्टेयर में हुई थी। जबकि वर्ष २०१९-२० में इसकी बिजाई का रकबा बढ़कर २६२५७२ हेक्टेयर हो गया। गेहूं बिजाई का रकबा लगातार बढऩे से जिले में सिंचाई पानी और यूरिया की मांग भी खूब रहती है।

किसानों को आर्थिक संबल
गेहूं की फसल किसानों के लिए नकदी फसल मानी जाती है। सरकारी खरीद होने से किसानों की जेब में तत्काल पैसा आता है। यही कारण है कि गेहूं बिजाई का रकबा दिनोंदिन बढ़ रहा है। एफसीआई की ओर से हनुमानगढ़ व श्रीगंगानगर जिले में गेहूं की सर्वाधिक सरकारी खरीद की जाती है। गेहूं खरीद के अनुपात में दोनों जिलों के किसानों को गत वर्ष करीब २४०० करोड़ का भुगतान किसानों को किया गया। बीते दिनों लॉकडाउन के दौरान आर्थिक मंदी के दौरान भी गेहंू की सरकारी खरीद शुरू होने के कारण जिले के किसानों को काफी आर्थिक संबल मिला।